हिंदुजा: सिंध से निकला ब्रिटेन का सबसे अमीर परिवार, किस विवाद में फंसा?

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ब्रिटेन के सबसे अमीर परिवार के चार सदस्यों के ख़िलाफ़ स्विट्ज़रलैंड में मानव तस्करी और उत्पीड़न का मामला चल रहा है.
हिंदुजा परिवार के सदस्य प्रकाश और कमल हिंदुजा सहित उनके बेटे अजय और बहू नम्रता पर आरोप लगे हैं कि वो भारत से कुछ लोगों को जेनेवा के अपने एक मैंशन में काम करने के लिए लाए थे.
लेकिन उनसे ज़्यादा देर काम करवाकर केवल 8 डॉलर प्रति दिन के हिसाब से पैसे दिए.
प्रशासन का ये भी आरोप है कि हिंदुजा परिवार ने इन लोगों के पासपोर्ट रख लिए थे और इनके कहीं आने-जाने पर पाबंदियां लगा दी थीं.
47 बिलियन डॉलर के कारोबारी साम्राज्य वाले परिवार के वकील ने विवादास्पद दलील पेश की है, जैसे कि कम तनख़्वाह उनके मानदेय का हिस्सा था इसमें रहना और खाना भी मौजूद था.
भारत ने निकला दुनिया भर में छाया हिंदुजा परिवार

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हिंदुजा परिवार की जड़ें भारत में हैं और इसी नाम से एक कारोबारी घराना भी चलाता है, जो कई सारी कंपनियों का एक समूह है.
इसमें कंस्ट्रक्शन, कपड़े, ऑटोमोबाइल, ऑयल, बैंकिंग और फ़ाइनेंस जैसे सेक्टर भी शामिल हैं.
हिंदुजा ग्रुप को संस्थापक परमानंद दीपचंद हिंदुजा अविभाजित भारत में सिंध के प्रसिद्ध शहर शिकारपुर में पैदा हुए थे.
1914 में, उन्होंने भारत की व्यापार और वित्तीय राजधानी, बॉम्बे (अब मुंबई) की यात्रा की.
हिंदुजा ग्रुप को वेबसाइट के अनुसार वहां उन्होंने जल्दी ही व्यापार की बारीकियां सीख लीं.
सिंध में शुरू हुई व्यापारिक यात्रा 1919 में ईरान में एक दफ़्तर के साथ अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में प्रवेश कर गई.
समूह का मुख्यालय 1979 तक ईरान में रहा. इसके बाद यह यूरोप चला गया.
शुरू को वर्षों में मर्चेंट बैंकिंग और ट्रेडिंग हिंदुजा ग्रुप के व्यवसाय के दो स्तंभ थे.
ग्रुप के संस्थापक परमानंद दीपचंद हिंदुजा के तीन बेटों - श्रीचंद, गोपीचंद और प्रकाश ने बाद में कामकाज संभाला और कंपनी का देश-विदेश में प्रसार किया.
साल 2023 में श्रीचंद हिंदुजा के निधन के बाद उनके छोटे भाई गोपीचंद ने उनकी जगह ली और ग्रुप के प्रमुख के तौर पर कामकाज संभाला. स्विटज़रलैंड में मानव तस्करी के केसा का सामना कर रहे प्रकाश को मोनैको में जमा हुआ कारोबार मिला.
युनाइटेड किंगडम में हिंदुजा परिवार ने कई सारी कीमती प्रॉपर्टीज़ खरीदी है.
सितंबर 2023 में हिंदुजा ग्रुप ने लंदन के व्हाइटहॉल में स्थित ओल्ड वॉर ऑफिस जो पहले ब्रिटेन का रक्षा मंत्रालय भी था, इसी में रैफ़्फ़ल्स नाम का होटल बनाया था. इस होटल की ख़ासियत ये है कि ये ब्रिटेन के प्रधानमंत्री के सरकारी आवास 10 डाउनिंग स्ट्रीट से कुछ ही मीटर दूर है.
यही ग्रुप कार्लटन हाउस की छत का भी एक हिस्सा के मालिकाना हक रखता है, इस बिल्डिंग में कई दफ़्तर, घर और ईवेंट रूम हैं. साथ ही ये बकिंघम पैलेस से भी काफ़ी नज़दीक है.
हिंदुजा ग्रुप का दावा है कि दुनियाभर में 2 लाख लोग उनकी कंपनियों में काम कर रहे हैं.
जून 2020 में यूके की एक अदालत में हलफ़नामा दायर हुआ था. इस हलफ़नामें के मुताबिक हिंदुजा भाइयों के रिश्ते अच्छे नहीं थे.
दस्तावेज़ बताते हैं कि भाइयों में सबसे बड़े श्रीचंद ने अपने छोटे भाई के खिलाफ़ स्विटज़रलैंड के जिनेवा में स्थित एक बैंक के मालिकाना हक पाने के लिए केस किया था.
कर्मचारियों से ज़्यादा कुत्तों पर खर्च

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स्विस प्रशासन की नज़र इस परिवार पर करीब 6 सालों से है, जबसे प्रशासन ने जिनेवा स्थित एक घर में अपने कर्मचारियों के रखरखाव को लेकर हिंदुजा परिवार के खिलाफ़ जांच शुरू की थी.
पिछले हफ़्ते ही इस परिवार को पीड़ित के साथ आर्थिक समझौता करने के बाद, उत्पीड़न से जुड़े एक मामले में कोर्ट से राहत मिली है.
हालांकि, अभी भी इस परिवार पर मानव तस्करी के आरोप हैं, इसके लिए स्विस वकील की मांग है कि आरोपी प्रकाश और कमल हिंदुजा को साढ़े पांच साल की सज़ा होनी चाहिए. वहीं उनके बेटे अजय और बहू नम्रता को चार-चार साल की कैद होनी चाहिए.
सोमवार को इन मामलों की सुनवाई शुरू होने और जांच करने वालों की तरफ़ से लगाए गए आरोपों के बाद से ब्रिटेन और भारत की मीडिया का ध्यान इस मामले की तरफ़ गया है.
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी वकील य्वेस बेरतोसा ने कोर्ट में कहा, ''उन्होंने (हिंदुजा परिवार ने) अपने एक कुत्ते पर एक नौकर से ज्यादा खर्च किया.''
अधिकारी ने बताया कि एक आया ने एक दिन में 18 घंटे काम किया था और उन्हें सिर्फ़ $7.84 मिले थे, जबकि दस्तावेज़ बताते हैं कि इस परिवार ने अपने एक कुत्ते के रखरखाव और खाने पर सालाना 10 हज़ार अमेरिकी डॉलर खर्च किए.
अधिकारी ने बताया कि कई नौकरों को हफ़्ते के सातों दिन काम करना होता था और तनख्वाह भी भारतीय रुपये में मिलती थी न की फ्रैंक्स में.
एक विवादास्पद बयान

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बीबीसी जिनेवा के इमोजेन फोक्स की रिपोर्ट के मुताबिक, हिंदुजा परिवार के वकीलों ने कम सैलरी होने के आरोपों को नकारा नहीं है, लेकिन ये कहा है जो मानदेय तय था उसमें रहना और खाना भी शामिल था.
वकील याएल हयात ने कहा, '' आप तनख़्वाह कम नहीं कर सकते हैं.''
ज़्यादा देर तक काम करवाने के आरोपों को भी गलत बताया गया, इस पर एक वकील ने कहा कि बच्चों के साथ फ़िल्म देखने को काम नहीं माना जा सकता है.
हिंदुजा के वकीलों ने कहा कि कई कथित पीड़ित लगातार कई मौकों पर हिंदुजा परिवार के लिए काम कर चुके हैं. ये इस बात को दर्शाता है कि सभी काम के माहौल से संतुष्ट थे.
परिवार का बचाव करने वाले वकीलों ने कई ऐसे लोगों को भी गवाही के लिए बुलाया जो पहले इस परिवार के लिए काम कर चुके थे.
इन लोगों ने अदालत में हिंदुजा परिवार को अच्छे व्यवहार वाला बताया और ये भी कहा कि वो अपने नौकरों को सम्मान के साथ रखते थे.
हिंदुजा परिवार के वकील ने सरकारी वकील पर क्रूरता और बदनाम करने के आरोप लगाए.
डिफ़ेंस के वकीलों में से एक ने कहा, ''दूसरे किसी और परिवार के साथ ऐसा नहीं हुआ.''
हालांकि, हिंदुजा परिवार में काम करने वाले नौकरों के पासपोर्ट रखे जाने और उनके कहीं आने-जाने पर पाबंदी आरोपी (हिंदुजा परिवार) के लिए एक मुख्य चिंता का विषय है.
इसकी वजह है कि इसे स्विस कानूनों के तहत मानव तस्करी माना जाता है.
और इसी कारण, कारावास की सज़ा के साथ, सरकारी वकील बेरतोसा 1 मिलियन डॉलर पेनल्टी और स्टाफ़ को 4 मिलियन डॉलर के मुआवज़े की मांग कर रहे हैं.

जिनेवा का सियाह पक्ष
दुनिया के सबसे अमीर लोगों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के सेंटर, जेनेवा में दर्ज़ होने वाला ये पहला मामला नहीं है.
साल 2008 में लीबिया के पूर्व तानाशाह मुअम्मर गद्दाफ़ी के बेटे हानिबल गद्दाफ़ी के बेटे को भी अल्पाइन सिटी पुलिस ने एक पांच सितारा होटल से गिरफ़्तार किया था. हानिबल गद्दाफ़ी और उनकी पत्नी पर अपने नौकर को पीटने आरोप लगे थे.
ये केस बंद हो गया था, लेकिन इसकी वजह से लीबिया और स्विट्ज़रलैंड के कूटनीतिक रिश्तों में तब दरार आ गई थी जब इसके बदले में त्रिपोली में 2 स्विस नागरिकों को गिरफ़्तार कर लिया गया था.
पिछले साल 4 फिलिपीनी डॉमेस्टिक वर्कर्स ने संयुक्त राष्ट्र में एक राजदूत के खिलाफ़ ये आरोप लगाते हुए केस दर्ज करवाया था कि उनकों सालों से पैसे नहीं चुकाए गए.
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