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'कम्युनिस्ट सुधार प्रक्रिया नहीं रोकेंगे' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के सबसे बड़े औद्योगिक घराने रिलायंस के प्रमुख मुकेश अंबानी ने विदेशी निवेशकों को आश्वस्त करने की कोशिश करते हुए कहा है कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली नई सरकार को समर्थन दे रही कम्युनिस्ट पार्टियाँ भारत में उदारीकरण में बाधा नहीं पहुँचाएँगी. अंबानी को अमरीका की राजधानी वॉशिंगटन में एक समारोह में 'एशिया सोसाइटी लीडरशिप' पुरस्कार से सम्मानित किया. सीनेटर हिलेरी क्लिंटन ने अंबानी को पुरस्कृत किया. इससे पहले ये पुरस्कार इंदिरा गाँधी और हेनरी किसिंजर जैसे प्रतिष्ठित लोगों को दिया जा चुका है. अंबानी ने चीन की कम्युनिस्ट सरकार और विदेशी व्यापारिक समुदाय के बीच बने रिश्तों का उदाहरण देते हुए कहा, "अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाज़ारों और विश्लेषकों को घबराने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि वे पहले भी चीन के कम्युनिस्टों का सामना सफलतापूर्वक कर चुके हैं." उन्होंने कहा, "मैं आपको विश्वास दिला सकता हूँ कि भारत में कम्युनिस्ट पार्टियाँ तो और भी अच्छे नतीजे देकर उन्हें भी शर्मसार कर देंगी." अंबानी ने उम्मीद व्यक्त की कि मनमोहन सिंह के नेतृत्व में बन रही सरकार सुधार प्रक्रिया को जारी रखेगी. मगर उन्होंने ये भी कहा कि ये सरकार सुधार की प्रक्रिया कुछ इस तरह चलाएगी कि ग़रीब निश्चिंत रहें. उन्होंने कहा, "जो सुधार ग़रीबों की मुश्किलों को सुलझाने में क़ामयाब नहीं होता वो ज़्यादा दिन नहीं चलता." अंबानी ने दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्रों में और बड़े सहयोग की ज़रूरत पर बल दिया. उधर हिलेरी क्लिंटन ने कहा कि देश की नई सरकार के सामने ग़रीबी हटाने के साथ ही एचआईवी-एड्स से निपटना भी बड़ी चुनौती होगी. क्लिंटन का कहना था कि देश के बड़े हिस्से को शिक्षा उपलब्ध कराना भी एक चुनौती होगी. |
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