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मंगलवार, 07 नवंबर, 2006 को 17:17 GMT तक के समाचार
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सूचना प्रौद्योगिकी में लोगों का अभाव

आईआईटी
नई प्रतिभा की भारी कमी महसूस की जा रही है
व्यापार जगत से जुड़े प्रमुख लोगों ने सावधान किया है कि भारत के सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में उच्च तकनीकी योग्यता प्राप्त लोगों की कमी हो रही है.

उनका कहना है कि यदि इस स्थिति का जल्द ही हल न निकाला गया तो भारत विकास दर के अपने लक्ष्य को पूरा नहीं पाएगा.

इस संबंध में हैदराबाद शहर में हुए एक सम्मेलन में कहा गया कि ‘‘ युवा इंजीनियरों और कालेज से निकले ग्रेजुएट युवाओं में तकनीकी कुशलता की कमी है.

साफ्टवेअर इंड्रस्ट्री की संस्था नेसकॉम का कहना है कि यदि स्थिति ऐसी ही रही तो भारत में वर्ष 2010 तक इस क्षेत्र से जुड़े पाँच लाख लोगों की कमी हो जाएगी.

 भारत की आईटी कंपनियों को हर साल साढ़े तीन लाख इंजीनियर चाहिए जबकि इसकी तुलना में केवल डेढ़ लाख उच्च शिक्षा प्राप्त इंजीनियर ही मिल पाते हैं
किरण कर्णिक

नेसकाम के अध्यक्ष किरण कर्णिक ने इस सम्मेलन में कहा कि आने वाले वर्षों में योग्य इंजीनियरों की उपलब्धता हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी.

किरण कर्णिक का कहना था, "भारत की आईटी कंपनियों को हर साल साढ़े तीन लाख इंजीनियर चाहिए जबकि इसकी तुलना में केवल डेढ़ लाख उच्च शिक्षा प्राप्त इंजीनियर ही मिल पाते हैं" .

इस असंतुलन से योग्यता में खासी कमी आ रही है. जिसे लेकर आईटी कंपनियाँ खासी चिंतित हैं.

सम्मेलन में कहा गया कि भारत में बड़ी संख्या में ग्रेजुएट और इंजीनियर हैं लेकिन जिस तरह के तकनीकी ज्ञान और साथ काम करने की योग्यता की ज़रूरत है, उसका उनमें अभाव है.

इस समय भारत में आईटी और बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग इंड्रस्ट्री में लगभग तेरह लाख लोग काम कर रहे हैं.

इस साल लगाए गए अनुमान के मुताबिक भारतीय साफ्टवेअर इंड्रस्ट्री का निर्यात 30 अरब डालर के करीब होगा. वहीं घरेलू व्यापार सात से आठ अरब डॉलर के बीच होगा.

सम्मेलन में इंटेल के भारतीय अध्यक्ष फ्रेंक बी जोंस का कहना था, "स्कूल और कालेज से हाल ही में पढ़ कर निकले लोगों में आवश्यक योग्यता खोजना हमारे लिए मुश्किल से और मुश्किल होता जा रहा है".

उनका कहना है कि हमारी फ़र्म विश्वविद्यालयों से निकले ऐसे लोगों का चुनाव करती है जिनमें आईटी की बुनियादी समझ होती है. इसके बाद उन्हें लंबी ट्रेनिंग दी जाती है जिससे वह कंपनी में होने वाले काम को समझ सकें और कर सकें..

इस स्थति से निकलने के लिए इंटेल जैसी कंपनिया उन योग्य भारतीयों पर भरोसा करने लगी हैं जो लंबे समय से अमरीका में काम कर रहे हैं.

ऐसे लोगों को अब वापस बुलाया जा रहा है. इंटेल के फैंक जोंस का कहना है कि इस कार्यक्रम के तहत उनकी 10 प्रतिशत टीम वापस आ गई है.

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