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सोमवार, 09 मई, 2005 को 14:41 GMT तक के समाचार
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भारत में सस्ती विमान सेवा की होड़

किंगफ़िशर विमान
किंगफ़िशर एयरलाइंस का कहना है कि उनके विमानों में फ़ैशन मॉडल परिचारिकाएँ होंगी
परेश शाह की उम्र है 30 वर्ष से कुछ अधिक और वे मुंबई में एक वित्तीय संस्था में मैनेजर हैं.

वे कुछ दिनों पहले अपने परिवार के साथ गर्मियों की छुट्टियों की योजना बना रहे थे. पिछली छुट्टियाँ उन्होंने पहाड़ों पर बिताई थीं और इस बार वे किसी समुद्री तट पर जाना चाहते थे.

लेकिन ट्रेवल एजेंट से हुई बातचीत के बाद उन्होंने केरल जाने का अपना इरादा छोड़ दिया क्योंकि मुंबई से केरल आने जाने का खर्च बैठ रहा था 20 हज़ार रुपए और मुंबई से सिंगापुर जाने आने का भाड़ा था 14 हज़ार रुपए.

वे कहते हैं, "यदि खर्च कम हो रहा हो तो मैं केरल की जगह विदेश क्यों न जाऊँ."

अब शाह परिवार निजी विमान कंपनी जेट एयरवेज़ से सिंगापुर जा रहे हैं जिसने हाल ही में भारत से सिंगापुर और मलेशिया की उड़ानें शुरु की हैं.

नई सेवाएँ

जल्दी ही जेट एयरवेज़ मुंबई से लंदन के हीथ्रो हवाई अड्डे के लिए उड़ान शुरु करने जा रहा है और आने जाने का आरंभिक किराया है, 23 हज़ार रुपए.

इन दो शहरों के बीच अगले साल के मध्यतक हर दिन आठ उड़ानें उपलब्ध हो जाएँगीं. जिसमें वर्जिन एटलांटिक, ब्रिटिश एयरवेज़ और एयरइंडिया के अलावा जेट एयरवेज़ की भी उड़ान शामिल होगी.

 हमारे विमानों में हर सीट में मनोरंजन की व्यवस्था होगी, अच्छा खाना होगा और एयर होस्टेस के रुप में फ़ैशन मॉडल होंगी
विजय मलया

यह केवल एक उदाहरण है कि भारत में विमानन उद्योग किस तरह फलफूल रहा है.

सेंटर फॉर एशिया फैसेफ़िक एविएशन का अनुमान है कि भारत के घरेलू उड़ानों में हर साल 50 लाख नए ग्राहक जुड़ेंगे जो 2010 तक साढ़े चार करोड़ तक हो जाएँगे.

भारतीय विमानन उद्योग में संभावना है कि आने वाले एक दशक में एक करोड़ नए रोज़गार पैदा होंगे.

हाल ही में एक साक्षात्कार में बोइंग के मार्केटिंग वाइस प्रेसिडेंट दिनेश केसकर ने कहा था कि भारत को अगले 20 सालों में विमान ख़रीदने के लिए 35 अरब डॉलर रुपयों का निवेश करना पड़ेगा.

किंगफ़िशर

एयरबस
हर साल 50 लाख नए ग्राहकों को लुभाने पर निगाह

विमानन उद्योग की इस बदली हुई तस्वीर ने कई नए खिलाड़ी पैदा कर दिए हैं.

और इनमें से एक है किंगफ़िशर एयरलाइन.

इस भारत के प्रमुख शराब व्यापारी विजय मलया ने शुरु किया है.

उनकी तुलना अक्सर वर्जिन एटलांटिक के मालिक रिचर्ड ब्रानसन से की जाती है और वे वादा करते हैं कि वे लोगों के उड़ान भरने के अनुभव को बदलना चाहते हैं.

उनकी उड़ानों के इंतज़ामों के प्रभारी अजित बागचंदानी कहते हैं, "हमारे विमानों में हर सीट में मनोरंजन की व्यवस्था होगी, अच्छा खाना होगा और एयर होस्टेस के रुप में फ़ैशन मॉडल होंगी."

उनको बाक़ायदा प्रशिक्षण दिया जा रहा है.

किराए की लड़ाई

इन नई विमान सेवाओं का असर एयर इंडिया के मुख्यालय तक भी हुआ है.

कभी दुनिया की सबसे अच्छी एयरलाइन कहे जाने वाले एयर इंडिया की छवि हाल के बरसों में ख़राब हुई है.

लेकिन पिछले सप्ताह एयर इंडिया ने एयर इंडिया एक्सप्रेस के नाम से एक नई सेवा शुरु की है जिसमें चमकीले रंगों में रंगे बोइंग 737 का उपयोग किया जा रहा है.

इस नई सेवा के अंतर्गत भारत और खाड़ी देशों के बीच विमान सेवा है जिससे कि यूएई, कुवैत, ओमान और बहरीन में काम कर रहे भारतीयों को लुभाया जा सके.

एयर इंडिया के जनसंपर्क निदेशक जितेंद्र भार्गव का कहना है कि अब कम किराए वाली विमान सेवाएँ सफल हो रही हैं.

एयर इंडिया मुंबई से अबू धाबी के बीच 2750 रुपए का किराए का भी प्रस्ताव दे रहा है.

खर्चों में कटौती की योजना के तहत विमान में खाने की सुविधा तो होगी लेकिन यात्रियों को शराब आदि ख़रीदना होगा और विमान में फ़िल्म और गेम जैसे मनोरंजन के लिए भुगतान करना होगा.

इसके अलावा एयरलाइन विमान के भीतर विज्ञापनों की जगह बेचने की भी योजना बना रही है.

नौकरियाँ

नए एयरलाइनों के शुरु होने से विमानन उद्योग में ढेर सारी नई नौकरियाँ पैदा हो रही हैं.

रणवीर झंगियानी ने पाँच साल पहले पायलट बनने का कोर्स पूरा किया था लेकिन उन्हें अब तक कोई नौकरी नहीं मिल सकी थी.

वे बताते हैं, "लगभग ढाई साल तक मैं फ़्लाइट किचन में काम करता रहा जिससे कि मेरा लाइसेंस रद्द न हो जाए."

लेकिन उन्हें मई 2004 में डेक्कन एयरलाइन में नौकरी मिल गई, जो भारत की पहली सस्ती विमान सेवा थी.

एकाएक एयरलाइनों की संख्या बढ़ने से पायलटों की मारामारी मच गई है.

हालत ये है कि झंगियानी को इंडियन एयरलाइन में नौकरी मिल गई है और उन्होंने डेक्कन की नौकरी छोड़ दी है.

और अब तो एयरलाइनों ने आपस में समझौता किया कि वे एक दूसरे कर्मचारियों को नहीं तोड़ेंगे.

हालांकि इस सब के बावजूद कई लोग सस्ती विमान सेवाओं को लेकर आशंका जता रहे हैं.

तेल की क़ीमतें बढ़ रही हैं और लाभ कम है ऐसे में पता नहीं ये एयरलाइन कितने दिन चल सकेंगे.

जो भी हो, इस समय तो शाह परिवार की तरह लोग सस्ती विमान सेवा का लाभ उठा रहे हैं.

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