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आईआईटी के पढ़ाकुओं पर कार्टून
दुनिया भर में मशहूर भारतीय तकनालाजी संस्थान यानी आईआईटी का ज़िक्र अमरीका के अख़बारों में है लेकिन एक कार्टून श्रंखला के ज़रिए. मशहूर श्रंखला 'डिलबर्ट' बड़ी-बड़ी कंपनियों में काम करने वालों पर आधारित है. इसमें अधिकारियों की कार्यशैली और सोचने के तरीक़ों पर कटाक्ष किए जाते हैं. अब इसके चरित्रों में ऐसे पात्र भी शामिल हैं जो आईआईटी से पढ़ कर निकले हैं. शोधकर्ताओं का कहना है कि अमरीका की सैलिकॉन वैली में सूचना तकनालाजी से जुड़ी कम से कम दस प्रतिशत परियोजनाओं के संस्थापक या सह-संस्थापक आईआईटी के इंजीनियर हैं. 'डिलबर्ट' के लेखक और चित्रकार स्कॉट ऐडम्स हैं और यह दो हज़ार से ज़्यादा पत्र-पत्रिकाओं में छपती है और प्रतिवर्ष बीस करोड़ डॉलर उगाहती है. भारत में सात आईआईटी हैं जिनमें स्नातक और स्नातकोत्तर डिग्रियाँ दी जाती हैं. यहाँ से पढ़ कर निकलने वाले बड़ी कंपनियों में नौकरी पा जाते हैं और अमरीका में भी कई कंपनियों में वे अधिकारी पद पर हैं. इसी बात ने ऐडम्स को प्रेरित किया कि वह इस जानेमाने कॉलेज का ज़िक्र अपनी श्रंखला में करें. भारतीय चरित्र 'अशोक' 'डिलबर्ट' में अशोक नाम का एक पात्र है जो दावा करता है कि वह आईआईटी से निकला है और इसलिए मानसिक तौर पर और लोगों से बेहतर है.
एक जगह वह कहता है, "इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नालॉजी में मैंने अपने 'विशाल' दिमाग़ का इस्तेमाल करना सीखा". ऐडम्स ने 1980 के दशक में कार्टून बनाने शुरू किए और उनका कहना है कि उनके कई दोस्त हैं जो आईआईटी से पढ़ कर निकले हैं. उन्होंने बीबीसी से एक बातचीत में कहा, "मैं आईआईटी के कई लोगों को जानता हूँ और अशोक नाम के मेरे एक सहयोगी रह चुके हैं". "मुझे लगा कि यह एक दिलचस्प बात होगी कि विश्व के सबसे प्रतिस्पर्द्धात्मक संस्थानो में से एक से पढ़ कर निकला एक व्यक्ति यह जान पाए कि काम की जगह पर हमेशा अक़्लमंदी से ही काम नहीं चल सकता है". आईआईटी के लोगों की इस कार्टून श्रंखला के बारे में अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ हैं.
आईआईटी, दिल्ली के पढ़े और अमरीका की एक कंपनी वेबरिज़ेन के प्रमुख अमित पामेचा कहते हैं, "यह काफ़ी घिसापिटा है और हममें से कई के बारे में सटीक नहीं है". लेकिन उन्होंने इस बात को माना कि 'डिलबर्ट' कार्टून में आईआईटी का ज़िक्र कॉलेज की शोहरत को मान्यता ज़रूर है. आईआईटी के ही एक अन्य पूर्व छात्र और न्यूयॉर्क में स्थित एक बैंक के वरिष्ठ वाइस प्रेसीडेंट जीतेंद्र स्वरूप कहते हैं कि इस श्रंखला में आईआईटी का ज़िक्र उसकी प्रतिष्ठा को बढ़ाता है. स्कॉट ऐडम्स कहते हैं कि आईआईटी के उनके दोस्तों को यह श्रंखला काफ़ी पसंद आई है. ख़ासतौर पर अमरीका में जहाँ अधिकतर लोगों ने आईआईटी का नाम ही नहीं सुना है. |
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