राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा को लेकर बदरुद्दीन अजमल ने मुसलमानों से ये करने को कहा - प्रेस रिव्यू

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मुसलमानों से जनवरी 20 से लेकर जनवरी 25 तक घरों में ही रहने की ऑल इंडिया यूनाइडेट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ़) के प्रमुख बदरुद्दीन अजमल की कथित टिप्पणी पर केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता गिरिराज सिंह की प्रतिक्रिया आई है.
हिंदुस्तान टाइम्स ऑनलाइन ने इससे जुड़ी एक रिपोर्ट में कहा है कि शनिवार को गिरिराज सिंह ने मुसलमानों से घरों में रहने की बदरुद्दीन अजमल की कथित टिप्पणी पर कहा कि, "बीजेपी मुसलामानों से नफ़रत नहीं करती."
वेबसाइट ने समाचार एजेंसी एएनआई के हवाले से अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि गिरिराज सिंह ने कहा, "बीजेपी मुसलामानों से नफ़रत नहीं करती. हम 'सबका साथ सबका विकास' के मंत्र के साथ काम करते हैं. अयोध्या राम जन्मभूमि मामले में कोर्ट में याचिका देने वाले इक़बाल अंसारी को भी प्राण प्रतिष्ठा के कार्यक्रम में बुलाया गया है. वो इस दौरान होने वाली प्रार्थना सभा में भी शिरकत करेंगे. बदरुद्दीन अजमल और ओवैसी जैसे लोग समाज में नफ़रत फैलाते हैं. बीजेपी सभी धर्मों का सम्मान करती है."
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इससे पहले अजमल ने असम के बारपेटा में एक कार्यक्रम में कहा था, "हमें सावधान रहना होगा. मुसलमानों को 20 से 25 जनवरी के बीच ट्रेन से यात्रा नहीं करनी चाहिए. राम जन्मभूमि में बने मंदिर में राम की मूर्ति रखी जाएगी, पूरी दुनिया इसे देखेगी, लाखों लोग आएंगे. बीजेपी बड़ी योजना बना रही है."
"इस दौरान हमें ट्रेन से सफर नहीं करना चाहिए और घरों में ही रहना चाहिए. बीजेपी मुसलमानों की सबसे बड़ी दुश्मन है. बीजेपी हमारी ज़िंदगी, धर्म और अज़ान के ख़िलाफ़ है...."
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वहीं द इकोनॉमिक टाइम्स ने अपनी ऑनलाइन रिपोर्ट में लिखा है कि मीडिया से बात करते हुए लोकसभा सांसद बदरुद्दीन अजमल ने कहा, "पूरे देश में बड़ी संख्या में कारसेवकों की आवाजाही होगी. बाबरी मस्जिद को गिराए जाते वक्त जो कुछ हुआ हम वो नहीं चाहते."
"मुसलमान भाइयों के हित में और देश में शांति के लिए अगर मुसलमान इस दौरान ट्रेन में सफर न करें और घरों में ही रहें तो क्या बुरा हो जाएगा."
उन्होंने कहा, "लोग इसे सांप्रदायिक समझते हैं तो यही सही. ये लोगों को किसी तरह की झगड़े की स्थिति से बचाने के लिए है."
बीजेपी पर मंदिर कार्यक्रम का फायदा लेने का आरोप

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द हिंदू अख़बार में भी आज राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा को लेकर मुस्लिम संगठन जमात-ए-इस्लामी हिंद का बयान छापा है.
अख़बार लिखता है कि संगठन के उपाध्यक्ष सलीम इंजीनियर ने मंदिर से नाम पर किसी तरह के ध्रुवीकरण की कोशिश से बचने की सलाह दी है और कहा है कि "चुनावी फायदे के इरादे से" ये कार्यक्रम "राजनीतिक प्रोपेगैंडा का हथियार" बनता जा रहा है.
अख़बार के अनुसार उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा, "श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव ने मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा की तुलना स्वतंत्रता दिवस से की है, जो ग़लत है. ये धार्मिक आधार पर ध्रुवीकरण की कोशिश है. कार्यक्रम के इस तरह के मायने निकाले जाने की संगठन निंदा करता है."
उन्होंने कहा कि ये कार्यक्रम इस बात का उदाहरण बनता जा रहा है कि "किस तरह कुछ राजनेता धर्म का ग़लत इस्तेमाल कर सकते हैं. सत्ताधारी पार्टी इस तरह के काम की निंदा करती है लेकिन वो खुद इसमें शामिल हो रही है."
उन्होंने कहा कि, ऐसा लगता है कि राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम "बीजेपी का चुनावी कार्यक्रम" और "प्रधानमंत्री के लिए राजनीतिक रैली" बन गया है.
कार्यक्रम का होगा लाइव टेलिकास्ट
हिंदुस्तान टाइम्स में छपी ख़बर के अनुसार अयोध्या राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम 22 जनवरी को होना है. इस दौरान प्रधानमंत्री, कई राज्यों के मुख्यमंत्री, वरिष्ठ राजनेता और जाने-माने लोगों के साथ-साथ लाखों की भीड़ अयोध्या में होगी.
कार्यक्रम से पहले प्रधानमंत्री ने अयोध्या का दौरा कर वहां महर्षि वाल्मिकी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और रेलवे स्टेशन का उद्घाटन किया.
प्रधानमंत्री का कहना है कि वो राम के पवित्र अयोध्या शहर को पूरी दुनिया के साथ जोड़ना चाहते हैं, इस दिशा में हवाई अड्डे का नाम 'महर्षि वाल्मिकी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, अयोध्या धाम' रखने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दी गई है.
अख़बार लिखता है कि एएनआई के अनुसार बीजेपी ने कहा है कि मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा के कार्यक्रम का सीधा प्रसारण किया जाएगा, जिसे देशभर में लोग देख सकेंगे. बीजेपी कार्यकर्ताओं से कहा गया है कि लोग इस कार्यक्रम को लाइव देख सकें इसके लिए वो बूथ पर बड़े-बड़े स्क्रीन लगाएं.
राम मूर्ति के बारे में सामने आई जानकारी

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अयोध्या राम मंदिर के गर्भगृह में राम की जो मूर्ति रखी जाएगी वो 'श्यामल वर्ण' की होगी और खड़ी में होगी.
अख़बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने ये जानकारी दी है.
शुक्रवार को चंपत राय ने कहा कि ये मूर्ति पैर से लेकर आंखों तक 51 इंच की है.
ट्रस्ट के सभी 11 सदस्यों ने 29 दिसंबर को राम की तीन मूर्तियों में से एक को चुनने के लिए मतदान किया था. जिन तीन मूर्तियों में से एक को चुना जाना था उसमें एक राजस्थान के सफेद मकराना संगमरमर से तैयार की गई कलाकार सत्यनारायण पांडे की बनाई मूर्ति थी और अन्य दो को कर्नाटक के गहरे रंग वाले ग्रेनाइट के पत्थरों से बनाया गया है. इनमें से एक को अरुण योगीराज ने तैयार किया है और दूसरी को गणेश भट्ट ने.
चंपत राय ने कहा कि मूर्ति पर पानी, दूध या अन्य किसी चढ़ावे का असर नहीं पड़ेगा, "तो अगर किसी व्यक्ति ने चढ़ावे का पानी या दूध पी लिया तो इससे उसे साइड इफेक्ट नहीं होंगे."
अख़बार लिखता है कि मंदिर को लेकर उन्होंने कहा कि बीते 300 सालों में इस तरह का मंदिर पूरा उत्तरी भारत में नहीं बनाया गया है.
उन्होंने कहा, "इसके निर्माण में लोहे का इस्तेमाल नहीं हुआ है क्योंकि वो ढांचे को कमज़ोर कर देता है. इसे इस तरह डिज़ाइन किया गया है इसकी उम्र एक हज़ार साल होगी."
लहराती रहे न्याय की ध्वजा- सीजेआई

देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने शनिवार को मंदिरों पर लगाए जाने वाले ध्वजा की तुलना अदालतों से करते हुए कहा कि वकीलों को इस तरह काम करना चाहिए कि न्याय की ध्वजा पीढ़ियों तक लहराती रहे.
इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक ख़बर के अनुसार राजकोट में एक कार्यक्रम में सीजेआई ने कहा, "जिस समाज में सभी नागरिकों को न्याय का हक होता है वहां ज़िला कोर्ट वो पहला दरवाज़ा होता है जहां तक आम इंसान की पहुंच होती है. लोग पहला ही कदम सुप्रीम कोर्ट की तरफ नहीं बढ़ाते. ऐसे में आपके काम से ही लोगों को आप पर भरोसा आएगा. ज़िला कोर्ट के वकील के तौर पर ये आपकी ज़िम्मेदारी है कि आप ये सुनिश्चित करें कि आने वाली कई पीढ़ियों तक न्याय की ध्वजा लहराती रहे."
जस्टिस चंद्रचूड़ राजकोट के जामनगर रोड में अदालत की नई इमारत का उद्घाटन करने पहुंचे थे. 110 करोड़ की लागत से बनी इस अदालत में 50 कोर्ट रूम हैं.
गुजरात के दो दिन के दौरे पर गए सीजेआई ने द्वारका और सोमनाथ मंदिर पर लगे धवजा की बात करते हुए कहा कि "द्वारकाधीश मंदिर पर लगा ध्वज काफी कुछ जगन्नाथ पुरी मंदिर पर लगे ध्वज जैसा है. ये मुझे प्रेरित करता है. हमारी परंपराएं व्यापक हैं और ये हमें बांध कर रखती हैं. इस ध्वज का हमारे लिए ख़ास मतलब है, ये हमें बताता है कि एक ताकत है जो वकीलों, जजों और आम नागरिकों के तौर पर हमें एकजुट करता है. और ये एकजुट करने वाली ताकत मानवता है जो क़ानून के शासन और संविधान से हमें मिलती है."
अख़बार लिखता है कि जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि उन्होंने "महात्मा गांधी के जीवन और आदर्शों से प्रेरित होकर अलग-अलग राज्यों में घूमना शुरू किया है" ताकि वो न्यायपालिका के सामने मौजूद चुनौतियों को समझ सकें और उनका हल निकाल सकें.
उन्होंने गुजरात के दौरे को इसी कोशिश का हिस्सा बताया और कहा- "मैं कोशिश कर रहा हूं कि अलग-अलग राज्यों में जाकर हाई कोर्ट के जजों और अन्य अधिकारियों से मिल सकूं, उनकी मुश्किलें सुन सकूं ताकि हम न्यायपालिका के सामने मौजूद चुनौतियों का हल निकाल सकें. उनसे बात करके मैं उनकी समस्या समझ पाता हूं."

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ब्रजभूषण शरण सिंह के ख़िलाफ़ आरोप तय करे कोर्ट- पुलिस बोली
दिल्ली पुलिस ने अदालत से गुज़ारिश की है कि वो महिला पहलवानों के ख़िलाफ़ कथित यौन उत्पीड़न मामले में भारतीय कुश्ती महसंघ के पूर्व अध्यक्ष और बीजेपी नेता ब्रजभूषण शरण सिंह के ख़िलाफ़ आरोप तय करे.
अख़बार जनसत्ता में छपी एक ख़बर के अनुसार पुलिस ने ब्रजभूषण सिंह के ख़िलाफ़ आरोप तय करने पर बहस पूरी कर ली है.
पुलिस ने आरोपी के इस दलील का विरोध किया है कि चूंकि कुछ घटनाएं विदेशों में हुई हैं इसलिए वो दिल्ली की अदालत के अधिकार क्षेत्र में नहीं आतीं.
पुलिस ने मजिस्ट्रेट से कहा कि सिंह द्वारा कथित तौर पर विदेशों और दिल्ली समेत भारत के अंदर की कई यौन उत्पीड़न की घटनाएं उसी अपराध की हिस्सा हैं. पुलिस ने कहा, "इस मामले में सुनवाई का अधिकारक्षेत्र दिल्ली की अदालत को है."
अख़बार लिखता है कि मामले की अगली सुनवाई 20 जनवरी को है.
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