अमित शाह ने मणिपुर में हिंसा फैलने के बारे में संसद को क्या बताया

लोकसभा में बुधवार को अविश्वास प्रस्ताव पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपनी बात सदन के सामने रखी और बताया कि कैसे मणिपुर में हिंसा भड़की.

विपक्ष का कहना है कि ये अविश्वास प्रस्ताव मणिपुर के मुद्दे पर लाया गया है और राज्य के हालात पर बयान देते हुए गृह मंत्री ने मणिपुर में हिंसा भड़कने का ज़िम्मेदार 'मणिपुर हाईकोर्ट के आदेश' को बताया.

गृह मंत्री ने राज्य के कुकी और मैतेई समुदाय से शांति बनाए रखने की अपील की है और कहा कि दोनों पक्ष हमसे बात करें.

उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह का बचाव भी किया.

सदन में जब अमित शाह बोल रहे थे तो उन्होंने मणिपुर के मौजूदा हालात की ही बात नहीं की बल्कि ये भी बयाता कि आखिर मामला इस भीषण हिंसा तक कैसे पहुंचा.

शाह ने बताया मणिपुर हिंसा की जड़ क्या है?

अपने दो घंटे लंबे भाषण में अमित शाह ने मणिपुर की हिंसा के तार साल 2021 में म्यांमार में हुए सैन्य तख़्तापलट से जोड़े.

शाह ने कहा, "कुकी डेमोक्रेटिक फ्रंट ने म्यांमार में आंदोलन शुरू किया तो सैन्य शासकों ने उन पर कार्रवाई शुरू कर दी. चूंकि भारत के साथ उनकी सीमा पर कोई बाड़ नहीं लगा है, इसलिए बड़ी संख्या में कुकी शरणार्थी के रूप में मणिपुर और मिज़ोरम में आए."

अमित शाह ने बताया कि ये कुकी शरणार्थी मणिपुर की घाटियों के जंगल में बस गए और इससे लोगों में डेमोग्राफ़ी बदलने का डर पैदा हो गया.

शाह ने सदन में हाई कोर्ट के 27 मार्च के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि इसने "आग में घी डालने" का काम किया.

हाई कोर्ट ने मणिपुर की सरकार को केंद्र सरकार के आदिवासी कल्याण मंत्रालय को मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने की मांग से संबंधित फ़ाइल पर जवाब देने के लिए कहा था.

बीरेन सिंह पर क्या बोले अमित शाह

अमित शाह ने कहा, "सालों से लंबित पड़ी याचिका पर अचानक हाई कोर्ट ने सुनवाई कर ली. कोर्ट ने राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग, या केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्रालय, या मणिपुर सरकार से हलफनामा नहीं लिया. इससे पहाड़ी इलाकों में अशांति फैल गई. यह आदेश बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के पारित किया गया."

उन्होंने कहा कि तीन मई को हिंसा भड़कने के बाद से 152 लोग मारे गए, 14,898 लोग गिरफ़्तार किए गए और राज्य में 1,106 एफ़आईआर दर्ज की गईं हैं.

शाह ने कहा, "मैं मणिपुर के दोनों समुदायों से हाथ जोड़कर अपील करता हूं कि वे हिंसा रोक दें. कृपया भारत सरकार के साथ बात करें और हमारे साथ मिल कर मणिपुर को प्रगति और समृद्धि के पथ पर बहाल करने का रास्ता खोजना है. बातचीत से ही शांति आ सकेगी."

विपक्ष ने सरकार से सवाल किया कि सीएम को क्यों नहीं बदला गया, शाह ने जवाब में कहा, "हमने 4 मई को मुख्य सचिव और डीजीपी को बदल दिया. जब सीएम सहयोग नहीं करते हैं तो उन्हें बदल दिया जाता है. बीरेन सिंह सहयोग कर रहे हैं."

शाह ने कहा, "मैं विपक्ष से सहमत हूं कि वहां हिंसा हो रही है और कोई भी इसका समर्थन नहीं कर सकता, लेकिन इस मुद्दे का राजनीतिकरण करना शर्मनाक है."

भारत-म्यांमार बॉर्डर

अपनी सरकार का बचाव करते हुए शाह ने कहा, "कांग्रेस शासन के दौरान मणिपुर में हिंसा की कई घटनाएं हुईं, फिर भी कोई गृह मंत्री वहां नहीं गया. मैं वहां तीन दिनों तक रहा और हमारे राज्य मंत्री नित्यानंद राय लगातार 23 दिनों तक वहां रहे."

"मणिपुर में छह साल से बीजेपी की सरकार है लेकिन वहां कभी कर्फ़्यू नहीं लगा. 2021 में म्यांमार में सत्ता परिवर्तन हुआ और मिलिट्री शासन आया है. कुकी डेमोक्रेटिक फ़्रंट ने लोकतांत्रिक शासन का आंदोलन शुरू किया तो मिज़ोरम और मणिपुर में कुकी भाई शरणार्थी के तौर पर आए."

"2022 में हमने भारत-म्यांमार बॉर्डर पर फेंसिंग शुरू की, हमने 10 किलोमीटर ट्रायल फेंसिंग हो चुकी है 60 किलोमीटर की फ़ेंसिंग चालू है ताकि काम पूरा हो."

अमित शाह ने ये भी कहा कि "राहुल गांधी सहित विपक्ष के तमाम नेताओं ने ये धारणा फैलाई कि सरकार मणिपुर पर चर्चा नहीं करना चाहती, जबकि मैंने खुद सदन को पत्र लिख कर सूचित किया था कि हम मणिपुर पर चर्चा के लिए तैयार हैं. लेकिन उन्हें बस शोर मचाना था."

वीडियो के वायरल होने के समय पर सवाल

केंद्र सरकार मणिपुर में फेल हो रही है और पीएम कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे, विपक्ष के इस आरोप पर पलटवार करते हुए अमित शाह ने बताया कि हिंसा भड़कने के बाद प्रधानमंत्री ने उन्हें सुबह 4 बजे और 6.30 बजे फोन किया था.

उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री के साथ हमारी 16 वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग हुई, 36,000 सीएपीएफ सैनिकों को तैनात किया गया, वायु सेना के विमानों का इस्तेमाल किया, मुख्य सचिव और डीजीपी को बदला, सुरक्षा सलाहकार को भेजा गया. हम ने ये सब कुछ चार मई की शाम तक (तीन मई को राज्य में हिंसा भड़की थी ) किया."

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को मणिपुर के वायरल वीडियो पर भी बात की.

अमित शाह ने कहा, "चार मई के दुर्भाग्य दिन की ये घटना थी. दुनिया में किसी भी महिला के साथ ऐसी घटना होना बहुत दुखद है."

पैरा मिलिट्री सुरक्षा बल

उन्होंने कहा, "चार मई का वीडियो संसद सत्र के एक दिन पहले ही क्यों आया, ये भी सवाल उठा. अगर किसी के पास वीडियो था तो उसे पुलिस को देना चाहिए था. सार्वजनिक करना चाहिए था. कम से कम उस महिला के सम्मान की तो सोचना चाहिए."

"अगर ये वीडियो चार को ही मिलता तो पांच मई तक उस मामले में कार्रवाई हो जाती."

शांति के लिए किये गए प्रयासों के बारे में उन्होंने कहा, "मैं मणिपुर में तीन दिन और तीन रात रहा. गृह राज्यमंत्री नित्यानंद 23 दिन तक वहां रहे. इस मामले की जांच के लिए आयोग बनाया गया."

उन्होंने कहा कि 36,000 पैरा मिलिट्री सुरक्षा बल मैतेई और कुकी इलाकों के बीच बफर ज़ोन में है. राज्य में यूनीफ़ाइड सुरक्षा कमांड बनाई गई है.

उन्होंने कहा, "हम घुसपैठ को रोकेंगे और म्यांमार से भी बात की है और इस ओर हर संभव कोशिश की जाएगी."

अमित शाह ने कहा, "मैं विपक्ष की इस बात से सहमत हूं कि वहां हिंसा का तांडव हुआ है लेकिन हम मानते हैं कि जो हुआ है वो शर्मनाक है लेकिन उस पर राजनीति करना उससे भी शर्मनाक है."

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