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छत्तीसगढ़: पुलिस का दावा, कांकेर में सुरक्षाबलों की कार्रवाई में 29 माओवादी मारे गए
- Author, आलोक प्रकाश पुतुल
- पदनाम, रायपुर से, बीबीसी हिंदी के लिए
छत्तीसगढ़ के माओवाद प्रभावित कांकेर में पुलिस ने एक मुठभेड़ में 29 माओवादियों के मारे जाने का दावा किया है.
मुठभेड़ की इस घटना में सुरक्षाबलों के तीन जवान भी घायल हुए हैं. इससे पहले पुलिस ने 18 माओवादियों के मारे जाने का दावा किया था.
पुलिस के अनुसार, कांकेर के छोटेबेटिया इलाके में मंगलवार की दोपहर संदिग्ध माओवादियों के साथ मुठभेड़ हुई.
मुठभेड़ की ये घटना ऐसे समय में हुई है, जब बस्तर में 19 अप्रैल को लोकसभा के लिए मतदान होने हैं और माओवादियों ने चुनाव बहिष्कार की अपील की है.
पुलिस ने एक विज्ञप्ति में कहा है कि कांकेर के छोटेबेटिया इलाके में मंगलवार की दोपहर संदिग्ध माओवादियों के साथ मुठभेड़ हुई. पुलिस का कहना है कि इस मुठभेड़ के बाद मुठभेड़ स्थल से 29 माओवादियों के शव बरामद किए गए हैं.
गृह मंत्री का बयान
छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बलों की कार्रवाई पर गृह मंत्री अमित शाह की ओर से बयान जारी किया गया है.
उन्होंने कहा, "आज छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बलों के ऑपरेशन में बड़ी संख्या में नक्सली मारे गये हैं. इस ऑपरेशन को अपनी जाँबाज़ी से सफल बनाने वाले सभी सुरक्षाकर्मियों को बधाई देता हूँ और जो वीर पुलिसकर्मी घायल हुए हैं, उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूँ."
अमित शाह ने कहा, "नक्सलवाद विकास, शांति और युवाओं के उज्ज्वल भविष्य का सबसे बड़ा दुश्मन है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में हम देश को नक्सलवाद के दंश से मुक्त करने के लिए संकल्पित हैं."
"सरकार की ऑफ़ेंसिव नीति और सुरक्षा बलों के प्रयासों के कारण आज नक्सलवाद सिमट कर एक छोटे से क्षेत्र में रह गया है. जल्द ही छत्तीसगढ़ और पूरा देश पूर्णतः नक्सल मुक्त होगा."
पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी ने क्या बताया?
पुलिस का कहना है कि मुठभेड़ में मारे जाने वालों में शंकर राव और ललिता माड़वी डीवीसी रैंक के नक्सली लीडर थे, जिन पर 25-25 लाख रुपये का इनाम घोषित था. पुलिस ने मौके से चार ऑटोमेटिक हथियार भी जब्त करने का दावा किया है.
इससे पहले बस्तर के आईजी पुलिस सुंदरराज पी ने कहा था कि कांकेर के छोटेबेटिया में मुठभेड़ स्थल से 18 नक्सलियों के शव बरामद हुए हैं. काफी बड़ी मात्रा में एके 47 समेत कई हथियार मिले हैं.
घटना के बारे में विस्तार से बात करते हुए आईजी पी सुंदरराज ने कहा, "माओवादियों और सुरक्षाबलों के बीच में मुठभेड़ हुई है. हमने अब तक 29 माओवादियों के शव बरामद कर लिए हैं. एनसास, कार्बाइन और एके 47 जैसे हथियार भी बड़ी संख्या में बरामद किए गए हैं."
मुठभेड़ में घायल हुए तीन पुलिसकर्मियों की हालत अब ठीक बताई जा रही है.
वहीं सीमा सुरक्षा बल के डीआईजी आलोक सिंह ने कहा है कि हमने हमले का तरीक़ा बदला, इसलिए इतनी बड़ी सफलता मिली.
पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि यह सीमा सुरक्षाबल यानी बीएसएफ का काफी बड़ा इटेलिजेंस बेस ऑपरेशन था. उन्होंने कहा कि डिस्ट्रिक्ट रिज़र्व गार्ड और बीएसएफ़ की टीम पिछले दो दिनों से इस ऑपरेशन में जुटी हुई थी.
आलोक सिंह ने कहा कि इस ऑपरेशन के लिए हमने ख़ासतौर पर अपनी रणनीति बदली हमने माओवादियों पर जिस तरफ़ से हमला किया, उसके बारे में माओवादी सोच भी नहीं सकते थे.
डीआईजी आलोक सिंह ने कहा कि इस हमले में 29 माओवादियों के मारे जाने के अलावा बड़ी संख्या में वे घायल भी हुए हैं. घायल माओवादियों की तलाश के लिए भी जल्दी ही ऑपरेशन चलाया जाएगा.
छत्तीसगढ़ के सीएम की प्रतिक्रिया
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कांकेर जिले में हुई नक्सल मुठभेड़ को ऐतिहासिक सफलता कहा है. उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के नक्सल मामलों के इतिहास की यह सबसे बड़ी सफलता है.
मुख्यमंत्री ने अपने बयान में कहा कि माओवादी लोकतंत्र में आस्था नहीं रखते और हर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को हिंसात्मक गतिविधि से प्रभावित करते हैं. इस मामले में भी ऐसा लगता है कि माओवादी चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश में थे.
विष्णुदेव साय ने कहा कि मुठभेड़ का क्षेत्र बस्तर और कांकेर दोनों लोकसभा क्षेत्र के नजदीक है. बस्तर में तो दो दिन बाद ही चुनाव है. इससे पहले भी माओवादी बस्तर में चुनाव बहिष्कार का और अन्य तरह से चुनावी संभावनाओं को प्रभावित करने का कुचक्र रचते रहे हैं. इस बार भी वे बड़ी वारदात को कोशिश में थे जिसे सीमा सुरक्षा बलों और पुलिस ने नाकाम कर दिया है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार माओवादी आतंकवाद से प्रभावित क्षेत्र में नियद नेल्लानार आदि योजनाओं के ज़रिये विकास सुनिश्चित करते हुए, आलोकतांत्रिक हिंसा के विरुद्ध कड़ाई से निपटने के सिद्धांत के साथ, इस समस्या के उन्मूलन के लिए प्रतिबद्ध है. जैसा कि भारत के माननीय गृह मंत्री जी ने आह्वान किया था, हमारी प्राथमिकता बस्तर को नक्सल मुक्त करने की है.
मुख्यमंत्री ने कहा, "निश्चित ही बस्तर में शांति बहाली की दृष्टि से यह बड़ी सफलता है, हालांकि सरकार यह चाहती है कि खून-खराबे का यह खेल बंद हो. हम फिर से माओवादियों से यह कहना चाहते हैं कि वे हिंसा का रास्ता छोड़ें, विकास की मुख्यधारा में शामिल हों. उनके आतंक और हिंसा से कोई समाधान नहीं निकालने वाला है."
नक्सली विरोधी ऑपरेशन
पुलिस की इस कार्रवाई को इस इलाके के सबसे बड़े नक्सल विरोधी अभियानों में से एक के रूप में देखा जा सकता है.
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वरिष्ठ नक्सली शंकर, ललिता, राजू की मौजूदगी की सूचना के बाद ऑपरेशन चलाया गया.
छत्तीसगढ़ में इस महीने की शुरुआत में ही, तीन अप्रैल को बीजापुर में पुलिस ने 13 माओवादियों को मुठभेड़ में मारने का दावा किया था.
इसके बाद छह अप्रैल को बीजापुर के ही पुजारी कांकेर में पुलिस ने तीन माओवादी मारे गए थे.
अकेले बस्तर में इस साल जनवरी से अब तक 50 से अधिक माओवादी मारे जा चुके हैं.
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्य विधानसभा के स्पीकर रमन सिंह ने इसे माओवाद के ख़िलाफ़ इतिहासिक सफलता बताया है.
उन्होंने कहा, "मैं इसे छत्तीसगढ़ और देश के इतिहास का सबसे बड़ी घटना मानता हूँ. नक्सली हिंसा की समाप्ति की दिशा में ये एक बड़ा क़दम है."
इतनी बड़ी संख्या में माओवादियों के मारे जाने की घटना को राज्य सरकार एक बड़ी सफलता की तरह देख रही है.
सत्ता में आने के बाद से ही माओवादियों के साथ शांति वार्ता की पेशकश करने वाले राज्य के गृहमंत्री विजय शर्मा ने इसे बस्तर पुलिस का नक्सलवाद पर सर्जिकल स्ट्राइक बताया है.
अपने एक्स हैंडल पर उन्होंने लिखा, "छत्तीसगढ़ के इतिहास में आज की तारीख याद रखी जाएगी, जब हमारे सुरक्षा बल के जवानों ने कांकेर जिले के हापाटोला के जंगल में नक्सलियों की मांद में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक करते हुए जबरदस्त मुठभेड़ में करीब 29 नक्सलियों को मार गिराया."
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