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सोमवार, 20 जून, 2005 को 20:46 GMT तक के समाचार
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अमरीकी अधिकारियों की आउटसोर्सिंग

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डग बैटिंगर को भारत में अच्छा पद तो मिल ही रहा है, वहाँ की संस्कृति भी पसंद आ रही है
अमरीका की कंपनियाँ हाल के वर्षों में लागत कम करने के उद्देश्य से बंगलोर और हैदराबाद जैसे शहरों की ओर आती रही हैं, लेकिन अब उनके उच्च अधिकारी भी भारत का रुख़ करने लगे हैं.

अमरीका की बड़ी-बड़ी कंपनियों के उच्च कार्य अधिकारी अपनी ऑफ़शोर व्यवसाय विश्लेषण क्षमता लिए इस भरोसे के साथ भारत आ रहे हैं कि आने वाले समय में यह एक नई परंपरा बन जाएगी.

डग बैटिंगर और मैथ्यु सैटो '24/7 कस्टमर' के उच्च अधिकारी हैं. काफी समय तक भारत में रहने के बाद दोनों फिर से वापस भारत में रहकर काम करने के लिए तैयार हैं.

डग कहते हैं, ''मैं हमेशा भारत में काम करना चाहता था. भारतीय खाना और भारतीय संस्कृति मुझे बहुत अच्छी लगती है''.

डग ख़ास कर बंगलोर और वहाँ के प्रगतिशील फैशन और संस्कृति को पसंद करते हैं.

मैथ्यु के लिए भी बंगलोर तरह-तरह के खाने की जगह और 'पब' के कारण बहुत रोमांचक है. वे भी वापस बैंगलोर लौटने के लिए इच्छुक हैं.

उनके अनुसार बंगलोर बहुत अच्छा और तरह-तरह के आकर्षणों वाला शहर है.

उन्होंने कहा, "मेरा विचार हवाई यात्रा में आने-जाने में अधिक समय खर्च करने का भी नहीं है, इसलिए मैं सोचता हूँ कि मेरे लिए अच्छा है कि मैं भारत मे रहकर ही काम करूँ."

अनुभव का फ़ायदा

'24/7 कस्टमर' के प्रमुख कार्य अधिकारी पीवी कन्नन कहते हैं कि अमेरिका के अधिकारियों के पास बहुत कुशलता और कार्य संचालन की योग्यताएँ हैं जो कि भारतीय व्यापार वर्ग में नहीं हैं.

उन्होंने कहा, "दूसरा कारण यह है कि दूसरों से व्यापार कराने (बीपीओ) की कला के क्षेत्र में भारतीय उद्योग कम अनुभवी है. भारत में इस सेक्टर के दस से पंद्रह साल अनुभवी लोगों का मिलना मुश्किल है, इसलिए हम अमरीका के कुशल अनुभवी लोगों से काम ले रहे हैं."

डग का विश्वास है कि वे और मैथ्यु संभवतः एक नई परम्परा को जन्म दे रहे हैं. उन्होंने कहा, "हम सिर्फ एक अमरीकी कंपनी का नहीं बल्कि पूरे विश्व की आर्थिक व्यवस्था से जुड़ी 24/7 कस्टमर जैसी कंपनियों के हिस्से हैं."

डग को विश्वास है कि उच्च अनुभवी काम करने वाले अधिकारियों की संख्या लगातार बढ़ती ही जाएगी.

भारत की छाप उनके मन पर कैसी पड़ी, इसके बारे में डग ने कहा, "मेरे जीवन की सबसे अधिक यादगार बात यह है कि जब मैंने एक आटोरिक्शा मे बैठने कि हिम्मत की और बंगलोर के चक्कर लगाए." जबकि मैथ्यु ख़ुद को बंगलोर की की संस्कृति में रंग गया बताते हैं.

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