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निजी क्षेत्र में आरक्षण पर समिति बनी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
निजी क्षेत्र की कंपनियों और संस्थानों में आरक्षण के मामले पर केन्द्र सरकार ने मंत्रियों की एक समिति बनाई है. सरकारी क्षेत्र में कमज़ोर वर्गों के लिए मौजूद आरक्षण नीति को निजी क्षेत्र में भी लागू करने की बात संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार ने अपने न्यूनतम साझा कार्यक्रम में की है. सोमवार शाम को सरकार द्वारा जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मंत्रियों की एक समिति का गठन किया है. यह समिति इस बात की जांच करेगी कि निजी क्षेत्र की नौकरियों में अनुसूचित जातियों और जनजातियों के साथ-साथ अन्य पिछड़े वर्गों के लिए किस तरह से आरक्षण की व्यवस्था की जा सकती है. जाँच-पड़ताल विज्ञप्ति में कहा गया है कि ये समिति इस विषय के सभी पहलुओं की जांच-पड़ताल करेगी. इस समिति के अध्यक्ष कृषि मंत्री शरद पवार होंगे.
उनके अलावा इस समिति में रेल मंत्री लालू प्रसाद, रसायन और उर्वरक मंत्री राम विलास पासवान, वित्त मंत्री पी चिदंबरम, वाणिज्य और उद्योग मंत्री कमलनाथ, सामाजिक न्याय मंत्री मीरा कुमार और दूरसंचार मंत्री दयानिधि मारन भी शामिल हैं. विज्ञप्ति में कहा गया है कि यह समिति निजी क्षेत्र से इस बात पर विचार-विमर्श करेगी कि वह किस प्रकार से अनुसूचित जातियों और जनजातियों के युवाओं की महत्वकांक्षाओं को पूरा कर सकता है. अपने न्यूनतम साझा कार्यक्रम में इस गठबंधन सरकार ने कहा था कि वह निजी क्षेत्र में आरक्षण के मुद्दे पर गंभीर है. इसमें यह भी कहा गया था कि इस विषय पर राजनीतिक पार्टियों, उद्योगजगत और दूसरी संस्थाओं के साथ एक राष्ट्रव्यापी चर्चा शुरू की जाएगी. |
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