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विश्व बैंक भारत को 12 अरब डॉलर देगा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
विश्व बैंक ने भारत को 12 अरब डॉलर का नया क़र्ज मंज़ूर किया है. सालाना तीन अरब डॉलर की दर से अगले चार वर्षों तक दी जाने वाली राशि बुनियादी ढाँचे, शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास की परियोजनाओं पर ख़र्च की जाएगी. तीन अरब डॉलर प्रति वर्ष के हिसाब से दिया जाने वाला ये उधार विभिन्न परियोजनाओं के ज़रिए उन लोगों को लाभ पहुंचाएगा जो समाज के निर्धन वर्ग से आते हैं. विश्व बैंक में भारत से जुड़े विभाग के निदेशक माइकल कार्टर ने बताया कि पिछले उधार की शर्तों के अधीन तीन अरब डॉलर तक उधार दिया जा सकता था लेकिन बैंक ने डेढ़ अरब प्रति वर्ष से ज़्यादा नहीं दिया. उन्होंने कहा, "इस बार हम उसे दोगुना कर रहे हैं." चुनौतियाँ समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार कार्टर ने कहा कि भारत में शिक्षा, स्वास्थ्य के क्षेत्र में सभी को समान अवसर नहीं मिल रहे हैं, और वहाँ महिलाओं और समाज के अन्य कमज़ोर तबके के लोगों को पर्याप्त आर्थिक अवसर उपलब्ध नहीं हैं.
उन्होंने भारत में ग़रीबी के निश्चित भौगोलिक क्षेत्र निर्मित होने का ज़िक्र करते हुए कहा, "इन असमानताओं के मद्देनज़र भारत की ऐसी छवि उभरती है जहाँ दो बिल्कुल अलग दुनिया हैं- एक में आर्थिक सुधार और सामाजिक परिवर्तनों के कारण हो रहा विकास है, जिसने लोगों के जीवन पर असर डाला है और नए अवसर पैदा किए हैं. दूसरी में जनता बिल्कुल पीछे छूट गई लगती है." उन्होंने कहा कि इन दो भारतों के बीच पुल बाँधना देश के लिए सबसे बड़ी चुनौती है. विश्व बैंक का नया कर्ज़ दो तरह के कामों के लिए दिया जाएगा- एक ढांचागत परियोजनाओं के लिए और दूसरे शिक्षा, स्वास्थ्य और महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए. अपनी इस नई रणनीति के बारे में विश्व बैंक ने पिछले साल भर के दौरान भारतीय सरकार के अलावा सामाजिक संगठनों, निजी क्षेत्र और मीडिया के प्रतिनिधियों के साथ गहन विचार-विमर्श किया था. उल्लेखनीय है कि एक अरब से ज़्यादा की आबादी वाले देश भारत में दुनिया के एक चौथाई निर्धन रहते हैं. |
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