नेपाल: भूस्खलन के बाद बस नदी में बह गई, हादसे में जीवित बचे लोगों ने क्या बताया

नेपाल में दुर्घटना

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    • Author, ईश्वर जोशी
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, नारायणगढ़ (नेपाल) से

नेपाल में भूस्खलन के कारण दो बसें त्रिशूली नदी में गिरकर बह गईं हैं, जिसमें कई लोगों के बह जाने की आशंका है.

भूस्खलन की घटना नारायणगढ-मुग्लिन सड़क मार्ग पर हुई है.

चितवन के मुख्य ज़िला अधिकारी इंद्रदेव यादव के मुताबिक़, शुक्रवार को तड़के 3.30 बजे दो बसें त्रिशूली नदी में गिर गईं. उन्होंने कहा कि एक बस बीरगंज से काठमांडू और दूसरी बस काठमांडू से गौर जा रही थी.

चितवन के उप मुख्य ज़िला अधिकारी चिरंजीवी शर्मा ने बीबीसी नेपाली सेवा को बताया कि बीरगंज से काठमांडू जा रही बस में कम से कम 21 लोग और काठमांडू से गौर जा रही बस में 41 यात्री सवार थे.

उनके अनुसार, सुरक्षा एजेंसी ने कहा है कि एक बस नदी में मिल गई है, लेकिन लापता यात्रियों का पता नहीं लग पाया है.

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अधिकारियों का कहना है कि त्रिशूली नदी का बहाव तेज़ होने के कारण राहत और बचाव कार्य में बाधा आ रही है.

प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहाल 'प्रचंड' ने इस दुर्घटना पर खेद व्यक्त किया है.

शुक्रवार की सुबह उन्होंने फ़ेसबुक पोस्ट में लिखा, "लापता लोगों को तलाश करने और बचाव कार्य के लिए मैंने गृह मंत्रालय समेत सभी सरकारी एजेंसियों को निर्देश दिए हैं."

उन्होंने संघीय, प्रांतीय और स्थानीय प्रशासन से सहयोग और तालमेल करने की अपील की है.

'नदी में डूबकर 5-6 ग्लास पानी पिया'

नेपाल बस हादसा

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स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक़, नेपाल में बस हादसे में कम से कम तीन लोग जीवित बचे हैं.

अधिकारियों ने बताया कि चितवन के सिमलताल में हुई बस दुर्घटना में तीन लोग बच गये.

बीबीसी नेपाली सेवा ने इस हादसे में जीवित जोगेश्वर राय और नंदन दास से बात की है.

जोगेश्वर राय के मुताबिक़, वो काठमांडू में इलाज के बाद घर लौट रहे थे. जिस बस पर वाहन पर वह सवार थे, वह अचानक हिली और चार बार पलटी खाकर नदी में गिर गई.

उन्होंने बीबीसी को बताया, "उसके बाद मैं भी डूब गया. मैंने पाँच या छह गिलास पानी पिया."

जोगेश्वर राय ने बताया, "मैं किसी तरह वहाँ से निकला और तैरकर किनारे पर आ गया. फिर वहाँ से सड़क पर आया, जहाँ अधेरा पसरा हुआ था."

राय के मुताबिक़, उनके साथ उनके बेटे, बेटी, पोता और पोती भी बस में सवार थे.

उनका कहना है, "बस में एक बेटा, एक बड़ी बेटी, एक पोता और एक पोती थी. उन पाँचों में से मैं अकेला हूँ जो बच गया."

बस हादसे में घायल हुए लोगों के मुताबिक़, पुलिस ने उन्हें गाड़ी से अस्पताल पहुँचाया.

'हमने सोचा कि हम मरने वाले हैं'

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हादसे से बचने वाले एक एक अन्य व्यक्ति रौतहट के नंदन दास हैं. उनके मुताबिक़, मुगलिन में खाना खाने के बाद बस आगे बढ़ी और डेढ़ घंटे बाद यह हादसा हुआ.

उन्होंने बताया कि ऊपर से भूस्खलन हुआ और बस पलट कर नदी में पहुंच गयी. नदी में वो बस की खिड़की से बाहर निकले और तैरकर किनारे पर आ गए.

उन्होंने बताया, "मैं तैर रहा था क्योंकि भगवान ने मुझे बचा लिया. लेकिन मैं रात को कहाँ तैर रहा था, अंधेरे में मुझे यह भी नहीं पता चल रहा था कि मैं अंदर जा रहा हूं या बाहर आ रहा हूँ. लेकिन मैं किनारे पर पहुंच गया."

उसने बताया कि जब वो तैर रहे थे तो उन्हें एक चट्टान और फिर एक झाड़ी मिली. उन्होंने जंगली घास पकड़ ली और बाहर निकल गए.

नंदन ने इसके बाद पहाड़ी पर चढ़ना शुरू किया और चलते चलते सड़क पर पहुँच गए. वहाँ से उन्हें पुलिस ने दूसरी बस नारायणगढ़ भेजा.

नंदन के मुताबिक़, उन्हें लगा कि बस पलटने से वो मरने वाले हैं. दास ने बताया कि दो लोग एक साथ बाहर आए थे. दूसरा शख़्स उन्हें कुछ देर बाद नदी के बाहर मिला.

नंदन ने बताया कि हालांकि उन्होंने दूसरी बस नहीं देखी, लेकिन जीवित बचे अन्य दोस्त ने उन्हें बताया कि एक और बस भी नदी में गिरी है.

नेपाल में इन दोनों बसों में सवार 60 से अधिक लोगों की तलाश में सुरक्षा एजेंसियों और गोताखोरों को तैनात किया गया है.

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