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इसराइल के इस कदम से यूएन ही नहीं अमेरिका, ब्रिटेन भी नाराज़, क्या है पूरा मामला
इसराइल की संसद ने यूएनआरडब्ल्यूए के काम करने पर प्रतिबंध लगाने के लिए एक विधेयक पर वोटिंग करवाई है.
अगर इस संबंध में क़ानून बन गया तो तीन महीनों के अंदर यूएनआरडब्ल्यूए का इसराइल और इसराइल के कब्जे वाले पूर्वी यरुशलम से काम करना बंद हो जाएगा.
संयुक्त राष्ट्र राहत और कार्य एजेंसी यानी यूएनआरडब्ल्यूए फ़लस्तीनी शरणार्थियों के लिए काम करती है.
इस क़ानून के अमल में आने के बाद यूएनआरडब्ल्यूए के कर्मचारियों और इसराइली अधिकारियों का संपर्क भी बंद हो जाएगा.
इससे ग़ज़ा और इसराइल के कब्जे वाले वेस्ट बैंक में एजेंसी के कामकाज की क्षमता सीमित हो जाएगी.
ग़ज़ा के सभी क्रॉसिंग्स पर इसराइली फौज का नियंत्रण है. इसलिए युद्धग्रस्त इलाके में सहायता सामग्री पहुंचाने के लिए यूएनआरडब्ल्यूए का इसराइली सेना से सहयोग अनिवार्य है.
यहां ज़मीन पर काम करने वाली प्रमुख यूएन एजेंसी यही है.
इस क़ानून के लागू होने के बाद इसराइल में यूएनआरडब्ल्यूए के कर्मचारियों की कानूनी सुरक्षा ख़त्म हो जाएगी. इसके साथ ही पूर्वी यरुशलम में एजेंसी का हेडक्वार्टर भी बंद हो जाएगा.
इसराइली संसद के फ़ैसले पर यूएन महासचिव ने क्या कहा
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इसराइली संसद के इस फ़ैसले के बाद कहा कि ये क़ानून इसराइल-फ़लस्तीन संघर्ष के हल के साथ ही इस इलाके में शांति और सुरक्षा के लिए नुकसानदेह साबित होगा.
वहीं यूएनआरडब्ल्यूए के प्रमुख फिलिप लज़ारिनी ने कहा कि ये फैसला अब सिर्फ फ़लस्तीनियों के दर्द को ही बढ़ाएगा.
अमेरिका और ब्रिटेन ने जताया एतराज़
अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी समेत कई देशों ने इसराइल के इस कदम पर गहरी चिंता जताई है.
ब्रिटेन के विदेश मंत्री डेविड लेमी ने इसे 'पूरी तरह ग़लत' कदम बताया. जबकि प्रधानमंत्री कीएर स्टार्मर ने बताया कि इस क़ानून से फ़लस्तीनियों के लिए किए जा रहे यूएनआरडब्ल्यूए के जरूरी काम असंभव हो जाएंगे. साथ ही ग़ज़ा में अंतरराष्ट्रीय मानवीय कदम भी ख़तरे में पड़ जाएंगे.
अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा कि यूएनआरडब्ल्यूए ने ग़ज़ा पट्टी में मानवीय सहायता बांटने में बेहद 'महत्वपूर्ण' भूमिका निभाई है. यहां के सभी इलाकों के लगभग 20 लाख लोग एजेंसी की मदद और सेवाओं पर निर्भर रहे हैं.
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने कहा, ''हम इसराइल से अपील करते हैं कि वो इस क़ानून को अमल में लाना रोक दे. हम उनसे अपील करते हैं कि इसे बिल्कुल भी पारित न करें.''
इसराइल के आरोप
वहीं, इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने कहा, ''यूएनआरडब्ल्यूए के कर्मचारी इसराइल के ख़िलाफ़ आतंकवादी गतिविधियों में शामिल थे और इसके लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए.'' हालांकि उन्होंने कहा कि ग़ज़ा में पहले से जो मदद पहुंचाई जा रही थी वो जारी रहनी चाहिए.
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ''ग़ज़ा के नागरिकों को इसराइल की मानवीय मदद मिलती रहे इसके लिए हम अपने अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर काम करने के लिए तैयार हैं.''
इसराइल का कहना है कि ग़ज़ा में यूएनआरडब्ल्यूए के कर्मचारी हमास के साथ मिल गए हैं. उसका कहना है कि 7 अक्टूबर के हमले में यूएनआरडब्ल्यूए के 19 कर्मचारी शामिल थे.
संयुक्त राष्ट्र ने इसराइल के दावों की जांच के बाद उन आरोपियों में से नौ को निकाल दिया. लेकिन उसने कहा है कि इसराइल ने जो व्यापक आरोप लगाए हैं उससे संबंधित सुबूत उसने नहीं दिए हैं.
वहीं यूएनआरडब्ल्यूए का कहना है कि हमास से उसके जो समझौते हुए थे वो सिर्फ उसके काम के सिलसिले में थे. ये समझौते इसलिए हुए थे ताकि एजेंसी को ग़ज़ा पट्टी में अपने काम में सहूलियत हो.
इसराइल की संसद नेसेट ने सोमवार की शाम को भारी बहुमत से दो विधेयकों को मंजूरी दे दी.
नेसेट के विदेश मामलों और सुरक्षा कमेटी के अध्यक्ष यूली एदेलस्तिन ने विधेयक पेश करते हुए आरोप लगाया कि यूएनआरडब्ल्यूए का इस्तेमाल 'आतंकवादी गतिविधियों के कवर' के तौर पर हो रहा है.
उन्होंने संसद में कहा, ''आतंकवादी संगठन (हमास) और यूएनआरडब्ल्यू में गहरा संबंध है. इसराइल इसे बर्दाश्त नहीं करेगा.''
यूएनआरडब्ल्यूए और उसके काम
यूएनआरडब्ल्यूए दशकों से ग़ज़ा में लाखों लोगों को स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा समेत कई तरह की सहायता मुहैया कराती आ रही है.
पिछले साल हमास के हमले बाद छिड़े युद्ध के बाद ज़मीन पर इस एजेंसी की मौजूदगी ने इसे वहां नागरिकों तक मानवीय मदद पहुंचाने की कोशिशों की एक बेहद अहम कड़ी बना दिया है.
लगभग सभी नागरिक अब मदद के लिए इसी एजेंसी पर निर्भर है.
यूएनआरडब्ल्यूए के कमिश्नर जनरल फिलिप लज़ारिनी ने इस प्रतिबंध को ‘अभूतपूर्व’ करार दिया और कहा कि यह यूएन चार्टर का विरोध करता है. साथ ही ये अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत इसराइल के दायित्वों का भी उल्लंघन है.
उन्होंने कहा कि ग़ज़ा पहले ही एक साक्षात नरक झेल चुका है. अगर यूएनआरडब्ल्यूए की मदद पहुंचने में बाधा आई तो यहां के साढ़े छह लाख बच्चे और बच्चियां शिक्षा से महरूम हो जाएंगीं. इससे बच्चों की एक पूरी पीढ़ी ख़तरे में पड़ जाएगी.
इसराइल के कब्जे वाले वेस्ट बैंक में पच्चीस लाख फ़लीस्तीनी यूएनआरडब्ल्यूए में रजिस्टर्ड हैं.
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख ने शुक्रवार को कहा कि इसराइली सेना एक पूरी आबादी को बमबारी, कब्जे और भूख के जोखिम का शिकार बना रही है.
कई फ़लस्तीनी मानते हैं कि ग़ज़ा के उत्तर में इसराइली सेना 'समर्पण करो या भूखा मरो' की नीति पर चल रही है.
इससे लगभग चार लाख नागरिक मजबूरन दक्षिण की ओर विस्थापित हो जाएंगे. इसके बाद बाकी बचे हमास लड़ाकों की घेराबंदी की जाएगी.
हालांकि इसराइली सेना ने कहा है कि उसकी ऐसी कोई योजना नहीं है. उसकी मंशा तो यही है कि यहां के नागरिक इस ख़तरे से निकल जाएं.
हमास संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि पिछले साल 7 अक्टूबर को शुरू की गई इसराइल की कार्रवाई में ग़ज़ा में अब तक 42,710 लोगों की मौत हो चुकी है.
7 अक्टूबर को हमास की ओर से इसराइल के हमले में 1200 लोगों की मौत हो गई थी और 251 लोगों को बंधक बना लिया गया था.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित