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बाज़ार में टीसीएस का धमाकेदार प्रवेश | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत की सबसे बड़ी सूचना तकनीक कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज़ (टीसीएस) के मुंबई शेयर बाज़ार में उतरने के साथ ही उसके शेयरों में 16 प्रतिशत का उछाल आया है. देश में सॉफ़्टवेयर सर्विसेज़ आयात उद्योग में टीसीएस सबसे आगे है और जब उसने अपना पब्लिक इशू बाज़ार में उतारा था तो उसकी ज़बरदस्त ख़रीद हुई थी. सॉफ़्टवेयर डिज़ाइन की आउटसोर्सिंग और कॉल सेंटरों के चलते टीसीएस को काफ़ी फ़ायदा हुआ है. इस शेयर की क़ीमत साढ़े आठ सौ रुपए रखी गई थी मगर बुधवार को मुंबई स्टॉक एक्सचेंज में जब कारोबार शुरू हुआ तब इसकी क़ीमत 1050 रुपए से शुरू हुई और आख़िरकार 987.50 रुपए पर बंद हुई. कंपनी में 13.33 प्रतिशत की हिस्सेदारी का ये ऑफ़र लोगों में बहुत लोकप्रिय हुआ है. पब्लिक इशू की बिक्री 29 जुलाई से पाँच अगस्त तक चली थी. भारत में किसी निजी कंपनी ने पहली बार इतनी अधिक क़ीमत के शेयर बाज़ार में उतारे हैं. शेयर दलाल आलोक चूड़ीवाला के अनुसार यूँ तो बाज़ार मंदा था मगर टीसीएस के शेयरों में लोगों की काफ़ी दिलचस्पी रही. टीसीएस 1968 में स्थापित टीसीएस पिछले साल देश की पहली ऐसी आईटी कंपनी बनी जिसकी संपत्ति एक अरब डॉलर हो. इस कंपनी की शाखाएं दुनिया के 32 देशों में हैं और उनमें 28 हज़ार लोग काम करते हैं. टाटा कंपनी के चेयरमैन रतन टाटा ने कहा है कि टीसीएस शेयरों के बाज़ार में आने के साथ ही टाटा समूह एक नए युग में प्रवेश कर रही है. उन्होंने कहा कि टीसीएस एक वैश्विक कंपनी के रुप में दुनिया भर में काम करती रहेगी. उल्लेखनीय है कि टाटा समूह इस्पात, कार, चाय और खाद उद्योगों में एक बड़े खिलाड़ी के रुप में जाना जाता है. |
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