You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
इसराइल पर हमास के हमले को लेकर ईरान का मीडिया क्या लिख रहा है?
शनिवार को इसराइल पर फ़लस्तीनी चरमपंथी गुट हमास के हमले के बाद हमास के प्रवक्ता ग़ाज़ी हमद ने कहा कि इस अभियान को ईरान का समर्थन हासिल है.
दूसरी तरफ ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के बयान और सोशल मीडिया पर तेहरान से आ रही जश्न की तस्वीरें भी इस बात की तस्दीक करती दिखीं. इसराइल के फ़लस्तीन पर हमले के बाद ईरान खुलकर हमास और फ़लस्तीन के समर्थन में आ गया है.
इसकी झलक रविवार को ईरान की मीडिया में भी देखने को मिल रही है, जहां हमास के 'अल-अक़्सा स्टॉर्म' नाम के इस अभियान को ज़ायनिस्ट शासन के लिए बड़ा धक्का बताया जा रहा है. (यहूदियों की अपने लिए एक अलग राष्ट्र बनाने की कोशिश जिसमें यहूदी फ़लस्तीन के इलाक़ों पर अपना कब्ज़ा चाहते हैं क्योंकि वो इसे 'यहूदियों की पवित्र जगह' मानते हैं.)
इसराइल के कई हिस्सों पर हमले के बाद फ़लस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास (जो हमास के राजनीतिक प्रतिद्वंदी हैं) ने कहा कि फ़लस्तीन के लोगों को हक़ है कि वो "कब्ज़ा करने वालों के ख़िलाफ़ अपना बचाव करें."
हमास ने क्या कहा?
शनिवार को बीबीसी के न्यूज़आवर कार्यक्रम में हमास के प्रवक्ता ग़ाज़ी हमद ने कहा कि इसराइल पर फलस्तीनी लड़ाकों के सरप्राइज़ हमले का उद्देश्य इसराइली कब्ज़े को रोकना था. उन्होंने इस दौरान इस बात की भी पुष्टि की कि उन्हें इस अभियान के लिए ईरान का समर्थन हासिल है.
उन्होंने न्यूज़आवर की प्रेज़ेन्टर और बीबीसी संवाददाता जुलियन मार्शल से कहा कि उन्हें दूसरे मुल्कों से मदद मिलती है और इन देशों में सीधे तौर पर ईरान शामिल है.
उन्होंने कहा ईरान "फ़लस्तीन और येरुशलम की आज़ादी तक फ़लस्तीनी लड़ाकों का साथ देने के लिए प्रतिबद्ध है."
उन्होंने कहा, "ग़ज़ा हो, वेस्ट बैंक या फिर येरुशलम- हम दूसरों के कब्ज़े वाले इलाक़ों में रह रहे हैं. यहां रोज़ अपराध हो रहे हैं, ख़ासकर अल-अक़्सा मस्जिद में. वो लोग कट्टर और अतिवादी यहूदियों को हमारे पूजा के स्थल पर भेजते हैं, हमारे लोगों के ख़िलाफ़ वो प्रार्थनाएं करते हैं, हमें उकसाते हैं."
"वो रोज़ हमारे इलाक़ों पर अपनी बस्तियां बना रहे है, हमारी ज़मीनें ले रहे हैं, हमारे लोगों को मार रहे हैं, वो हमारे शहरों में घुस रहे हैं. हमने मध्यस्थों (मिस्र, क़तर या संयुक्त राष्ट्र) के ज़रिए उनसे कहा कि वो ये सब करना बंद करें लेकिन वो किसी की नहीं सुनते."
"इसलिए इसराइल को निशाना बनाते हुए हमने ये किया. हम उन्हें बताना चाहते हैं कि हम इस तरह के अपराधों के ख़िलाफ़ चुप नहीं बैठेंगे और उन्हें अपने कदम रोकने होंगे."
ग़ाज़ी हमद ने ये तो नहीं कहा कि अब तक उसके लड़ाकों ने कितने इसराइली सैनिकों या सुरक्षाकर्मियों को बंधक बनाया है. हालांकि उन्होंने कहा, "हम सैनिकों और बस्तियों पर हमले करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं. आम नागरिकों का हम सम्मान करते हैं."
ईरान ने क्या कहा?
शनिवार को ईरान के विदेश मंत्रालय ने हमास के हमले का समर्थन करते हुए इसे फ़लस्तीनी लोगों की सेल्फ़-डिफेन्स की कोशिश बताया और मुस्लिम देशों से अपील की कि वो फ़लस्तीनी लोगों के हकों का समर्थन करें.
ईरान के विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया एक्स पर एक लंबे पोस्ट में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नसीर केनानी का बयान छापा है जिसमें उन्होंने कहा है, "अल-अक़्सा स्टॉर्म अभियान... विद्रोही गुटों और उत्पीड़न झेल रहे फ़लस्तीन के लोगों की मुहिम है जो उन्होंने अपने हक़ों के लिए ज़ायनिस्ट शासन की ग़लत और उकसावे वाली नीतियों के ख़िलाफ़ छेड़ी है."
नसीर केनानी ने कहा, "ईरान मानता है कि हिंसा और फ़लस्तीनियों की मौतों के लिए कब्ज़ा करने वाले लोग और उसके समर्थन करने वाले ज़िम्मेदार हैं. हम इस्लामिक राष्ट्रों से अपील करते हैं कि फ़लस्तीनी लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए उनका समर्थन करें."
"फ़लस्तीनी लोगों का अधिकार है कि वो अपने हक़ों की रक्षा करें, अपनी ज़मीनों को बचाएं और अपने पूजा स्थलों पर कब्ज़े का विरोध करें.
ईरानप्रेस ने लिखा है कि नसीर केनानी ने अल-अक़्सा स्टॉर्म अभियान में शामिल फ़लस्तीनियों और दूसरे विद्रोही गुटों को मुबारकबाद दी और कहा, "शनिवार को जो हुआ वो सीरिया, लेबनान और कब्ज़े वाले इलाक़ों समेत दूसरे इलाक़ों में ज़ायनिस्ट शासन विरोधी आंदोलन की जीत है."
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार ईरान सरकार के प्रवक्ता अली बहादुरी जहरोमी ने सरकारी मीडिया से कहा कि शनिवार को हुए हमले "ये साबित करते हैं कि ज़ायनिस्ट शासन कमज़ोर है और ये पूरी मुहिम अब फ़लस्तीनी युवाओं के हाथों में है."
ईरान के सर्वोच्च नेता सैय्यद अली ख़ामेनेई ने भी शनिवार और रविवार को तीन ट्वीट कर फलस्तीनी अभियान का समर्थन किया.
एक ट्वीट में उन्होंने एक तस्वीर पोस्ट की और लिखा, "बीते 80 सालों के मुक़ाबले, फ़लस्तीनी युवा और विरोध का फ़लस्तीन का अभियान आज अधिक सक्रिय, ताकतवर और तैयार है."
दूसरे ट्वीट में उन्होंने एक वीडियो पोस्ट किया जिसमें सैकड़ों लोग भागते दिख रहे हैं. उन्होंने लिखा, "ज़ायनिस्ट शासकों के कैंसर को फ़लस्तीन के लोग और इलाक़े की दूसरी ताकतें जड़ से उखाड़ फेंकेंगी."
तीसरे ट्वीट में उन्होंने तीन अक्तूबर का एक ट्वीट फॉर्वर्ड किया जिसमें लिखा है, "ज़ायनिस्ट सत्ता ख़त्म हो रही है"
क्या कह रहा है ईरानी मीडिया?
फार्स न्यूज़ एजेंसी ने इसराइल और फ़लस्तीन के बीच शुरू हुए तनाव को लेकर कई रिपोर्ट की हैं. एक रिपोर्ट में एजेंसी ने अल-अक़्सा स्टॉर्म को इसराइल के ख़िलाफ़ हमास की सैन्य मुहिम क़रार दिया है और कहा है कि ये एक सरप्राइज़ हमला फ़लस्तीनियों का अब तक का सबसे बड़ा हमला था.
एक अन्य ख़बर में एजेंसी ने इस हमले के बाद हुई जवाबी कार्रवाई में मारे गए 198 फ़लस्तीनियों को शहीद कहा है और लिखा है कि अब तक 1600 से अधिक लोग घायल हुए हैं.
एजेंसी ने ईरान के वरिष्ठ सैन्य कमांडर रहे रहीम सफ़ावी का एक बयान छापा है जिसमें उन्होंने कहा है, "फ़लस्तीन और अल-कुद्स की आज़ादी तक हम फ़लस्तीनी लड़ाकों के साथ हैं." रहीम सफ़ावी सर्वोच्च नेता के सलाहकार हैं.
प्रेस टीवी ने जश्न मनाने की एक तस्वीर पोस्ट की है और लिखा है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में ईरानी लोगों ने जश्न मनाया और इसराइली सरकार के ख़िलाफ फ़लस्तीनी समूहों के अभियान की जीत का जश्न मनाया.
ईरान प्रेस ने तेहरान के फ़लस्तीन स्क्वायर में ग़ज़ा के प्रति सहानुभूति दिखाने के लिए लोगों के इकट्ठा होने की तस्वीरें साझा की हैं और लिखा है कि देश के और शहरों में भी लोग फ़लस्तीन के समर्थन में आए. इस दौरान लोगों ने इसराइल और अमेरिकी विरोधी और फ़लस्तीन के समर्थन में नारेबाज़ी की.
'हमास के रॉकेटों से तेल अवीव थर्राया' शीर्षक से एक अन्य ख़बर में ईरान प्रेस ने लिखा कि ग़ज़ा के रिहाइशी इलाक़ों में इसराइल के हवाई हमलों में 200 लोगों की जान जाने के बाद हमास ने तेल अवीव को निशाना बनाया.
ईरान के मेहर न्यूज़ एजेंसी ने भी शनिवार को इस हमले को लेकर एक से अधिक रिपोर्ट छापी हैं. एक रिपोर्ट में एजेंसी ने हमास के राजनीतिक मामलों के प्रमुख इस्माइल हनीया का बयान छापा है जिसमें उन्होंने दावा किया है कि फ़लस्तीनी विरोध एक "बड़ी जीत" की कगार पर है.
एक ख़बर का शीर्षक है "अल-अक़्सा स्टॉर्म अभियान में कम से कम 100 ज़ायनिस्टों की मौत" जबकि एक अन्य ख़बर में एजेंसी ने रहीम सफ़ावी के बयान "फ़लस्तीनी हमास के अभियान का ईरान समर्थन करता है" को बतौर शीर्षक छापा है.
अख़बार में ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नसीर केनानी के बयान को भी पन्ने पर जगह दी. ख़बर का शीर्षक है, ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा- फ़लस्तीन का अभियान ज़ायनिस्ट विरोधी अभियान में 'महत्वपूर्ण मोड़' है.
ख़बर ऑनलाइन ने भी नसीर केनानी के बयान को छापा है और लिखा है कि 'फ़लस्तीन को सेल्फ़-डिफेंस का हक़ है.'
तेहरान टाइम्स ने फ़लस्तीन के अभियान को अभूतपूर्व बताया है और लिखा कि बीते पांच दशकों में ये ज़ायनिस्ट सत्ता पर सबसे बड़ा हमला है.
अख़बार काह्यान इंटरनेशनल ने भी अपने पहले पन्ने पर इससे जुड़ी तीन ख़बरों को जगह दी है. अख़बार ने हमास के अभियान को ज़ायनिस्टों के ख़िलाफ़ बड़ा हमला कहा है.
वहीं ईरान डेली ने अपने पहले पन्ने पर इसराइल-फ़लस्तीन सीमा के पास इसराइली टैंक पर फ़लस्तीनियों के कब्ज़े की एक तस्वीर को पूरे पन्ने पर छापा है. साथ ही लिखा है, 'स्टॉर्म का इसराइल पर हमला'. अख़बार ने हमास के हमले को 'धरती पर आख़िरी कब्ज़े को ख़त्म करने का महान संघर्ष' बताया है.
मध्य-पूर्व मामलों के जानकार मेहदी शाकिबई ने अख़बार में एक लेख लिखा है जिसमें वो कहते हैं, "मैं मानता हूं कि अल-अक़्सा स्टॉर्म अभियान किसी बड़ी घटना से पहले होने वाली शुरुआत थी. आगे जब भी फलस्तीनियों और इसराइलियों के संघर्ष का ज़िक्र होगा, वो दो हिस्सों में होगा, अल-अक़्सा स्टॉर्म अभियान के पहले का संघर्ष और अल-अक़्सा स्टॉर्म अभियान के बाद का संघर्ष."
वो लिखते हैं, "एक ऐसी सत्ता का ख़ुफ़िया तंत्र, कथित तौर पर जिसका प्रभाव दुनिया के एक बड़े हिस्से - अज़रबैजान से जॉर्जिया से लेकर फ़ारस की खाड़ी और ओमान सागर से लेकर यूरोप तक - है, उसे पता नहीं चल पाया कि फ़लस्तीनी लड़ाकों ने इतने बड़े पैमाने पर अभियान की योजना बनाई थी."
नोरन्यूज़ ने ईरान के आयरन डोम मिसाइल प्रतिरक्षा सिस्टम पर तंज कसते हुए लिखा, "रेत के किलों पर बनाया गया कमज़ोर डोम".
न्यूज़ वेबसाइट ने लिखा, "ये हमला इतने बड़े पैमाने पर था और इस तरह किया गया कि ज़ायनिस्टों के सभी मीडिया चैनलों को इस बात को मानना पड़ा. इसमें ज़ायनिस्टों की सेना के रक्षात्मक और हमला करने के उपकरणों की नाकामी साबित की है."
"उन्हें मानना पड़ा कि ज़ायनिस्टों का तथाकथित किला जिसके बारे में दावा है कि उसे आयरन डोम से सुरक्षित किया गया है असल में एक 'कमज़ोर डोम है जो रेत के किलों पर बनाया गया है."
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)