डीज़ल के दामों से हटेगा सरकारी नियंत्रण

पेट्रोल के बाद भारत सरकार अब डीज़ल की कीमत पर से भी सरकारी नियंत्रण को समाप्त करने जा रही है.
भारत के वित्त राज्य मंत्री नमो नारायण मीणा ने राज्य सभा में एक लिखित उत्तर में बताया "सरकार सैद्धांतिक रूप से डीज़ल की कीमतों पर से सरकारी नियंत्रण को समाप्त करने के लिए राज़ी है लेकिन इस तरह का कोई भी प्रस्ताव रसोई गैस के लिए विचाराधीन नहीं है."
<link type="page"><caption> सुनिए: तेल मामलों के जानकार नरेंद्र तनेजा का विश्लेषण</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2012/04/120424_diesel_analysis_tb.shtml" platform="highweb"/></link>
भारत में सरकार ने पेट्रोल की कीमतों पर से सरकारी नियंत्रण समाप्त कर दिया है लेकिन रसोई गैस, कैरोसीन और डीज़ल की कीमतें सरकार ही तय करती है.
भारत पेट्रोलियम पदार्थों की अपनी ज़रुरत का 80 फ़ीसदी हिस्सा हिस्सा आयात करता है और भारत सरकार के सब्सिडी के खर्चे में सबसे बड़ी राशि इन्ही पर खर्च होती है.
मीणा ने कहा की सरकार ने अब तक डीज़ल की कीमतों का निर्धारण अपने हाथ में रखा था क्योंकि सरकार यह चाहती थी कि आम आदमी पर इसकी कीमतों का असर ना पड़े.
साल 2012 की शरुआत से ही अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में भिन्न भिन्न कारणों से पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतें ऊँचीं बनी हुई हैं.
चालू वित्तीय वर्ष के लिए भारत सरकार ने पेट्रोलियम पदार्थों पर सब्सिडी के लिए 43580 करोड़ रुपयों का प्रवधान किया है जिसमे से करीब 40000 करोड़ रूपये तेल कंपनियों को अपने सस्ते दामों पर इंधन बेचने के लिए हर्ज़ाने के तौर देना तय किया है.
पिछले वित्तीय वर्ष में सरकार ने तेल कंपनियों को 65000 करोड़ रूपये दीए थे.
सरकार का कहना है की तेल पर दीए जाने वाली सब्सिडी के कारण उसका वित्तीय घाटा बढ़ता ही जा रहा है . पिछले वित्तीय वर्ष में भारत का वित्तीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद का कुल 5.9 फ़ीसदी था. इस वित्तीय वर्ष में सरकार ने इस कम कर के 5.1 करने का लक्ष्य रखा है.












