बांग्लादेश: हसनत अब्दुल्लाह ने 'सेवन सिस्टर्स' को भारत से अलग-थलग करने की दी चेतावनी

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इमेज कैप्शन, बांग्लादेश की नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी) के सदर्न चीफ़ ऑर्गेनाइजर हसनत अब्दुल्लाह

बांग्लादेश की नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी) के सदर्न चीफ़ ऑर्गेनाइजर हसनत अब्दुल्लाह ने चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर बांग्लादेश को अस्थिर किया गया तो भारत के पूर्वोत्तर राज्यों सेवन सिस्टर्स को अलग-थलग कर दिया जाएगा.

पूर्वोत्तर भारत के सात राज्यों- अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिज़ोरम, नगालैंड और त्रिपुरा को एक साथ सेवन सिस्टर्स कहा जाता है.

नेशनल सिटिजन पार्टी इसी साल फ़रवरी में बनी थी और इसे बनाने वाले वही लोग हैं, जिन्होंने पिछले साल जुलाई में प्रधानमंत्री शेख़ हसीना के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन शुरू किया था.

इसी विरोध प्रदर्शन के बाद शेख़ हसीना को बांग्लादेश छोड़कर भागना पड़ा था और मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी थी.

हसनत अब्दुल्लाह का यह वीडियो क्लिप भारत में भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

बांग्लादेश की अंग्रेज़ी न्यूज़ वेबसाइट द बिज़नेस स्टैंडर्ड के मुताबिक़ इंक़लाब मंच ने सेंट्रल शहीद मीनार में सर्वदलीय विरोध रैली का आयोजन किया था.

इसी को संबोधित करते हुए हसनत ने आरोप लगाया कि बांग्लादेश को अस्थिर और चुनाव प्रक्रिया को बाधित करने की कोशिश की जा रही है. हसनत ने इंक़लाब मंच के प्रवक्ता ओसमान बिन हादी पर हुए हमले के लिए भी भारत पर आरोप लगाया.

भारत सरकार ने अभी इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.

'द बिज़नेस स्टैंडर्ड' के मुताबिक़ हसनत ने कहा, ''मैं भारत से स्पष्ट कहना चाहता हूँ कि बांग्लादेश की संप्रभुता, क्षमता, हमारे मताधिकार और मानवाधिकार का सम्मान नहीं करने वाली ताक़तों को पनाह देगा तो हमारी तरफ़ से इसका जवाब मिलेगा. बांग्लादेश की अस्थिरता का असर पूरे इलाक़े पर होगा.''

''अगर बांग्लादेश अस्थिर हुआ तो इसकी आग सरहद से बाहर भी फैलेगी. आज़ादी के 54 सालों बाद भी बांग्लादेश बाहरी नियंत्रण की कोशिश का सामना कर रहा है. जो सत्ता और पद के लिए दिल्ली की तरफ़ देख रहे हैं, वे तीसरी बार देश की आज़ादी बेचने की कोशिश कर रहे हैं.''

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इमेज कैप्शन, बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख शफ़ीक़ुर रहमान के साथ मोहम्मद यूनुस

निशाने पर सेवन सिस्टर्स?

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ये कोई पहली बार नहीं है, जब बांग्लादेश में 'सेवन सिस्टर्स' को मुद्दा बनाया जा रहा है या उस पर टिप्पणी की जा रही है. बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस इसी साल 26 से 29 मार्च तक चीन के दौरे पर थे. इसी दौरे में यूनुस ने ऐसा बयान दिया, जिससे भारत में कड़ी प्रतिक्रिया देखने को मिली थी.

मोहम्मद यूनुस ने पूर्वोत्तर भारत की लैंडलॉक्ड स्थिति का हवाला दिया था. यूनुस ने कहा था कि पूर्वोत्तर भारत का समंदर से कोई कनेक्शन नहीं है और बांग्लादेश ही इस इलाक़े का अभिभावक है.

मोहम्मद यूनुस ने कहा था, ''भारत के सेवन सिस्टर्स राज्य लैंडलॉक्ड हैं. इनका समंदर से कोई संपर्क नहीं है. इस इलाक़े के अभिभावक हम हैं. चीन की अर्थव्यवस्था के लिए यहाँ पर्याप्त संभावनाएं हैं. चीन यहाँ कई चीज़ें बना सकता है और पूरी दुनिया में आपूर्ति कर सकता है.''

मोहम्मद यूनुस की इस टिप्पणी पर आपत्ति जताते हुए असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने एक्स पर लिखा था, ''पूर्वोत्तर भारत के सेवन सिस्टर्स राज्यों को लैंडलॉक्ड बताना और बांग्लादेश को उनके लिए समंदर तक पहुंच का एकमात्र अभिभावक बताना आपत्तिजनक और निंदनीय है. मोहम्मद यूनुस के ऐसे भड़काऊ बयानों को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए क्योंकि ये गहरे रणनीतिक विचारों और लंबे समय से चले आ रहे एजेंडे को दर्शाते हैं."

पूर्वोत्तर भारत दशकों से उग्रवाद ग्रस्त रहा है और बांग्लादेश पर इन राज्यों में उग्रवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगता रहा है.

हालांकि, पूर्वोत्तर भारत में उग्रवाद अभी काबू में है लेकिन एक किस्म की बेचैनी अब भी देखने को मिलती है. भारत का यह इलाक़ा काफ़ी संवेदनशील माना जाता है.

ख़ासकर सिलीगुड़ी कॉरिडोर के कारण. महज 22 किलोमीटर चौड़े इस कॉरिडोर के ज़रिए ही पूर्वोत्तर भारत का बाक़ी भारत से ज़मीन से जुड़ाव है.

बांग्लादेश और नेपाल भी इसी कॉरिडोर के साथ सीमा साझा करते हैं. इसे 'चिकन नेक' भी कहा जाता है. भूटान और चीन भी इस कॉरिडोर से महज कुछ किलोमीटर ही दूर हैं.

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इमेज कैप्शन, कुछ विश्लेषकों का कहना है कि मोहम्मद यूनुस के सत्ता में आने के बाद से बांग्लादेश में भारत विरोधी भावना बढ़ी है

भारत विरोधी भावना

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने फ़रवरी में आम चुनाव कराए जाने का एलान किया है.

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इमेज कैप्शन, बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने फ़रवरी में आम चुनाव कराए जाने का एलान किया था.

इसी साल अप्रैल महीने में बांग्लादेश के पूर्व सेना अधिकारी और मोहम्मद यूनुस के क़रीबी सहयोगी मेजर जनरल (रिटायर्ड) फ़ज़लुर रहमान ने कहा था कि भारत अगर पहलगाम में हमले के जवाब में पाकिस्तान पर हमला करता है तो बांग्लादेश को भारत के पूर्वोत्तर राज्यों पर कब्ज़े के लिए चीन के साथ सहयोग करना चाहिए. हालांकि मोहम्मद यूनुस की सरकार से इस बयान से ख़ुद को अलग कर लिया था.

29 अप्रैल को एक फेसबुक पोस्ट में फ़ज़लुर ने बांग्ला में लिखा था, "अगर भारत पाकिस्तान पर हमला करता है तो बांग्लादेश को भारत के उत्तर-पूर्वी सात राज्यों पर कब्जा कर लेना चाहिए. मुझे लगता है कि इस संदर्भ में चीन के साथ संयुक्त सैन्य व्यवस्था पर चर्चा शुरू करना ज़रूरी है."

बांग्लादेश को 'इंडिया लॉक्ड' मुल्क कहा जाता है. दरसअल, बांग्लादेश की 94 प्रतिशत सीमा भारत से लगती है. भारत और बांग्लादेश के बीच 4,367 किलोमीटर लंबी सीमा लगती है और यह उसकी अंतरराष्ट्रीय सीमा का 94 फ़ीसदी है. यानी बांग्लादेश लगभग चारों तरफ़ से भारत से घिरा हुआ है.

ऐसे में बांग्लादेश सुरक्षा और व्यापार के मामले में भारत पर निर्भर है. वहीं बांग्लादेश से भारत को पूर्वोत्तर के राज्यों में सस्ता और सुलभ संपर्क में मदद मिलती है. पूर्वोत्तर के राज्यों से बाक़ी भारत को जोड़ने में बांग्लादेश की अहम भूमिका है.

पिछले साल अगस्त महीने में शेख़ हसीना को प्रधानमंत्री की कुर्सी छोड़ा भारत आना पड़ा था और तब से यहीं हैं. बांग्लादेश में शेख़ हसीना की बेदख़ली के बाद कहा जा रहा है कि वहां इस्लामिक कट्टरपंथियों का प्रभाव बढ़ा है.

जमात-ए-इस्लामी का साथ

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इमेज कैप्शन, बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस (फ़ाइल फोटो)

मोहम्मद यूनुस की सरकार को बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी संगठन भी समर्थन कर रहा है. जमात-ए-इस्लामी के बारे में कहा जाता है कि यह बांग्लादेश के मुक्ति युद्ध के दौरान पाकिस्तान के साथ था. जमात एक तरह से स्वतंत्र बांग्लादेश का विरोध करता रहा है.

इसी साल फ़रवरी महीने में बांग्लादेश की न्यूज़ वेबसाइट प्रथम आलो को दिए इंटरव्यू में बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख शफ़ीक़ुर रहमान ने कहा था, ''1971 में हमारा रुख़ सिद्धांत से जुड़ा था. हम भारत के फ़ायदे के लिए स्वतंत्र देश नहीं चाहते थे. हम चाहते थे कि पाकिस्तानी हमें मताधिकार देने के लिए मजबूर हों. अगर यह संभव नहीं होता तो कई देशों ने गुर्रिल्ला युद्ध के ज़रिए आज़ादी हासिल की है."

शफ़ीक़ुर रहमान ने कहा था, "अगर हमें किसी के ज़रिए या किसी के पक्ष में आज़ादी मिलती तो यह एक बोझ हटाकर दूसरे बोझ के तले दबने की तरह होता. पिछले 53 सालों से बांग्लादेश के लिए क्या यह सच नहीं हुआ है? हमें यह क्यों सुनने के लिए मिलना चाहिए कि कोई ख़ास देश किसी ख़ास पार्टी को पसंद नहीं करता है. कोई ख़ास देश अगर नहीं चाहता है तो कोई ख़ास पार्टी सत्ता में नहीं आ पाती है. क्या स्वतंत्र देश का यही तेवर होता है? बांग्लादेश के युवा अब ये सब सुनना नहीं पसंद करते हैं.''

बांग्लादेश से शेख़ हसीना की बेदख़ली के बाद पाकिस्तान से भी क़रीबी बढ़ने की बात कही जा रही है. पिछले साल दिसंबर महीने में पाकिस्तान का एक मालवाहक पोत कराची से बांग्लादेश के दक्षिण-पूर्वी तट पर स्थित चटगांव बंदरगाह पर पहुँचा था.

1971 में बांग्लादेश मुक्ति युद्ध के बाद से दोनों देशों के बीच यह पहला समुद्री संपर्क हुआ था. इससे पहले दोनों देशों के बीच समुद्री व्यापार सिंगापुर या कोलंबो के ज़रिए होता था. यह पाकिस्तान के साथ क़रीबी बढ़ने की ठोस शुरुआत के रूप में देखा गया. इसके बाद बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच कई उच्चस्तरीय दौरे भी हुए.

पिछले साल सोशल मीडिया पर इस बात की काफ़ी चर्चा थी कि बांग्लादेश लालमोनिरहाट में चीन के सहयोग से बने एक पुराने एयरबेस को फिर से ऑपरेशनल बना रहा है.

यह भारत की सीमा से महज 12-15 किलोमीटर दूर है और सिलीगुड़ी कॉरिडोर से लगभग 135 किलोमीटर. अगले साल की शुरुआत में बांग्लादेश में आम चुनाव है और यहां भारत अहम मुद्दा है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.