गैस खरीद पर भारत तुर्कमेनिस्तान समझौता

भारत ने तुर्कमेनिस्तान-अफगानिस्तान-पाकिस्तान-भारत (तापी) गैस पाइप लाइन परियोजना के जरिए प्राकृतिक गैस की खरीद और बिक्री समझौते पर हस्ताक्षर किया है.
ये समझौता भारतीय कंपनी गैस ऑथरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड और तुर्कमेनिस्तान की कंपनी तुर्कमेनगैज के बीच किया गया है.
बुधवार को असबगत में इसी तरह के समझौते अफगानिस्तान, पाकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान के बीच भी किए गए.
खरीद-बिक्री पर हुए इन समझौतों को 1680 किलोमीटर लंबी तापी गैस पाइपलाइन को बिछाने और उसके माध्यम से सदस्य देशों को प्राकृतिक गैस सप्लाई करने की परियोजना में एक अहम मोड़ बताया जा रहा है.
इस परियोजना को लागू करने में 7.6 अरब डॉलर खर्च होंगे.
तापी गैस परियोजना को अमरीका का समर्थन प्राप्त है जो इसे ईरान-पाकिस्तान-भारत गैस पाइपलाइन की जगह बढ़ावा देना चाहता है.
भंडार
तुर्कमेनिस्तान के पास विश्व के कुल प्राकृतिक गैस का चार प्रतिशत भंडार है. ये पाइपलाइन तुर्कमेनिस्तान के दौलताबाद गैस फील्ड से प्रारंभ होकर अफगानिस्तान के हेरात-कंधार से होते हुए पाकिस्तान के कोएटा और मुल्तान पहुंचेगी. गैस पाइपलाइन भारत-पाकिस्तान सीमा के फजिल्का में खत्म होगी.
तापी पाइपलाइन की क्षमता प्रतिदिन 90 मिलियन क्यूबिक मीटर गैस सप्लाई करने की होगी. तीस साल तक सप्लाई के लिए हुआ तैयार होनेवाली परियोजना साल 2018 से चालू होगी.
पाइपलाइन के माध्यम से जाने वाली गैस से भारत और पाकिस्तान को अलग-अलग 38 मिलियन क्यूबिक मीटर गैस दी जाएगी जबकि बकिया अफगानिस्तान के हिस्से आएगा.
एक सरकारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि भारतीय तेल मंत्री जयपाल रेड्डी ने समझौते को ऐतिहासिक बताते हुए कहा, "दशकों बाद जब इस करार का इतिहास लिखा जाएगा तो तापी परियोजना इस क्षेत्र में शांति, विकास और स्थायित्व के लिए ऐतिहासिक घटना के रूप में उभरेगा."












