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रक्षा खडसे: 23 साल की उम्र में सरपंच बनने से मोदी सरकार में मंत्री बनने तक का सफ़र
अठारहवीं लोकसभा के लिए हुए चुनाव में एनडीए के बहुमत का आंकड़ा पार करने के बाद नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लगातार तीसरी बार सरकार बनी है.
बीजेपी की अगुआई वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह 9 जून, 2024 को आयोजित किया गया था.
नरेंद्र मोदी की मंत्रिपरिषद में कुल 71 लोगों को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई है.
मंत्रिपरिषद में राज्य मंत्री के तौर पर शपथ लेने वाली रक्षा खडसे को मोदी सरकार की सबसे युवा महिला मंत्री के तौर पर देखा जा रहा है.
रक्षा खडसे को युवा कल्याण एवं खेल विभाग के राज्य मंत्री का प्रभार दिया गया है.
मोदी की नई कैबिनेट में महाराष्ट्र से नितिन गडकरी, पीयूष गोयल, रामदास अठावले, रक्षा खडसे, प्रतापराव जाधव और मुरलीधर मोहोल को शामिल किया गया है.
रक्षा खडसे महाराष्ट्र से एकमात्र महिला मंत्री होंगी. वह लगातार तीसरी बार लोकसभा के लिए चुनी गई हैं.
राजनीति की शुरुआत
रावेर के स्थानीय लोगों का कहना है कि रक्षा खडसे शादी के बाद ही राजनीति में आ गई थीं. उन्हें उनके ससुर एकनाथ खडसे राजनीति में लेकर आए.
उनका पहला राजनीतिक पद मुक्ताईनगर तालुका के कोथली गांव के सरपंच का था. कोथली खडसे परिवार का गांव है.
वह 2010 में कोथली गांव की सरपंच बनीं. तब से वह बीजेपी में सक्रिय हैं.
इसके बाद वह 2010-2012 के दौरान जलगांव ज़िला परिषद की सदस्य रहीं और इस दौरान वह ज़िला परिषद अध्यक्ष भी रहीं.
साल 2014 में उन्हें पहली बार रावेर लोकसभा क्षेत्र से बीजेपी से टिकट मिला.
जब रक्षा खडसे पहली बार सांसद बनीं तो उनकी उम्र केवल 26 साल थी.
साल 2014 में उन्होंने एनसीपी उम्मीदवार मनीष जैन को करीब साढ़े तीन लाख वोटों से हराया और 2019 के चुनाव में भी उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार उल्हास पाटिल को सवा तीन लाख वोटों से हराया.
गुर्जर पाटिल-लेवा पाटिल फ़ैक्टर
रावेर उन दो सीटों में से एक है जिसे भाजपा उत्तरी महाराष्ट्र में बरकरार रखने में कामयाब रही है.
रावेर निर्वाचन क्षेत्र लेवा-पाटिल और गुर्जर-पाटिल जाति बहुल है.
रक्षा खडसे खुद गुर्जर समुदाय से आती हैं जबकि उनके ससुर खडसे परिवार लेवा-पाटिल समुदाय से हैं.
चर्चा थी कि रक्षा खडसे के ख़िलाफ़ उन्हीं की ननद रोहिणी खडसे को शरद पवार गुट टिकट देगा.
लेकिन आख़िरकार एनसीपी (शरद पवार गुट) से मराठा समुदाय के श्रीराम पाटिल की उम्मीदवारी की घोषणा की गई.
एकनाथ खडसे ने एनसीपी (शरद पवार गुट) से इस्तीफ़ा देकर बहू के प्रचार की ज़िम्मेदारी ली तो कहा गया कि उन्हें इन दोनों जातियों का एकजुट वोट मिला.
'वापसी का रास्ता'
लेकिन रक्षा खडसे के लिए 2024 का टिकट पाना आसान नहीं था. 2020 में एकनाथ खडसे अपनी नाराज़गी के चलते अपनी बेटी रोहिणी खडसे के साथ एनसीपी में शामिल हो गए.
लेकिन रक्षा खडसे बीजेपी में ही रहीं.
महाराष्ट्र टाइम्स के नासिक संस्करण के स्थानीय संपादक शैलेन्द्र तनपुरे कहते हैं, "रक्षा खडसे के रूप में एकनाथ खडसे ने भाजपा में वापसी का एक सूत्र छोड़ा."
हालांकि, जलगांव के जानकारों का कहना है कि रक्षा खडसे की उम्मीदवारी को लेकर अंदरूनी विरोध था.
ज़िले के एक वरिष्ठ पत्रकार के मुताबिक़, "गिरीश महाजन और देवेंद्र फडणवीस शुरू से ही रक्षा खडसे की उम्मीदवारी के ख़िलाफ़ थे. गिरीश महाजन ने यह भी कहा था कि यह कहना असंभव है कि उम्मीदवार कौन होगा. लेकिन शायद उनकी वफ़ादारी से उन्हें फायदा हुआ है. भले ही ससुर और ननद दूसरी पार्टियों में चले गए, लेकिन वे भाजपा में ही बनी रहीं. उन्होंने निर्वाचन क्षेत्र में भी अच्छा काम किया."
चुनाव से पहले एकनाथ खडसे द्वारा अपनी ही बहू के ख़िलाफ़ संभावित उम्मीदवारी को ख़ारिज करने की चर्चा अभी भी रावेर निर्वाचन क्षेत्र में सुनी जा रही है.
इतना ही नहीं, रक्षा खडसे की उम्मीदवारी की घोषणा के बाद उन्होंने एनसीपी के शरद पवार गुट से इस्तीफ़ा दे दिया और बहू के लिए प्रचार किया.
तनपुरे कहते हैं, "तब एकनाथ खडसे के बीजेपी में आने की चर्चाएं ज़ोरों पर थी. उन्होंने यह भी घोषणा की थी कि वह भाजपा में शामिल होंगे, लेकिन शायद गिरीश महाजन और देवेंद्र फडणवीस के बीच आंतरिक संघर्ष के कारण वह चुनाव से पहले शामिल नहीं हुए."
हालांकि, मीडिया से बात करते हुए एकनाथ खडसे ने कहा, "जब रक्षा को मंत्री पद की शपथ दिलाने के लिए दिल्ली से फोन आया तो मैं अपने आंसू नहीं रोक सका. उन्हें भाजपा में उनके काम और पार्टी के प्रति उनकी वफ़ादारी के लिए शपथ ग्रहण समारोह में आमंत्रित किया गया है."
रक्षा खडसे महाराष्ट्र के खानदेश क्षेत्र से केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होने वाली पहली महिला मंत्री हैं.
एकनाथ खडसे की राजनीतिक उत्तराधिकारी
रक्षा खडसे को मुख्य रूप से एकनाथ खडसे की राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में देखा जाता है.
इस बारे में बात करते हुए तनपुरे कहते हैं, "एकनाथ खडसे के बेटे और रक्षा खडसे के पति निखिल का 2012 में निधन हो गया. उनकी (एकनाथ खडसे) बेटियां देर से राजनीति में आईं. लेकिन रक्षा खडसे एकनाथ खडसे के साथ 22-23 साल की उम्र से ही राजनीति में सक्रिय हैं."
"अब उनके पास केंद्रीय राजनीति का अनुभव है, यही वजह है कि उन्हें एकनाथ खडसे की राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में देखा जाता है."
निजी जीवन
रक्षा खडसे नंदूरबार ज़िले के शाहदा तालुका के खेडदीगर गांव के एक किसान परिवार से हैं. वह गुर्जर-पाटिल समुदाय से आती हैं.
उनकी शादी एकनाथ खडसे के बेटे निखिल से हुई थी. साल 2012 में निखिल खडसे की मृत्यु हो गई.
रक्षा खडसे के दो बच्चे कृषिका और गुरुनाथ हैं. रक्षा खडसे के रूप में खानदेश यानी उत्तरी महाराष्ट्र को तीसरी बार केंद्र में मंत्री पद मिल रहा है.
इससे पहले कांग्रेस सांसद विजय नवल को केंद्रीय दूरसंचार मंत्रालय का ज़िम्मा मिला था.
फिर साल 1999 में एरंडोल से तत्कालीन विधायक एमके पाटिल को अटल बिहारी सरकार में राज्य मंत्री का पद मिला.
नरेंद्र मोदी कैबिनेट के पिछले दो कार्यकाल में धुले से चुने गए सुभाष भामरे को राज्य मंत्री का पद मिल चुका है.