राम मंदिर निर्माण के लिए विदेशी चंदा लेने का लाइसेंस क्यों चाहता है ट्रस्ट

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- Author, अनंत झणाणें
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, लखनऊ से
अयोधा में राम मंदिर के निर्माण का काम तेज़ी पर है. उसके लिए काफी पैसा खर्च किया जा रहा है.
जनवरी में होने वाली मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा की तारीख़ की आधिकारिक घोषणा फ़िलहाल नहीं हुई है, लेकिन इसे 22 जनवरी माना जा रहा है. इसके लिए मंदिर और अयोध्या नगरी को तैयार करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है.
सिर्फ़ मंदिर और मंदिर परिसर ही नहीं, अयोध्या नगरी को करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए तैयार करने के लिए करोड़ों रुपये की सरकारी परियोजनाओं को भी ज़मीन पर उतारने का काम जोर-शोर से चल रहा है.
इस बीच यह बात सामने आई है कि राम जन्भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (एफ़सीआरए) के तहत विदेश से दान लेने के लाइसेंस के लिए आवेदन किया है.
अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए एफ़सीआरए के तहत फंडिंग की चर्चा मई 2023 से ही हो रही थी.
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चम्पत राय ने अयोध्या में कहा, "भारतीयों की बहुत बड़ी संख्या विदेशों में रहती है. अनेक प्रवासी भारतीय अपने पूर्वजों की धरती से निरंतर संपर्क रखते हैं. वे चाहते थे कि हम भी कुछ राशि तीर्थ ट्रस्ट को समर्पित करें लेकिन भारत में कायदे कानून हैं."
चम्पत राय ने यह भी कहा कि भारत में बहुत सी संस्थाओं ने एफ़सीआरए का दुरुपयोग किया है. उन्होंने कहा, "नियमों का पालन करने की कोशिश की है और प्रवासी भारतीय, रामभक्त, उनकी इच्छाओं को पूरा करने के लिए हमने एफसीआरए में पंजीकरण का प्रार्थना पत्र जमा कर दिया है."

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अब तक कितना धन जमा हुआ है?
अयोध्या में राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कार्यालय प्रभारी प्रकाश गुप्ता ने बीबीसी को बताया कि
- मंदिर का ट्रस्ट बने तीन साल बीत चुके हैं और अब ट्रस्ट की ओर से एफ़सीआरए की प्रक्रिया पूरी हो गई है. अब सिर्फ सरकार से अनुमति मिलनी है जो नवंबर या दिसंबर तक मिलने की उम्मीद है.
- विदेशों में भी हिन्दू बहुत हैं और वो दान देने के लिए तैयार हैं. उनके सामने समस्या थी कि वो लोग यहाँ आ नहीं सकते तो वो दान कैसे देते?
- मंदिर के निर्माण के लिए एफसीआरए के माध्यम से फंड आ सकता है. वो दान है, डोनेशन है और हमारे यहाँ एक-एक पैसे की अकाउंटिंग होती है, गवर्नमेंट ऑडिट होता है.
- हम पैसा राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के नाम से ही लेंगे और किसी और नाम से नहीं.
भारत में बहुत सी संस्थाओं ने एफ़सीआरए का दुरुपयोग किया है लेकिन उन्होंने, "नियमों का पालन करने की कोशिश की है.
392 स्तम्भों वाले राम मंदिर की परियोजना की लागत और उसमें खर्च होने वाले पैसे के बारे में तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट कार्यालय के प्रभारी प्रकाश गुप्ता कहते हैं..
- मार्च 2023 तक अयोध्या में मंदिर निर्माण के लिए 900 करोड़ रुपये खर्च हो चुका है.
- जनवरी में होने वाली प्राण प्रतिष्ठा के लिए मंदिर का निर्माण तेज़ी से चल रहा है. ऐसा अनुमान है कि मार्च से लेकर अब तक 500 से 600 करोड़ और खर्च हो गए होंगे.
- मंदिर निर्माण की टोटल प्रोजेक्ट कॉस्ट 2000 करोड़ रुपये है.
- श्रद्धालु पैसा रोज़ दे रहे हैं और 3 साल में वो 4500 से 5000 करोड़ रुपये दे चुके हैं.
- मिलने वाले पैसे की बाकायदा बैंकों में एफडी होती है और बैलेंस में खर्चे के लिए पैसा अलग से रखा जाता है.
- अभी तो मंदिर की पहली मंज़िल का काम चल रहा है. फिर सेकेंड फ्लोर बनेगा और बाद में गुम्बद बनेगा, तो अभी बहुत काम बाकी है.

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क्या धार्मिक कार्यों के लिए मिलता है एफ़सीआरए?
एफ़सीआरए मिलने के पहले तीन सालों में विदेश से एक सीमित रक़म ली जा सकती है. लेकिन 3 साल के ट्रैक रिकॉर्ड के बाद पांच साल के लिए व्यापक अनुमति यानी ब्लैंकेट परमिशन मिल सकती है जिससे किसी भी व्यक्ति से कोई भी राशि स्वीकार की जा सकती है.
गृह मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक़, कौन लोग और किन तरीकों से एफसीआरए से धन ले सकते हैं.
- उसका व्यक्ति या संस्था का निश्चित सांस्कृतिक, आर्थिक, शैक्षिक, धार्मिक या सामाजिक कार्यक्रम होना चाहिए.
- उसे केंद्र सरकार से एफ़सीआरए पंजीकरण/पूर्व अनुमति प्राप्त करनी होगी.
- एफ़सीआरए के माध्यम से फ़ंड सिर्फ़ दिल्ली की एसबीआई की पार्लियामेंट स्ट्रीट की शाखा में खाता खोलकर ही लिया जा सकता है.
बाबरी मस्जिद के एवज़ में मिली ज़मीन से जुड़े ट्रस्ट के पास भी है एफ़सीआरए
बाबरी मस्जिद के एवज़ में अयोध्या के धन्नीपुर गाँव में मिली ज़मीन पर फिलहाल कोई निर्माण कार्य नहीं हो रहा है.
वहां पर इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन एक मस्जिद के साथ साथ एक अस्पताल, एक कम्युनिटी किचन और 1857 के पहले स्वतंत्रता संग्राम में अहम भूमिका निभाने वाले अहमदुल्लाह शाह को समर्पित एक संग्रहालय भी बनाने जा रहा है.
लेकिन इंडो इस्लामिक फाउंडेशन के पदाधिकारी कहते हैं कि इस परियोजना के लिए उनके पास फिलहाल सिर्फ 50 लाख रुपये ही जमा हुए हैं जिनका इस्तेमाल सरकारी अनुमतियों, एनओसी और प्रशासनिक कार्यों के लिए ही हो रहा है.
फाउंडेशन का कहना है कि आने वाले समय में वो परियोजना से जुड़े निर्माण कार्य को शुरू करने के लिए फंड रेज़िंग का अभियान शुरू करेंगे.
इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन के सचिव अतहर हुसैन सिद्दीकी का कहना है, "हमने पहले ही कह दिया है कि धन्नीपुर में हम हॉस्पिटल, कम्युनिटी किचन जैसे धर्मार्थ कार्य करेंगे और वो हमारी प्लानिंग का हिस्सा है. इसके लिए हमने तय किया है कि हम सभी वैध स्रोतों से धन लेंगे, चाहे वे घरेलू हों या अंतरराष्ट्रीय. इसके लिए हमने एफ़सीआरए खाते के लिए आवेदन किया था."
वो बताते हैं कि, "हमने एक एफ़सीआरए खाता खोला है, लेकिन अभी तक हमें उस खाते में कोई धनराशि नहीं मिली है. फिलहाल हमने किसी से फंड माँगा भी नहीं है और ना ही किसी ने हमें फंड देने की पेशकश की है. हम लोग अपने ट्रस्ट के तीन आर्थिक साल पूरे करने के बाद विदेश से फंड के लिए व्यापक अनुमति के लिए योग्य हो जाएंगे. इसके बाद पांच साल के लिए हम किसी भी वैध व्यक्ति या संस्था से कोई भी राशि स्वीकार कर पाएंगे."

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2017 से 2021 के बीच 6677 एफ़सीआरए लाइसेंस रद्द
मोदी सरकार के शासनकाल में एफ़सीआरए के नियम कड़े कर दिए गए हैं और निगरानी बढ़ा दी गई है.
खुद सरकार ने जानकारी दी कि 2017 से 2021 के बीच सरकार ने 6677 एफ़सीआरए रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट्स कैंसिल किए.
दो दिसंबर 2022 को राजीव गांधी फ़ाउंडेशन के एफ़सीआरए लाइसेंस कैंसिल करने की सूचना देते हुए केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बताया कि राजीव गांधी फ़ाउंडेशन ने एफ़सीआरए के नियमों का उल्लंघन किया और उनका रजिस्ट्रेशन रद्द करने का फ़ैसला लिया गया है. अब राजीव गांधी फ़ाउंडेशन अगले तीन साल तक अपने लाइसेंस के लिए पंजीकरण नहीं कर पाएंगे.
गृह मंत्रालय के जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक़ रद्द किये गए 6677 लाइसेंसों में से आंध्र प्रदेश के 622, महाराष्ट्र के 734, तमिलनाडु के 755, उत्तर प्रदेश के 635 और पश्चिम बंगाल के 611 संस्थान शामिल हैं.
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