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मंगलवार, 18 जनवरी, 2005 को 13:57 GMT तक के समाचार
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दुनिया का सबसे बड़ा विमान तैयार
एयरबस ए380
एयरबस को ग्यारह विमान कंपनियों से ऑर्डर मिल चुके हैं
दुनिया के अब तक के सबसे बड़ा हवाई जहाज़ का फ़्रांस में अनावरण किया गया.

एयरबस ए-380 नाम के इस विशालकाय हवाई जहाज़ में 555 यात्री सफ़र कर सकते हैं.

अभी तक अमरीकी कंपनी बोइंग का 747 जंबो जेट ही सबसे बड़ा जहाज़ था. लेकिन नए जहाज़ में इससे ज़्यादा यात्रियों के लिए जगह होगी, इसे 'सुपर जंबो जेट' कहा जा रहा है.

फ़्रांस के राष्ट्रपति ज़्याक शिराक ने जहाज़ बनाने वाली कंपनी को बधाई देते हुए इसे "मानवीय औद्योगिक क्षमता की बहुत बड़ी उपलब्धि" बताया है.

शिराक और ब्रितानी प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने कहा है कि ये यूरोप की उपलब्धि है.

आत्मविश्वास

ब्लेयर ने कहा, “ये दुनिया का सबसे कमाल का हवाई जहाज़ है. इसे आर्थिक और तकनीकी सफलता कहा जा सकता है.”

इस हवाई जहाज़ से यूरोपीय देशों का आत्मविश्वास काफ़ी बढ़ा है.

 ये दुनिया का सबसे कमाल का हवाई जहाज़ है. इसे आर्थिक और तकनीकी सफलता कहा जा सकता है
टोनी ब्लेयर

टोनी ब्लेयर ने भी कहा कि इस हवाई जहाज़ का निर्माण करके ये साबित हो चुका है कि यूरोप अंतरराष्ट्रीय बाज़ार की प्रतियोगिता में टक्कर ले सकता है.

एयरबस कंपनी के प्रमुख कार्याधिकारी नोएल फॉर्गियर्ड ने कहा है कि उन्हें कम से कम 250 हवाई जहाज़ बिकने की उम्मीद है.

इतने हवाई जहाज़ बिकने पर ही कंपनी का नफ़ा नुक़सान बराबर हो सकता है. उसके बाद बिकने वाले जहाज़ों पर कंपनी मुनाफ़ा कमाएगी.

उन्होंने कहा कि ए380 सफल हवाई जहाज़ साबित होगा और इसे 2006 तक यात्री उड़ानों के लिए तैयार कर लिया जाएगा.

एक रेडियो स्टेशन को दिए इंटरव्यू में फ़ॉर्गियर्ड ने कहा कि उन्हें इस जहाज़ की व्यापारिक सफलता को लेकर लेशमात्र भी संदेह नहीं है.

उन्होंने कहा, “हम ढाई सौ से कहीं ज़्यादा जहाज़ बेचेंगे. यहाँ तक कि ये संख्या सात सौ से साढ़े सात सौ के बीच हो सकती है.”

अधिकारी का कहना था कि ये जहाज़ अगले तीस से चालीस साल तक उड़ान भरने में सक्षम होंगे.

ख़रीदार तैयार

अभी तक एयरबस कंपनी को 11 विमान कंपनियों की ओर से 149 जहाज़ ख़रीदने के ऑर्डर मिल चुके हैं.

एयरबस कंपनी के अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि ए 380 जहाज़ बेचने के लिए चीन से उनकी बातचीत चल रही है.

इस जहाज़ परियोजना पर 11 अरब डॉलर ख़र्च हुए हैं.

जहाज़ बनाने वाली कंपनी चाहती है कि ज़्यादा से ज़्यादा यात्री कम पैसे ख़र्च करके दुनिया के बड़े शहरों के बीच यात्रा कर सकें.

जहाज़ के अनावरण में हिस्सा लेने के लिए ज़्याक शिराक और टोनी ब्लेयर के अलावा जर्मनी के चांसलर गरहर्ड श्रोएडर और स्पेन के प्रधानमंत्री होसे लुईस रोड्रिगेज़ ज़ापातेरो भी मौजूद थे.

इस जहाज़ के निर्माण में यूरोप के कई देशों की सरकारों की ओर से आर्थिक मदद दी गई थी और विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ये मदद नहीं मिली होती तो ऐसे जहाज़ का निर्माण संभव नहीं था.

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