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शनिवार, 05 जनवरी, 2008 को 12:32 GMT तक के समाचार
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'हैप्पी न्यू ईयर' कहने पर 175 करोड़ ख़र्च
मोबाइल पर संदेश
मोबाइल पर शुभकामना और इंटरनेट के जरिए तोहफ़े भेजने का चलन बढ़ रहा है
भारत में वाणिज्य और उद्योग संगठन एसोचैम का आकलन है कि नए साल के पहले दिन और उसकी पूर्व संध्या पर ई-कॉमर्स के ज़रिए क़रीब 175 करोड़ रुपए का कारोबार हुआ.

आने वाले दिनों में पर्व-त्योहार के मौक़ों पर संदेशों और उपहारों के इस कारोबार के और बढ़ने की उम्मीद की जा रही है.

एसोचैम के मुताबिक़ पिछले साल दीवाली के मौक़े पर लगभग 165 करोड़ रुपए के एसएमएस (शार्ट मैसेज सर्विस) और ई-कॉमर्स वाले तोहफ़े भेजे गए थे.

पारंपरिक रूप से संदेश भेजने के कारोबार के बड़े हिस्से पर डाक विभाग और कोरियर कंपनियों का वर्चस्व हुआ करता था.

'डाक-कोरियर को घाटा'

चिट्ठियाँ निकालता डाक कर्मचारी
संचार के क्षेत्र में विकास का असर डाक विभाग और कोरियर के कारोबार पर पड़ा है

संगठन का आकलन है कि देश भर के चार करोड़ नौजवानों का नए साल और दीवाली के मौक़े पर एसएमएस और ई-कॉमर्स पर भरोसा करना डाक और कोरियर वालों के लिए सीधा नुक़सान है.

एसोचैम के महासचिव डीएस रावत कहते हैं कि आने वाले समय में यह सिलसिला और बढ़ेगा.

उनका कहना है कि घाटे की भरपाई के लिए डाक विभाग और कोरियर कंपनियों को नए रास्ते तलाशने होंगे जो अनूठे और आकर्षक हों.

एसोचैम के महासचिव ने उम्मीद जताई है कि आने वाले 15-20 महीनों में टेलीकॉम क्रांति दो करोड़ नए नौजवान ग्राहकों को अपने साथ जोड़ लेगी.
शहर के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में बनने वाले ये नए उपभोक्ता अपने प्रिय लोगों को संदेश भेजने और उनसे बातें करने में मोबाइल और फ़ोन की सुविधा उठाएँगे.

रिपोर्ट के मुताबिक़ पिछले साल की दीवाली और नए साल के मौक़े पर ई-कार्ड और ई-शॉपिंग के व्यापार में 120 फ़ीसदी की उछाल दर्ज की गई है.

नववर्ष के अवसर पर ई-कार्ड और ई-शॉपिंग से 110 करोड़ रुपए का कारोबार हुआ. पिछले साल दीवाली में इसका कारोबार 130 करोड़ रुपए रहा था.

अनुमान लगाया गया है कि इसके कारण डाक विभाग को नए साल के मौक़े पर 15 से 18 करोड़ रुपए और पिछले साल दिवाली के अवसर पर आठ से 10 करोड़ रुपए का नुक़सान उठाना पड़ा.

इसी तरह कोरियर कंपनियों को भी पिछली दिवाली पर 5.50 करोड़ रुपए और इस नए साल पर 16 से 17 करोड़ रुपए के घाटे की आशंका जताई गई है.

दूरसंचार क्रांति का असर सिर्फ डाक विभाग या कोरियर कंपनियों के व्यापार पर ही नहीं पड़ा है.

देश भर में शुभकामना (ग्रीटिंग्स) कार्ड छापने वालों के कारोबार में भी
दीवाली और नए साल के मौक़े पर 35 से 40 फ़ीसदी की कमी पाई गई.

हालाँकि एसोचैम का मानना है कि ग्रीटिंग्स कार्ड का चलन बना रहेगा और इसकी माँग फिर कायम हो सकती है क्योंकि यही वह शुभकामना है जिसे कोई सहेज कर रख सकता है.

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