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इसराइल की इंटेलिजेंस कैसे फ़ेल हुई, हमास के हमले के बाद सवालों में मोसाद
- Author, फ्रैंक गार्डनर
- पदनाम, बीबीसी रक्षा संवाददाता
"हमें नहीं पता कि ये कैसे हो गया."
ये इसराइली अधिकारियों की प्रतिक्रिया है जब मैंने आज पूछा कि इतने व्यापक संसाधन वाली इसराइली इंटेलिजेंस इस हमले को देख कैसे नहीं पाई?
शनिवार तड़के जब ग़ज़ा पट्टी से इसराइल पर हज़ारों रॉकेट दागे जा रहे थे उसी दौरान दर्जनों हथियारबंद फ़लस्तीनी लड़ाके गज़ा पट्टी और इसराइल के बीच भारी सुरक्षा वाली सीमा को पार करने में सफल रहे.
इसराइल की घरेलू जांच एजेंसी शिन बेत, विदेशों में जासूसी करने वाली ख़ुफ़िया एजेंसी मोसाद और ताक़तवर इसराइली सेना के बावजूद किसी को इस हमले की भनक तक नहीं लगी.
या उन्हें पता लग गया लेकिन उसे रोकने के लिए कुछ कर नहीं सके!
इस हमले में 100 इसराइली नागरिक मारे गए हैं और 985 से अधिक घायल हुए हैं. जबकि इसराइल के जवाबी हमले में 198 फ़लस्तीनी मारे गए हैं और 1000 से अधिक लोग घायल हुए हैं.
ताज़ा संघर्ष पर एक नज़र
- ग़ज़ा पट्टी से हुए औचक हमले के बाद फ़लस्तीनी इस्लामी चरमपंथी ग्रुप हमास के दर्जनों हथियारबंद लड़ाके दक्षिणी इसराइल में घुस गए.
- ग़ज़ा पट्टी से इसराइल में हज़ारों रॉकेट दागे गए. इस हमले में कम से कम 100 इसराइली नागरिक मारे गए हैं जबकि 985 से अधिक घायल हुए हैं.
- हमास के लीडर मोहम्मद जाइफ़ ने कहा है, "हमने ये ऐलान करना तय किया है कि अब बहुत हो चुका."
- पीएम बिन्यामिन नेतन्याहू कहा, "ये महज उकसावा नहीं बल्कि जंग है और दुश्मन को इसकी भारी क़ीमत चुकानी पड़ेगी."
- कई इसराइलियों को बंधक के तौर पर ग़ज़ा पट्टी में ले जाया गया है.
- इसराइल के सुरक्षा प्रमुखों की बैठक में पीएम नेतन्याहू ने घुसपैठियों के सफ़ाए के निर्देश दिए हैं. उन्होंने कहा है कि "यह एक जंग है और हम ये जंग जीतेंगे."
- आईडीएफ़ ने हमास के ठिकानों पर जवाबी हमले शुरू कर दिए हैं. ग़ज़ा पट्टी में हमास के 17 ठिकानों और 4 हेडक्वार्टर पर इसराइल ने हवाई हमले किए हैं.
- इसराइली रक्षा मंत्री योआव गैलेंट ने कहा कि हमास ने "बड़ी ग़लती" कर दी है.
- इसराइली मीडिया के अनुसार, दक्षिणी इसराइल के कई जगहों पर इसराइली सुरक्षा बलों और फ़लस्तीनी लड़ाकों के बीच गोलीबारी हो रही है.
- इसराइल के अस्पतालों ने कहा है कि दर्जनों घायलों का इलाज किया जा रहा है, जिनमें कई की हालत गंभीर है.
- भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसराइल में हुए "आतंकवादी हमलों" पर दुख जताया है और कहा है, "हम इस मुश्किल घड़ी में इसराइल के साथ खड़े हैं.''
- सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा है कि वह फलस्तीनी गुटों और क़ब्ज़े वाली इसराइली ताकतों के बीच पैदा हुई स्थिति के कारण अलग-अलग मोर्चों पर जारी हिंसा पर नज़र बनाए हुए हैं.
- फ़ांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों, जर्मनी के विदेश मंत्री और यूरोपीय कमीशन की प्रेसीडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन हमास के हमलों की निंदा की है.
- अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने नेतन्याहू से फ़ोन पर बात करके इसराइल के साथ खड़े होने और उसे पूरा समर्थन देने की बात कही है.
- ईरान के सुप्रीम लीडर आयातुल्लाह अली ख़ामेनेई के सलाहकार ने इसराइल में फ़लीस्तीनी लड़ाकों के हमले का समर्थन किया है.
इसराइल का सुरक्षा कवच कितना ताक़तवर
ये माना जाता है कि पश्चिम एशिया में इसराइल के पास सबसे व्यापक और संसाधनों से लैस इंटेलिजेंस एजेंसी है.
इसराइल की ख़ुफ़िया एजेंसी के एजेंट और सूचना देने वाले फ़लस्तीनी चरमपंथी ग्रुपों के अलावा लेबनान, सीरिया और हर कहीं मौजूद हैं.
अतीत में इसने चरमपंथी नेताओं की बहुत सटीक तरीके से हत्याएं की हैं और उन्हें हर मूवमेंट की अंदर तक की जानकारी होती है.
जब एजेंट किसी टारगेट कार पर जीपीएस ट्रैकर लगा देता है तो उसे ड्रोन से निशाना बनाया जाता है. कई बार तो विस्फ़ोटक मोबाइल फ़ोन का भी इस्तेमाल किया गया.
ज़मीनी सुरक्षा भी बहुत चाक चौबंद होती है. ग़ज़ा और इसराइल के बीच की सीमा पर मजबूत बाड़बंदी है, वहां कैमरे हैं, ग्राउंड मोशन सेंसर हैं और सेना की लगातार गश्त होती है.
दीवारों के ऊपर कंटीले तार लगे हैं जहां ऐसी घुसपैठ की संभावना न्यूनतम हो जाती है जैसी इस बार हुई है.
लेकिन हमास के लड़ाकों ने इन दीवारों को बुलडोज़र से ढहा दिया, तारों को काट दिया और समंदर के रास्ते और पैराग्लाइडर के सहारे इसराइल में घुस गए.
इसराइलियों की नाक के नीचे इतने बड़े पैमाने पर और इतने तालमेल के साथ ये जटिल हमला हुआ जिसमें हज़ारों रॉकेट दागे गए. इससे लगता है कि हमास ने सैन्य कार्रवाई का असाधारण स्तर अपनाया था.
कैसे चूक गई इसराइली इंटेलिजेंस
ताज्जुब नहीं है कि इसराइली मीडिया अपने देश की सेना और राजनीतिक नेतृत्व से सवाल कर रहा है कि अक्टूबर 1973 में योम किपुर युद्ध में इसी तरह हुए औचक हमले की 50वीं वर्षगांठ पर ये हमला कैसे हुआ.
इसराइली अधिकारियों ने मुझे बताया कि एक बड़ी जांच शुरू हो चुकी है और ‘ये सवाल कई सालों तक बना रहेगा.’
लेकिन इसराइल के सामने इस समय इससे ज़्यादा ज़रूरी काम हैं. उसे अपनी दक्षिणी सीमा से घुसे घुसपैठियों का दबाना है और सीमा पर तारबंदी के इसराइल की ओर हमास के चरमपंथियों के कब्ज़े से कई समुदायों को छुड़ाना है.
जिन नागरिकों को बंधक बनाया गया है उन्हें छुड़ाने के लिए इसराइल को उपाय तलाशने होंगे, चाहे वो सैन्य बचाव मिशन से या बातचीत से.
यह उन सभी लॉन्च साइट का सफ़ाया करने की कोशिश करेगा जहां से इसराइल में रॉकेट दागे गए. लेकिन ये बहुत मुश्किल काम है क्योंकि ये तो बहुत कम समय में ही कहीं से भी दागे जा सकते हैं.
लेकिन इसराइल की सबसे बड़ी चिंता है कि हमास के अपील पर इस संघर्ष में शामिल होने वाले अन्य लोगों को कैसे रोका जा सके और इस लड़ाई को पश्चिमी तट तक फैलने से कैसे रोका जाए.
क्योंकि लेबनान से लगी उत्तरी सीमा के पार अत्याधुनिक हथियारों से लैस हिज़्बुल्लाह के लड़ाके इस लड़ाई में शामिल हो सकते हैं.
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