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गिरावट के साथ बंद हुए शेयर बाज़ार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय शेयर बाज़ारों में गुरुवार का दिन काफ़ी उतार-चढ़ाव भरा रहा और कारोबार के अंत में सेंसेक्स 110 और निफ़्टी 30 अंकों की गिरावट के साथ बंद हुए. सुबह हल्की बढ़त के साथ खुलने के कुछ ही देर बाद बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी बीएसई का सूचकांक सेंसेक्स नीचे चला गया और यही हाल नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के निफ़्टी का भी रहा. सेंसेक्स शुरू में 18,008.71 की ऊंचाई को छू गया लेकिन बाद में जब लुढ़कने लगा तो 17,417.63 अंक तक टूट गया. बाद में निचले स्तर पर ख़रीदारों का साथ मिलने से सेंसेक्स कुछ संभला और अंत कारोबार ख़त्म होने पर 109.93 अंक गिरकर 17,648.71 पर बंद हुआ. निफ़्टी में भी कुछ ऐसा ही उतार-चढ़ाव देखा गया और दिनभर के कारोबार के दौरान 5,251.65 और 5,071.15 अंक के बीच में रहा. हालांकि अंच में यह 30.15 अंकों की गिरावट के साथ 5,137.45 पर बंद हुआ. कटौती का असर नहीं इस उतार-चढ़ाव का सबसे बड़ा कारण बाज़ार में नकदी की कमी है और पिछले पखवाड़े आई ऐतिहासिक गिरावट के बाद खुदरा निवेशक पैसा लगाने से कतरा रहे हैं. इसके कारण कुछ चुनिंदा बड़े निवेशक मुनाफ़ा कमाने के लिए एक ही दिन में शेयरों की ख़रीद-बिक्री यानी ड्रे ट्रेडिंग कर रहे हैं जिससे बाज़ार को कोई निश्चित दिशा नहीं मिल पा रही है. साथ ही निकट भविष्य में वैश्विक अर्थव्यवस्था की धुंधली तस्वीर किए जाने से बाज़ार में मंदी का माहौल और बढ़ा है. अमरीकी फ़ेडरल रिजर्व ने लगातार दूसरी बार ब्याज दरों में कटौती की है. इस बार इसमें आधा फ़ीसदी की कमी की गई है और अब यह मात्र तीन फ़ीसदी रह गई है. इसका मक़सद है कि आम लोगों को सस्ते दरों पर पैसा उपलब्ध हो सके और वे खर्च करने के लिए आगे आएं ताकि पूरी अमरीकी अर्थव्यवस्था को गति मिल सके. लेकिन फ़ेडरल रिजर्व के फ़ैसले का ख़ुद अमरीकी शेयर बाज़ारों में कोई असर नहीं दिखाई दिया. डाऊ जोंस और नैस्डैक में गिरावट दर्ज की गई. इसके बाद जैसे ही एशियाई बाज़ार खुले तो उनमें भी उतार-चढ़ाव जारी रहे. |
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