|
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
शेयर बाज़ार में विदेशी निवेश का रिकॉर्ड
भारतीय शेयर बाज़ार विदेशों में भी हलचल मचाने में कामयाब हुआ और अक्तूबर में विदेशी निवेश 4.6 अरब डॉलर के उच्चतम स्तर तक पहुँच गया. भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी सेबी का कहना है कि भारतीय स्टॉक एक्सचेंज में विदेशी निवेश क़रीब डेढ़ अरब डॉलर बढ़ गया है. इस साल अक्तूबर तक निवेश 4.6 अरब डॉलर पहुँच गया है जो पिछले साल के मुक़ाबले छह गुना ज़्यादा है. इसे भारतीय अर्थव्यवस्था में मज़बूती का संकेत माना जा रहा है. भारतीय रिजर्व बैंक ने सोमवार को ही अपनी छमाही मुद्रा और ऋण नीति में सात प्रतिशत तक विकास दर की बात कही है. इसके साथ ही बैंक दर में भी कोई बदलाव न करने का फ़ैसला किया है. सोमवार को शेयर बाज़ार का सूचकांक भी 5000 के स्तर को पार कर गया. यह पिछले 42 महीनों में सबसे ज़्यादा था. इस साल मुंबई शेयर बाज़ार में 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है और यह तेज़ी पिछले छह महीनों में ही देखी गई है. इस साल अप्रैल में सूचकाँक काफ़ी निचले स्तर पर था, तब से उसमें क़रीब 73 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है. देश में दवा बनाने वाली कंपनियों के अलावा कार बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में सबसे ज़्यादा तेज़ी देखी गई. साथ में इस साल मानसून की अच्छी बारिश से कृषि क्षेत्र में भी उत्साहजनक नतीजे देखे गए. भारत के साथ-साथ दक्षिण एशिया के दूसरे देशों में भी यह रुख़ देखा जा रहा है. पिछले 10 महीनों में यहाँ शेयर बाज़ार के सूचकांक में 75 प्रतिशत से ज़्यादा बढ़ोतरी हुई है. |
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||