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मलयालम फ़िल्म इंडस्ट्री को एक रिपोर्ट ने कैसे हिलाकर रख दिया
- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
एक जाँच रिपोर्ट ने मलयालम फ़िल्म इंडस्ट्री को हिलाकर रख दिया है.
इसकी वजह है- अभिनेत्रियों के यौन उत्पीड़न के मामलों का सार्वजनिक होना, शिकायतों का पुलिंदा और जस्टिस हेमा कमिटी की रिपोर्ट. इन अभिनेत्रियों में से कुछ को अपना करियर तक छोड़ने को मजबूर होना पड़ा.
महिला कलाकारों ने जाने-माने अभिनेताओं-निर्देशकों के बारे में कहा है कि वे उनका यौन शोषण कर रहे थे, उनसे जस्टिस हेमा कमिटी की रिपोर्ट में कही बातों की पुष्टि भी होती है. इस रिपोर्ट को जब जारी किया गया तो उन हिस्सों को हटा दिया गया था, जिनमें उत्पीड़न करने वालों और पीड़ितों के नाम थे.
मलयालम फ़िल्म जगत में हुई इस हलचल के बाद स्थानीय सिनेमा के बड़े स्टार मोहनलाल ने एसोसिएशन ऑफ़ मलयालम मूवी आर्टिस्ट के अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा दे दिया है. उसके बाद संस्था के सारे पदाधिकारियों ने भी त्यागपत्र दे दिया है. इन इस्तीफ़ों के बाद एसोसिएशन को ही भंग कर दिया गया है.
'सामने आ सकते हैं कुछ और गंभीर मुद्दे'
बीते 48 घंटों में मलयालम फ़िल्म इंडस्ट्री में काम करने वाली महिलाओं ने उन लोगों के नाम बताए हैं जिन्होंने 2009 के बाद से यौन उत्पीड़न किया.
जिन लोगों पर आरोप लगे हैं, उनमें से सिर्फ़ एक ने आधिकारिक तौर पर पुलिस को बताया है कि उनके ख़िलाफ़ लगे आरोप बेबुनियाद हैं.
केरल सरकार ने हाल ही में स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम यानी एसआईटी बनाई है. इस टीम में चार महिला पुलिस आईपीएस अधिकारी हैं.
इनका काम होगा- शिकायतें लेना, हालांकि ये टीम एफ़आईआर दर्ज नहीं करेगी.
एक और मामला सामने आया
बंगाली अभिनेत्री श्रीलेखा मित्रा ने मलयाली सिनेमा के एक जाने-माने निर्देशक रंजीत पर आरोप लगाए हैं. उनका आरोप है कि साल 2009 में उनके साथ उन्होंने यौन दुर्व्यवहार किया था. रंजीत ने इन आरोपों को ख़ारिज किया है.
इस बीच रंजीत केरल चलचित्र अकादमी के चेयरमैन पद से इस्तीफ़ा दे चुके हैं.
श्रीलेखा ने 26 अगस्त को कोच्चि के पुलिस कमिश्नर से औपचारिक तौर पर शिकायत की है. ये शिकायत ग़ैर-ज़मानती अपराध के तहत दर्ज की गई है.
अभिनेत्री माला पार्वती ने बीबीसी हिंदी से कहा, ''जो लोग सामने आए हैं, वो बस गिनती के हैं. कुछ और गंभीर मुद्दे हैं, जो सामने आ सकते हैं. जो लोग सार्वजनिक तौर पर सामने आए हैं, ये वो लोग नहीं हैं जो हेमा कमिटी के सामने पेश हुए थे.''
हेमा कमिटी 2017 में केरल राज्य सरकार के आदेश पर बनाई गई थी. वीमेन इन सिनेमा कलेक्टिव यानी डब्ल्यूसीसी ने मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन से इस बारे में अपील की थी.
ये सब तब हुआ था, जब एक मशहूर अभिनेत्री का चार लोगों ने यौन उत्पीड़न किया था.
इस मामले में मुख्य अभियुक्त अभिनेता दिलीप थे जो फिलहाल ज़मानत पर हैं.
राज्य सरकार ने ये रिपोर्ट साढ़े चार साल बाद जारी की है और पुलिस के पास दर्ज सारी शिकायतों की जांच करने की बात कही है.
केरल सरकार ने इन केसों की जांच ख़ुद से करने की बात से इनकार किया. हालांकि दो शिकायतें आने के बाद जब दबाव बढ़ा तो राज्य सरकार ने एसआईटी बनाने का फ़ैसला किया है.
शिकायतों में क्या है
ताज़ा शिकायतों में जो बातें कही गई हैं, हेमा कमिटी की रिपोर्ट में भी उनका ज़िक्र था.
शिकायत करने वाली महिलाओं ने उन वाक़यों को बताया है, जिसमें उन्हें बार-बार 'समझौता' और 'एडजस्ट' करने के लिए कहा जाता था.
इसके बदले इनको एसोसिएशन ऑफ मलयालम मूवी आर्टिस्ट यानी एएमएमए की सदस्यता देने की बात कही गई.
मीनू मुनीर ने बीबीसी हिंदी से बताया, ''ये वाकया तब का है, जब मैं फ़िल्म शूटिंग वाली जगह स्टेट सेक्रेटेरियट के वॉशरूम से बाहर आई. एक मशहूर एक्टर ने पीछे से मुझे पकड़ा और बिना मेरी मर्ज़ी के मुझे चूमा.''
वो बोलीं, ''मैंने उसे पीछे धक्का दिया और वहां से भाग गई. वो कहता रहा कि त्रिवेंद्रम में उसका एक अपार्टमेंट है और मैं उससे वहां मिलूं. एक और मशहूर एक्टर था. वो मुझसे कहता कि होटल का कमरा खुला रखना, मैं आऊंगा.''
मीनू मुनीर बताती हैं, ''मैंने साफ कहा कि ये संभव नहीं है. वो बोला कि तुम्हें ये करना ही होगा क्योंकि मैं एक पांच सितारा होटल से तुम्हारी ख़ातिर इस होटल आया हूं. अगले दिन वो सेट पर बिना कारण चिल्लाता रहा. एक विधायक और अभिनेता ने भी मुझसे ऐसी बातें कहीं. मैं इनके जाल में नहीं फँसी क्योंकि मैं इस इंडस्ट्री में इसलिए आई थी क्योंकि मुझे इस कला से प्रेम रहा.''
मुनीर को लगा कि अगर वो एएमएमए की सदस्य बन गईं तो उन्हें ऐसे उत्पीड़न का सामना नहीं करना होगा. मगर मुनीर को तब झटका लगा जब उनसे कहा गया कि सदस्यता मुफ़्त में मिल जाएगी, अगर वो 'समझौता' और 'एडजस्ट' करने के लिए तैयार हो जाएं.
वो बोलीं, ''एक प्रोडक्शन कंट्रोलर था, जिसने कार में मेरे साथ बुरा बर्ताव किया. मैंने 2013 में एक मैगजीन को दिए इंटरव्यू में इन सबके बारे में बताया था, मगर किसी ने पूछताछ नहीं की.''
जिन पर आरोप हैं, उनका क्या पक्ष
इस रिपोर्ट में जिन एक्टर्स और निर्देशकों का नाम है, उनमें से किसी की प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई है. प्रतिक्रिया मिलने पर इस रिपोर्ट को अपडेट किया जाएगा.
ये सारे मामले 2008 से 2012 के बीच के हैं.
दो अन्य अभिनेत्रियों गीता विजयन और श्रीदेविका ने जाने-माने निर्देशक पर आरोप लगाया है कि वो आधी रात को उनका दरवाज़ा खटखटाने लगे थे.
श्रीदेविका के मामले में ऐसा चार दिन तक हुआ. गीता विजयन इस मामले में शिकायत दर्ज करवाने के लिए तैयार हैं.
जिन निर्देशक पर आरोप लगे हैं, वो इन आरोपों पर अभी तक कुछ नहीं बोले हैं. अगर वो ऐसा करते हैं तो इस रिपोर्ट को अपडेट किया जाएगा.
एक दूसरे मामले में एक स्क्रिप्ट राइटर ने डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस यानी डीजीपी को शिकायत भेजी है.
इस शिकायत में कहा गया है कि जब वो 2022 में कोल्लम में एक फ़िल्म पर बात करने के लिए गई थीं, तब एक अभिनेता-निर्देशक ने उनका यौन उत्पीड़न किया.
चूमने की कोशिश करने के बाद अभिनेता-निर्देशक ने स्क्रिप्ट राइटर से माफ़ी मांगी और एक असिस्टेंट के ज़रिए 10 हज़ार रुपये भेजने की कोशिश की ताकि वो ये बात किसी को ना बताएं.
मुनीर की ही तरह इस स्क्रिप्ट राइटर ने भी फ़िल्म इंडस्ट्री छोड़ दी.
अभिनेता सिद्दीक़ी पर एक अभिनेत्री ने रेप का आरोप लगाया है. सिद्दीक़ी ने इसके बाद एसोसिएशन ऑफ़ मलयालम मूवी आर्टिस्ट्स (एएमएमए) के महासचिव पद से इस्तीफ़ा दे दिया.
सिद्दीक़ी ने राज्य के पुलिस प्रमुख के पास दर्ज शिकायत में अभिनेत्री पर आरोप लगाया है कि वो उनके ख़िलाफ़ झूठे आरोप लगा रही हैं और वो आपराधिक साज़िश में शामिल हैं.
2016 में फ़िल्म की प्रिव्यू स्क्रीनिंग के बाद रेप किए जाने के आरोप को सिद्दीक़ी ने झूठा बताया है.
वो बोले, ''उस दिन (अभिनेत्री) अपने मां-बाप की मौजूदगी में मुझसे मिली थीं. साढ़े आठ साल बाद रेप का जो वो आरोप लगा रही हैं, वैसा कुछ नहीं हुआ. पांच साल पहले किसी तरह की यौन बदसलूकी जैसी कोई घटना नहीं हुई.''
सिद्दीक़ी ने कहा- इन आरोपों का मक़सद मेरी और एएमएमए की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाना लगता है. अब वो जो आरोप लगा रही हैं, वो पहले लगाए आरोपों से एकदम विपरीत हैं.
अभिनेता पृथ्वीराज सुकुमारन ने बयान जारी कर कहा, ''अगर कोई आरोप हैं तो इनकी जांच होनी चाहिए. अगर जांच होती है और आरोप सही साबित होते हैं, तो सख़्त सज़ा दी जानी चाहिए. अगर ये आरोप जांच के बाद ग़लत साबित होते हैं तब सख़्त सज़ा दी जानी चाहिए.''
क़ानून क्या कहता है
इस मामले में विपक्ष केरल की सरकार की आलोचना कर रहा है. साथ में सिविल सोसाइटी के लोग भी हेमा कमेटी की रिपोर्ट को देर से जारी करने पर सरकार को निशाने पर ले रहे हैं.
केरल सरकार का कहना है कि अगर यौन उत्पीड़न झेलने वाली अभिनेत्रियाँ शिकायत करेंगी तो जांच की जाएगी.
दूसरे शब्दों में कहा जाए तो राज्य सरकार इस मामले में हेमा कमेटी की रिपोर्ट पर अपनी तरफ़ से कार्रवाई नहीं करेगी.
केरल सरकार के एक मंत्री ने बीबीसी हिंदी से अपना नाम न छापने की शर्त पर कहा- अगर शिकायत करने वाली महिलाएं ही आगे नहीं आएंगी तो सरकार कैसे पहल करेगी? सवाल ये है कि अगर अपराध हुआ है तो क्या राज्य सरकार पहल कर सकती है, इस पर क़ानूनी सलाह ली जा रही है.
मगर एक दूसरा तर्क ये भी दिया जा रहा है कि कमेटी के सामने जिन लोगों ने बयान दर्ज किए हैं, उनकी जांच की जानी चाहिए.
माला पार्वती कहती हैं- ये नहीं भूलना चाहिए कि कमेटी के सामने इन महिलाओं ने सबूत भी दिए थे.
केरल हाईकोर्ट की वकील संध्या राजू ने बीबीसी हिंदी से कहा, ''जब अपराध होता है तो ये राज्य के ख़िलाफ़ अपराध होता है. जांच करने वाली एजेंसियों को पहल करनी चाहिए और प्रक्रिया शुरू करके अभियोजन पक्ष की मदद करनी चाहिए. इसका मतलब ये नहीं है कि पीड़ित शिकायत करे, तभी जांच हो सकती है.''
वकील संध्या राजू ने कहा, ''अगर कोई आपराधिक केस सामने आता है तो राज्य सरकार ही मुख्य पक्ष है. ऐसे में सरकार को एक्शन लेना होगा.''
क़ानूनी तौर पर उम्मीद जताई जा रही है कि केरल हाईकोर्ट इस मामले पर फ़ैसला करेगा. कोर्ट ने राज्य सरकार से हेमा कमेटी की पूरी रिपोर्ट जमा करने के लिए कहा है.
इनमें वो 54 पेज भी शामिल हैं, जिनमें कथित उत्पीड़न करने वाले कुछ लोगों के साथ पीड़िताओं के नामों का ज़िक्र था.
वकील संध्या कहती हैं- ''राज्य सरकार अगर पहल करती है तो इसके दूरगामी नतीजे होंगे. न सिर्फ़ फ़िल्म इंडस्ट्री में बल्कि इससे दूसरे क्षेत्रों में इस केस का असर देखने को मिलेगा. फिर चाहे निर्माण क्षेत्र हो, कॉर्पोरेट क्षेत्र हो या फिर क़ानूनी क्षेत्र हो.''
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित