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'एनआरआई के लिए कुछ नहीं बजट में' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के वार्षिक बजट पर देश के बाहर रहने वाले भारतीय भी नज़र रखे हुए थे. भारत में ही नहीं इस बजट पर भारत के बाहर भी मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आ रही है. बजट में देश के विकास पर ज़ोर दिए जाने से तो अमरीका में रह रहे भारतीय मूल के लोग खुश हैं लेकिन कुछ लोग शिकायत करते नज़र आ रहे हैं कि अप्रवासी भारतीयों के लिए इस बजट में कोई खास प्रावधान नहीं किया गया है. बहुत से लोगों को यह डर था कि बजट गठबंधन राजनीति की भेंट न चढ़ जाए, लेकिन लोगों ने इस पहलू पर इत्मीनान की साँस ली. एटलांटा शहर में रहने वाले आर्थिक विश्लेषक नार्सी नरसिंहन को इस बजट से ज़्यादा आशा नहीं थी. उन्होंने कहा, “चूँकि यह एक गठबंधन सरकार है इसलिए मुझे बजट से ज़्यादा उम्मीद नहीं थी, लेकिन यह बजट काफी संतुलित और विकास की ओर बढ़ता हुआ बजट है. खासकर विकास की दृष्टि से बहुत अच्छा बजट है.” छोटी कारों पर लगने वाले उत्पाद शुल्क में कटौती के नतीजे में भारत में स्टील की माँग बढ़ेगी इससे भी अमरीका में रहने वाले कुछ भारतीय मूल के व्यापारी खुश हैं. एंडी गोयनका अमरीका में धातु की एक कंपनी चलाते हैं जो भारत को भी स्टील और अन्य धातुओं की सप्लाई करती है. कस्टम औऱ उत्पाद शुल्क घटाए जाने से उन्हें भी फायदा होगा. उन्होंने कहा, “शुल्क घटाए जाने से स्टील की खपत में वृद्वि होगी और हमे उम्मीद है कि भारत में इस वर्ष स्टील की माँग दोगुनी हो जाएगी. इससे हमारे जैसे व्यापारियों को लाभ होगा.” शिकायत कुछ लोगों को यह शिकायत है कि बजट में अप्रवासी भारतीयों के लिए कोई खास प्रावधान नहीं किया गया है. खास तौर पर यह कि भारत में पूंजी निवेश करने के लिए उन्हें बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.
न्यूयॉर्क के जैक्सन हाईट्स इलाके में जहाँ भारतीय मूल के लोग बड़ी संख्या में रहते हैं, व्यापार मंडल के अध्यक्ष शिव दास कहते हैं, “हम लोग जो देश से बाहर रहते हैं हमारे लिए तो इस बजट में कुछ है ही नहीं. हमें भारत में पूंजी लगाने में बड़ी अड़चनों का सामना करना पड़ता है. सरकारी दफतरों के चक्कर लगा लगा कर तंग हो जाते हैं.” लेकिन कुल मिलाकर लोगों को भारत में विकास से भी खासी उम्मीदें हैं. अमरीका में भारतीय मूल के लोगों की संस्था एसोसिएशन फॉर इंडियाज़ डेवेलपमेंट से जुड़े किरण विस्सा का मानना है कि बजट में कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए प्रावधान हैं लेकिन अभी काफी कुछ किया जाना बाकी है. किरण विस्सा कहते हैं, “ पैंसठ करोड़ भारतीय लोग खेती से जुड़े हैं इसलिए व्यापक पैमाने पर और भी बहुत कुछ किया जाना चाहिए. पिछले एक दशक में इस उद्योग की काफी अनदेखी की गई है.” सर्विस टैक्स में दो प्रतिशत कर वृद्वि से विमान का किराया थोड़ा बढ़ेगा लेकिन अप्रवासी भारतीयों के लिए वह इतनी बड़ी परेशानी नहीं जितनी कि बुनियादी सुविधाओं की कमी इसलिए वे भारत में मूल रूप से विकास में तेज़ी लाने के पक्षधर हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें ऊँची विकास दर मगर बेरोज़गारी बढ़ी27 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस गाँव, किसान, रोज़गार और शिक्षा को प्राथमिकता28 फ़रवरी, 2005 | कारोबार बजट: इंडिया के लिए, भारत के लिए नहीं28 फ़रवरी, 2005 | कारोबार दस हज़ार रुपए निकालने पर कर28 फ़रवरी, 2005 | कारोबार मुंबई शेयर बाज़ार की रिकॉर्ड ऊँचाई06 फ़रवरी, 2006 | कारोबार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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