'ईरानी परमाणु कार्यक्रम नष्ट नहीं हुआ', पेंटागन की लीक हुई रिपोर्ट का दावा, ट्रंप बोले - फ़ेक न्यूज़

पेंटागन की शुरुआती ख़ुफ़िया मूल्यांकन रिपोर्ट के अनुसार, परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी हमलों से ईरान का परमाणु कार्यक्रम नष्ट नहीं हुआ.
बीबीसी के अमेरिकी सहयोगी सीबीएस को पेंटागन की रक्षा ख़ुफ़िया एजेंसी के मूल्यांकन से जुड़े सूत्रों ने बताया कि शनिवार के बम हमलों में ईरान का समृद्ध यूरेनियम भंडार तबाह नहीं हुआ है.
पेंटागन अमेरिका के रक्षा मंत्रालय का मुख्यालय है.
सीएनएन और न्यूयॉर्क टाइम्स जैसे कई बड़े अमेरिकी मीडिया संस्थानों ने भी रक्षा ख़ुफ़िया एजेंसी के हवाले से ये ख़बर दी है.
व्हाइट हाउस का कहना है कि यह आकलन 'पूरी तरह से ग़लत' है और यह राष्ट्रपति ट्रंप को 'नीचा दिखाने का एक प्रयास' है.
मध्य पूर्व के लिए ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ़ ने ईरान पर अमेरिकी हमले के बारे में लीक हुए ख़ुफ़िया आकलन को 'देशद्रोह' बताया है.
बीबीसी ने इस पर रक्षा मंत्रालय से प्रतिक्रिया मांगी है. बीबीसी को मिले जवाब में बताया गया है कि जो इन हमलों को विनाशकारी नहीं बता रहे हैं, वो बस राष्ट्रपति और इस सफल अभियान को कमज़ोर करने की कोशिश कर रहे हैं.
इस दौरान इसराइल और ईरान के बीच युद्धविराम का असर दिख रहा है और दोनों देश इसे स्वीकार कर रहे हैं.
पेंटागन की लीक हुई रिपोर्ट में क्या है?

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पेंटागन की शुरुआती ख़ुफ़िया रिपोर्ट ने अमेरिका के शनिवार को ईरान पर किए गए हमले को लेकर प्रशासन के इस दावे पर सवाल उठाए हैं कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह नष्ट कर दिया गया है.
अमेरिका ने ईरान के तीन परमाणु केंद्रों - फ़ोर्दो, नतांज़ और इस्फ़हान पर ऐसे बमों से हमला किया जो ज़मीन में 61 मीटर तक की गहराई तक जाकर विस्फोट कर सकते हैं.
लेकिन ख़ुफ़िया रिपोर्ट से जुड़े सूत्रों के मुताबिक ईरान के ज़्यादातर सेंट्रीफ़्यूज सुरक्षित हैं और हमला केवल ऊपर की इमारतों तक सीमित रहा.
दो परमाणु ठिकानों के मुख्य दरवाज़े बंद कर दिए गए और कुछ ढांचे नष्ट या क्षतिग्रस्त हुए, लेकिन अधिकतर भूमिगत परमाणु कार्यक्रम सुरक्षित रहे.
सूत्रों ने अमेरिकी मीडिया को बताया कि हमले से ईरान का परमाणु कार्यक्रम कुछ महीनों के लिए ही पीछे चला गया है और इसे फिर से शुरू करने में कितना वक़्त लगेगा. यह इस पर निर्भर करेगा कि ईरान मलबा हटाकर कितनी जल्दी मरम्मत कर पाता है.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हमलों से पहले ईरान ने अपने संवर्धित यूरेनियम का कुछ हिस्सा दूसरी जगह भेज दिया था.
हमले में अमेरिका ने अपने सबसे बड़े बम जीबीयू-57 का इस्तेमाल किया जिसे भूमिगत परमाणु ठिकानों को तबाह करने के लिए कारगर माना जाता है.
हमले के बाद अमेरिकी सेना के शीर्ष अधिकारी जनरल डैन केन ने कहा था कि तीनों ठिकानों को भारी नुक़सान पहुंचा है. सैटेलाइट तस्वीरों में फ़ोर्दो साइट पर दो जगहों के पास छह बड़े गड्ढे दिखे हैं, लेकिन यह साफ़ नहीं है कि अंदरूनी हिस्सों को कितना नुक़सान हुआ.
ईरान के सरकारी टीवी के एक अधिकारी ने बताया था कि ये ठिकाने पहले ही खाली करा लिए गए थे और ईरान को कोई बड़ा नुक़सान नहीं हुआ.
डोनाल्ड ट्रंप ने क्या कहा?

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस रिपोर्ट से संबंधित ख़बरों को 'फ़ेक न्यूज़' बताया है.
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, "सीएनएन और न्यूयॉर्क टाइम्स फ़ेक न्यूज़ फैला रहे हैं. दोनों मिलकर इतिहास के सबसे सफल सैन्य हमलों में से एक को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं. ईरान के परमाणु ठिकाने पूरी तरह तबाह हो चुके हैं! जनता दोनों को यानी न्यूयॉर्क टाइम्स और सीएनएन को जमकर आड़े हाथों ले रही है."
ट्रंप ने इस मामले में ट्रुथ सोशल पर मध्य पूर्व के लिए अमेरिकी के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ़ का बयान भी साझा किया है.
ट्रंप ने स्टीव विटकॉफ़ की फ़ॉक्स न्यूज़ से हुई बातचीत का वीडियो शेयर करते हुए लिखा, "स्टीव विटकॉफ़ का कहना है: हमने फ़ोर्दो ठिकाने पर 12 बंकर बस्टर बम गिराए. इसमें कोई शक नहीं कि बमों ने उसकी सुरक्षा परत को भेद दिया और कोई शक नहीं कि वह ठिकाना पूरी तरह तबाह हो गया. इसलिए जो रिपोर्टें ये कह रही हैं कि हम अपना उद्देश्य पूरा नहीं कर पाए, वो बिल्कुल बेबुनियाद हैं."
स्टीव विटकॉफ़ ने फ़ॉक्स न्यूज़ से कहा, "यह अपमानजनक है, यह देशद्रोह है और इसकी जांच होनी चाहिए. जो भी इसके लिए ज़िम्मेदार है, उसे जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए."
हमारे बमों ने अपना काम पूरी तरह से किया: रक्षा मंत्री
बीबीसी ने इस घटनाक्रम पर रक्षा मंत्रालय से प्रतिक्रिया मांगी है. पेंटागन ने बीबीसी को अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ का बयान दिया है.
बयान के मुताबिक़, "मैंने सब कुछ देखा है, उसके आधार पर कह सकता हूं कि हमारे हमलों ने ईरान की परमाणु हथियार बनाने की क्षमता को पूरी तरह ख़त्म कर दिया है. हमारे बड़े बम हर ठिकाने पर बिल्कुल सही जगह पर लगे और अपना काम पूरी तरह किया. उन बमों का असर अब ईरान में मलबे के पहाड़ के नीचे दबा है. जो भी कहता है कि ये हमले विनाशकारी नहीं थे, वो बस राष्ट्रपति और इस सफल अभियान को कमज़ोर करने की कोशिश कर रहा है."
बीबीसी ने इस रिपोर्टिंग पर अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) से भी प्रतिक्रिया मांगी है.
इस बीच डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर 60 सेकेंड का एक वीडियो पोस्ट किया है जिसमें बी-2 बॉम्बर लड़ाकू विमान आसमान में उड़ते हुए कई बम गिराते दिख रहे हैं. वीडियो में एक गाना बज रहा है जिसमें बार-बार "बॉम्ब ईरान" शब्द दोहराए जा रहे हैं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित













