कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो करने जा रहे हैं प्रेस कॉन्फ़्रेंस, इस्तीफ़े की अटकलें तेज़

जस्टिन ट्रूडो की तस्वीर

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इमेज कैप्शन, जस्टिन ट्रूडो साल 2015 से कनाडा के प्रधानमंत्री हैं.
    • Author, अंशुल सिंह
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो बीते कुछ महीनों से घरेलू राजनीति से लेकर विदेशी मोर्चे पर कई चुनौतियों से जूझ रहे हैं.

चुनौतियों के बीच अब जस्टिन ट्रूडो के बारे में ख़बर है कि वो जल्द ही प्रधानमंत्री के पद से इस्तीफ़ा दे सकते हैं. जस्टिन ट्रूडो प्रेस कॉन्फ़्रेंस करने जा रहे हैं और इससे उनके इस्तीफ़े की अटकलें और तेज़ हो गई हैं.

बीते रविवार को कनाडा के अख़बार 'द ग्लोब एंड मेल' ने अपनी वेबसाइट पर इस ख़बर को प्रमुखता से छापा है. इसके अलावा समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने भी जस्टिन ट्रूडो के संभावित इस्तीफ़े की बात कही है.

कनाडा में इस साल अक्तूबर के अंत में चुनाव होने हैं. ऐसे में चुनाव से पहले ट्रूडो के संभावित इस्तीफ़े की ख़बर को उनकी लिबरल पार्टी के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है.

ख़ालिस्तान समर्थक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के मुद्दे पर बाद भारत और कनाडा खुलकर एक दूसरे के सामने आ गए थे.

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जस्टिन ट्रूडो, जो बाइडन और नरेंद्र मोदी की तस्वीर

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इमेज कैप्शन, कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के साथ पीएम मोदी के संबंध बहुत सहज नहीं रहे हैं

द ग्लोब एंड मेल की रिपोर्ट में क्या है?

द ग्लोब एंड मेल ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि ट्रूडो के पार्टी में ज़्यादातर नेता उनसे ख़ुश नहीं हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक़, "प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो को पार्टी कॉकस (मीटिंग) में विरोध का सामना करना पड़ रहा है. जनमत सर्वेक्षणों के अनुसार ट्रूडो के नेतृत्व में उनकी पार्टी को विपक्षी पियर पॉलिवेयर की कन्जर्वेटिव पार्टी सत्ता से बाहर कर देगी."

अख़बार ने रिपोर्ट में बताया है कि तीन सूत्रों ने उन्हें यह जानकारी दी है.

रिपोर्ट में आगे लिखा गया है, "सूत्रों ने ज़ोर देकर कहा है कि उन्हें निश्चित रूप से नहीं पता कि ट्रूडो इस्तीफ़ा कब देंगे लेकिन उन्हें उम्मीद है कि बुधवार को होने वाली महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कॉकस से पहले ऐसा हो जाएगा."

ग्लोब एंड मेल ने सूत्रों की पहचान नहीं बताई है क्योंकि अख़बार का कहना है कि सूत्रों को पार्टी के आंतरिक मसलों पर चर्चा करने का अधिकार नहीं है.

ग्लोब एंड मेल की रिपोर्ट के बाद समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने भी संभावित इस्तीफ़े की पुष्टि की है.

सोमवार को रॉयटर्स ने एक सूत्र के हवाले से लिखा, "कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो द्वारा पद छोड़ने की घोषणा करने की संभावना बढ़ती जा रही है, हालांकि उन्होंने अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है."

ग्लोब एंड मेल की रिपोर्ट में कहा गया है कि यह अभी भी स्पष्ट नहीं है कि ट्रूडो तुरंत पद छोड़ देंगे या नए नेता के चुने जाने तक प्रधानमंत्री पद पर बने रहेंगे.

वीडियो कैप्शन, हरदीप सिंह निज्जर की हत्या पर भारत और कनाडा आमने-सामने क्यों आए

संभावित इस्तीफ़े की वजह?

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रॉयटर्स का कहना है कि चुनाव से पहले लगातार निराशाजनक सर्वे सामने आ रहे हैं और इससे चिंतित लिबरल सांसदों की संख्या बढ़ती जा रही है.

इन सांसदों ने ट्रूडो से सावर्जनिक रूप से पद छोड़ने का आग्रह किया है.

बीते साल दिसंबर में उनके पद छोड़ने की मांग में तेज़ी हो गई थी. तब ट्रूडो अपने सबसे क़रीबी कैबिनेट सहयोगियों में से एक वित्त मंत्री और कनाडा की उप प्रधानमंत्री क्रिस्टिया फ़्रीलैंड के सामने आ गए थे.

ट्रूडो और क्रिस्टिया के बीच टकराव की वजह अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति ट्रंप के संभावित टैरिफ़ पर मतभेद थे.

ट्रूडो ने उनकी राजनीतिक ताक़त को कम करने करने की कोशिश की लेकिन क्रिस्टिया ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया.

इस इस्तीफ़े को ट्रूडो के लिए एक अप्रत्याशित झटका माना गया क्योंकि ट्रूडो कनाडा में अल्पमत की सरकार चला रहे हैं.

क्रिस्टिया फ्रीलैंड ने एक पत्र लिखकर ट्रूडो पर देश के हित पर ध्यान देने के बजाय "राजनीतिक नौटंकी" करने का आरोप लगाया था.

इससे इतर इस्तीफ़े की सबसे प्रमुख वजह सर्वेक्षणों में लगातार ट्रूडो का पिछड़ना है.

नैनोस रिसर्च कनाडा स्थित एक पब्लिक ओपिनियन और रिसर्च कंपनी है. 31 दिसंबर को इस कंपनी ने कनाडा की राजनीति से जुड़ा एक सर्वे प्रकाशित किया था.

सर्वे में कहा गया है कि सर्वे में हिस्सा लेने वाले 50 फ़ीसदी से ज़्यादा लोग कंजर्वेटिव पार्टी के साथ हैं और प्रधानमंत्री के लिए उनकी पहली पसंद पियर पॉलिवेयर हैं.

40 फ़ीसद लोग मानते हैं कि पियर पॉलिवेयर को प्रधानमंत्री बनना चाहिए जबकि 17.4 फ़ीसद लोगों का कहना है कि ट्रूडो को प्रधानमंत्री बने रहना चाहिए.

सर्वे के मुताबिक़, "कनाडा की कंजर्वेटिव पार्टी ताज़ा सर्वे में लिबरल्स से 26 अंकों से आगे चल रही है जो कि अब तक कि सबसे बड़ी बढ़त है. यह ट्रूडो के पद छोड़ने की मांग के साथ हुआ है. नौकरियों और अर्थव्यवस्था पर चिंता भी चार साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है."

हाल ही में हुए इप्सोस पोल में भी ट्रूडो की लोकप्रियता में गिरावट देखी गई है.

पोल के मुताबिक़, 73 फ़ीसद लोग मानते हैं कि ट्रूडो को इस्तीफ़ा देना चाहिए और लिबरल्स को नया नेता चुनना चाहिए. जबकि 27 फ़ीसद लोग ट्रूडो के साथ हैं.

दिसंबर के आख़िर में एंगस रीड इंस्टीट्यूट (एआरआई) के सर्वेक्षण में दिखाया गया कि लिबरल पार्टी का समर्थन ऐतिहासिक रूप से सबसे कम होकर मात्र 16 फ़ीसद रह गया है. यह लिबरल पार्टी के लिए चौंकाने वाली गिरावट है.

सितंबर 2024 में कनाडा में उपचुनाव हुए थे. जो टोरंटो की सीट 30 सालों से ट्रूडो की पार्टी के पास थी, उस पर विपक्षी पार्टी की जीत हुई. मॉन्ट्रियाल, जो लिबरल्स का मज़बूत गढ़ माना जाता है, वहां भी उनकी हार लिए बड़ा झटका था.

जस्टिन ट्रूडो और नरेंद्र मोदी की तस्वीर

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इमेज कैप्शन, ट्रूडो आख़िरी बार सितंबर 2023 में जी-20 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत आए थे.

ट्रूडो के दौर में भारत-कनाडा के रिश्ते

साल 2023 में कनाडाई नागरिक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या हुई और कनाडा ने इस हत्या के लिए भारत को ज़िम्मेदार ठहराया. हालांकि भारत ने कनाडा के आरोपों को सिरे से ख़ारिज कर दिया था लेकिन इसके बाद एक दोनों देशों ने अपने राजनयिक वापस बुला लिए थे.

निज्जर की हत्या के मामले में कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने आरोप लगाया था कि इस हत्या में भारतीय एजेंटों के शामिल होने के सुबूत हैं लेकिन भारत सरकार ने जांच में सहयोग से इनकार किया है.

भारत के विदेश मंत्रालय ने तब कहा था, "भारत सरकार इन बेतुके आरोपों को सिरे से नकारती है. कनाडा की ट्रूडो सरकार वोट बैंक साधने के लिए ऐसा कर रही है.''

भारत, कनाडा से ऐसे लोगों पर कार्रवाई की बात कहता रहा है लेकिन कनाडा ने भारत की आपत्ति को लगातार अनसुना कर दिया था.

साल 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिर्फ़ एक बार कनाडा (अप्रैल 2015) की यात्रा की है. साल 1973 के बाद यह पहली किसी भारतीय प्रधानमंत्री की कनाडा यात्रा थी. 2015 के अंत में जस्टिन ट्रूडो प्रधानमंत्री बने और तब से लेकर अब तक पीएम मोदी कनाडा नहीं गए.

हालांकि, जस्टिन ट्रूडो अब तक कम से कम दो बार भारत आ चुके हैं. पहली बार फ़रवरी 2018 में राजकीय यात्रा के लिए और दूसरी बार सितंबर 2023 में जी-20 शिखर सम्मेलन के लिए.

2018 में जस्टिन ट्रूडो का भारत दौरा दोनों देशों के बीच तनाव की एक बड़ी वजह बन गया था.

तब भारत में कनाडा दूतावास ने 'खालिस्तान समर्थक' जसपाल अटवाल को ट्रूडो के साथ डिनर के लिए आमंत्रित किया था. मामला बढ़ने पर दिल्ली के कार्यक्रम के लिए अटवाल का निमंत्रण रद्द कर दिया था.

जसपाल अटवाल एक सिख अलगाववादी थे और प्रतिबंधित संगठन इंटरनेशनल सिख यूथ फ़ेडरेशन से जुड़े रहे हैं. साल 1986 में वैंकूवर (कनाडा) में पंजाब के मंत्री मलकियत सिंह सिद्धू की हत्या की कोशिश के लिए अटवाल को कोर्ट ने कसूरवार ठहराया था.

विवाद से पहले ट्रूडो का भारत में ठंडा स्वागत हुआ. ट्रूडो भारत में अलग-अलग जगहों पर गए लेकिन ऐसा लग रहा था कि प्रधानमंत्री मोदी उन्हें समय नहीं देना चाहते थे. यात्रा के आख़िर में मोदी ट्रूडो से मिले और इस दौरान उन्होंने एक अहम बात कही.

मोदी ने कहा, "संप्रदाय का राजनीतिक उद्देश्य के लिए उपयोग करने वालों और बंटवारे की खाई खोदने वालों के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए."

कुल मिलाकर ट्रूडो की यह राजकीय यात्रा 'कूटनीतिक आपदा' में बदल गई थी.

मौजूदा वक़्त में दोनों देशों के बीच जिस दौर से गुजर रहे हैं उसमें रिश्ते सामान्य होने की कोई संभावना दूर-दूर तक नहीं दिखाई देती है.

जस्टिन ट्रूडो की तस्वीर

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इमेज कैप्शन, विपक्षी दल कनाडा में आम चुनाव समय से पहले कराना चाहते हैं

कौन ले सकता है ट्रूडो की जगह?

अगर जस्टिन ट्रूडो प्रधानमंत्री के पद से इस्तीफ़ा देते हैं तो उनकी जगह कौन लेगा? लिबरल पार्टी में कुछ ऐसा नेता हैं जिन्हें संभावित तौर पर ट्रूडो का विकल्प माना जा रहा है.

क्रिस्टिया फ़्रीलैंड: पूर्व वित्त मंत्री क्रिस्टिया फ़्रीलैंड एक हाइ-प्रोफ़ाइल और चर्चित चेहरा हैं. आर्थिक मामलों की जानकार फ़्रीलैंड साल 2013 से कनाडा की संसद का हिस्सा हैं. 2015 के चुनाव में जीत दर्ज करने के बाद उन्हें पहली बार कैबिनेट में शामिल किया गया था. 2020 में उन्हें वित्त मंत्री बनाया गया था और वो साल 2024 तक इस पद पर रहीं.

डोमिनिक लेब्लांक: क्रिस्टिया फ़्रीलैंड के इस्तीफ़ा देने के बाद डोमिनिक लेब्लांक को कनाडा सरकार में वित्त मंत्री बनाया गया था. पेशे से वकील लेब्लांक वित्त मंत्री के साथ अंतर-सरकारी मामलों के भी मंत्री हैं. डोमिनिक लेब्लांक पूर्व गवर्नर जनरल रोमियो लेब्लांक के बेटे हैं और उन्होंने 2008 में लिबरल पार्टी के नेतृत्व के लिए दौड़ में शामिल थे.

सीन फ्रेज़र: एक कनाडाई राजनेता जिन्होंने साल 2015 से साल 2024 तक कनाडा ट्रूडो के मंत्रिमंडल में कई कैबनिट पदों पर काम किया है. जुलाई 2023 से लेकर दिसंबर 2024 तक फ्रेज़र आवास, बुनियादी ढांचा और समुदाय मंत्री थे. इससे पहले उन्होंने आप्रवासन, शरणार्थी और नागरिकता मंत्री के रूप में काम किया था.

मार्क कॉर्नी: बैंक ऑफ कनाडा और बैंक ऑफ इंग्लैंड के पूर्व गवर्नर, मार्क कॉर्नी को उनके वित्तीय कौशल के लिए जाना जाता है. उनके पास सक्रिय और निर्वाचित राजनीतिक अनुभव का अभाव है लेकिन कॉर्नी की वैश्विक आर्थिक मामलों की समझ साख और प्रतिष्ठा उन्हें एक संभावित उम्मीदवार बनाती है.

क्रिस्टी क्लार्क: क्रिस्टीना जोन क्लार्क साल 2011 से 2017 तक कनाडाई राज्य ब्रिटिश कोलंबिया की 35वीं प्रीमियर रह चुकी हैं. क्लार्क 1991 में रीटा जॉनस्टन के बाद ब्रिटिश कोलंबिया की प्रीमियर बनने वाली दूसरी महिला थीं. उन्होंने 2005 में राजनीति छोड़ दी थी और एक रेडियो टॉक शो की होस्ट बन गईं. इसके बाद साल 2010 के आख़िर में उन्होंने राजनीति में वापसी की और अगले साल ब्रिटिश कोलंबिया की प्रीमियर बनीं.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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