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शुक्रवार, 29 फ़रवरी, 2008 को 09:29 GMT तक के समाचार
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भाजपा, वाम ने की बजट की आलोचना
यशवंत सिन्हा
महँगाई, ब्याज दर और मूलभूत ढाँचे की कमी के बारे में बजट में कुछ नहीं है: सिन्हा
संयुक्त प्रगतिशील गंठबंधन सरकार के वर्ष 2007-08 के बजट को जहाँ भाजपा ने पूरी तरह से ख़ारिज कर दिया है, वहीं सरकार को बाहर से समर्थन देने वाले वाम दलों ने भी इसकी आलोचना की है.

भारतीय जनता पार्टी नेता और पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने मीडिया को बताया, "बजट में ऐसा कुछ भी नहीं है जो अर्थव्यवस्था की मूल समस्याओं - महँगाई, ब्याज दर और मूलभूत ढाँचे की कमी को सुलझाने का रास्ता दिखाता हो."

उनका कहना था कि बजट को लोक-लुभावन बनाने की कोशिश की गई है लेकिन देखना होगा कि आम आदमी को इससे क्या मिलेगा. उन्होंने ये भी प्रश्न उठाया कि सरकार को किसानों और अन्य वर्गों का ध्यान कार्यकाल के आख़िरी वर्ष में ही क्यों आया?

 बजट में ऐसा कुछ भी नहीं है जो अर्थव्यवस्था की मूल समस्याओं - महँगाई, ब्याज दर और मूलभूत ढाँचे की कमी को सुलझाने का रास्ता दिखाता हो
यशवंत सिन्हा

किसानों के कर्ज़ माफ़ करने के बारे में उनका कहना था कि चाहे वित्त मंत्री ने इसके लिए 30 जून का समय रखा है लेकिन इसके लिए राज्यों का सहयोग चाहिए होगा और क्या ऐसी प्रशासनिक व्यवस्था है कि छोटे किसानों की पहचान की जा सके?

वामदल भी नाराज़

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की वरिष्ठ नेता वृंदा कारत ने कहा कि वे वित्त मंत्री से कुछ हद तक ही सहमत हैं.

उनका कहना था, "इस बजट में किसानों के मुद्दे का समाधान करने की कोशिश की गई है लेकिन देखना है कि कितने लोगों को फ़ायदा होता है. महँगाई और बेरोज़गारी के अहम मुद्दों के बारे में बजट में कुछ नहीं सुझाया गया है."

उधर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने बजट की आलोचना करते हुए कहा है कि बजट में किसानों की समस्याओं के समाधान के बारे में कुछ नहीं है.

 इस बजट में किसानों के मुद्दे का समाधान करने की कोशिश की गई है लेकिन देखना है कि कितने लोगों को फ़ायदा होता है. महँगाई और बेरोज़गारी के अहम मुद्दों के बारे में बजट में कुछ नहीं सुझाया गया है
सीपीएम की वृंदा कारत

सीपीआई ने किसानों का कर्ज़ माफ़ करने की तो सराहना की है लेकिन साथ ही कहा है कि सरकार और आगे भी बढ़ सकती थी और राष्ट्रीय ऋण राहत आयोग गठित कर सकती थी.

मीडिया से बात करते हुए सीपीआई नेता डी राजा ने कहा, "कोई नया रास्ता खोजने की जगह बजट केवल नुकसान को रोकने और पहले ही वाले आर्थिक सुधार की दिशा में बढ़ने की बात करता है."

प्रधानमंत्री ख़ुश

 कोई नया रास्ता खोजने की जगह बजट केवल नुकसान को रोकने और पहले ही वाले आर्थिक सुधार की दिशा में बढ़ने की बात करता है
सीपीआई के डी राजा

उधर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बजट को 'बेहतरीन' बताया है. उनका कहना था कि बजट 'आम आदमी, मध्य वर्ग और किसानों' के लिए है.

उधर वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने संसद में अपने भाषण के बाद कहा है कि कृषि क्षेत्र बुरी स्थिति में नहीं है और उनका आकलन है कि खाद्य पदार्थों का रिकॉर्द उत्पादन होगा. उन्होंने माना कि कृषि क्षेत्र की विकास दर 2.6 प्रतिशत है जबकि सरकार का लक्ष्य इसे चार प्रतिशत तक पहुँचाना है.

वित्त मंत्री का ये भी कहना था कि किसानों का कर्ज़ माफ़ करना कृषि क्षेत्र की केवल एक समस्या को सुलझाता है लेकिन इस समस्या के और पहलु भी हैं.

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