मध्य प्रदेश: बजरंग दल कार्यकर्ताओं पर चलाईं लाठियां, 24 घंटे के अंदर पुलिस अफ़सरों का तबादला- प्रेस रिव्यू

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मध्य प्रदेश के इंदौर में विरोध प्रदर्शन कर रहे बजरंग दल के कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज करने वाले दो पुलिस अफ़सरों को इस घटना के 24 घंटों के भीतर फ़ील्ड पोस्टिंग से हटा दिया गया है.
बजरंग दल के कार्यकर्ता गुरुवार रात को इंदौर के व्यस्त पलासिया चौक पर कथित तौर पर अवैध ड्रग माफ़िया के ख़िलाफ़ पर प्रदर्शन कर रहे थे.
द हिंदू में छपी एक ख़बर के अनुसार प्रदेश की सत्ताधारी बीजेपी और विश्व हिंदू परिषद ने पुलिस कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताई थी जिसके बाद डीसीपी धर्मेंन्द सिंह भदौरिया समेत एक और पुलिस अधिकारी को फ़ील्ड पोस्टिंग से हटाया गया है.
अख़बार लिखता है कि बीजेपी के साथ-साथ विपक्षी दल कांग्रेस ने पुलिस के लाठीचार्ज पर सवाल उठाए थे. इस मामले में प्रदेश सरकार ने जांच भी शुरू कर दी है.
अख़बार ने इंदौर के पुलिस कमिश्नर मार्कंड देयोस्कर के हवाले से बताया है कि डीसीपी धर्मेंन्द सिंह भदौरिया को मौजूदा सेवा से मुक्त कर दिया गया है और अब उन्हें रुस्तमजी आर्म्ड पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज में बतौर कमांडेंट नियुक्त किया गया है. वहीं पलासिया पुलिस स्टेशन के ऑफ़िसर-इन-चार्ज रहे पुलिस अधिकारी संजय सिंह बैंस को अब पुलिस लाइन में नियुक्त किया गया है.

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क्या था मामला?
गुरुवार रात इंदौर के पलासिया चौक पर कुछ लोग प्रदर्शन कर रहे थे, इस कारण इस व्यस्त सड़क पर ट्रैफिक जाम लग गया. पुलिस ने यहां से लोगों को हटाने के लिए लाठीचार्ज किया.
धर्मेंन्द सिंह भदौरिया का कहना है कि ये लोग बिना इजाज़त प्रदर्शन करने के लिए यहां एकत्र हुए थे और इस कारण आम लोगों को परेशानी हो रही थी. कई बार गुज़ारिश करने के बाद भी जब ये लोग वहां से नहीं हटे तो पुलिस को 'मामूली ताकत' का इस्तेमाल करना पड़ा.
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. मामला बढ़ा तो राज्य के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने जांच के आदेश दिए.
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने घटना की आलोचना करते हए कहा, "अगर बजरंग दल के हमारे कार्यकर्ता अपनी मांगें रख रहे हैं और आवाज़ उठा रहे हैं तो उन्हें बर्बर तरीके से नहीं पीटा जाना चाहिए था. इसके लिए ज़िम्मेदार अधिकारियों को बख़्शा नहीं जाएगा."
वहीं कर्नाटक में बजरंग दल को बैन करने की बात कर चुकी कांग्रेस के प्रवक्ता पीयूष बबेले ने प्रदेश के मुख्यमंत्री पर निशाना साधा और कहा, "बजरंग दल के कार्यकर्ता अवैध शराब के ठिकानों (पब) का विरोध कर रहे थे. शराब के मामले में शिवराज सिंह समझौता नहीं करते, लेकिन जो अवैध शराब का विरोध करेगा उसे अधमरा कर दिया जाएग."

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स्कूल में अज़ान सुनाने पर टीचर निलंबित
मुंबंई के एक स्कूल में लगे लाउडस्पीकर के कारण उस वक्त हंगामा खड़ा हो गया जब यहां से अज़ान की आवाज़ बाहर तक गूंजने लगी. मामला बढ़ा तो स्कूल ने एक टीचर को सस्पेंड कर दिया.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी एक ख़बर के अनुसार स्कूल के पास मॉर्निंग वॉक पर निकले कुछ लोगों ने अज़ान की 30 संकेड की क्लिप रिकॉर्ड करके ऑनलाइन पोस्ट कर दी.
इसके बाद कपोल विद्यानिधि इंटरनेशनल नाम के इस स्कूल के बाहर कुछ अभिभावक जमा हो गए. कुछ देर में बीजेपी, महाराष्ट्र नव निर्माण सेना और शिव सेना एकनाथ शिंदे गुट से जुड़े कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन करना शुरू कर दिया. मामला बढ़ा तो क़ानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को हरकत में आना पड़ा.
अख़बार लिखता है कि स्कूल के प्रिंसिपल का कहना था कि बच्चों को सभी धर्मों के बारे में बताने के लिए ऐसा किया गया, लेकिन उनकी कोशिशों को ग़लत तरीके से समझा जा रहा है.
लेकिन विरोध कर रहे अभिभावकों का कहना था कि इस मामले में जब तक कोई कार्रवाई नहीं होती वो स्कूल के बाहर धरना देंगे. इसके बाद अज़ान चलने वाले टीचर को निलंबित किया गया और अभिभावकों को शांत करने के लिए एक वैदिक गीत भी चलाया गया.
कांदिवली पुलिस स्टेशन ने इस माममे में अभी एफ़आईआर दर्ज नहीं की है लेकिन जांच का आश्वासन दिया है. डिप्टी कमिश्नर ऑफ़ पुलिस अजय बंसल ने कहा, "कुछ पेरेंन्ट्स ने हमसे शिकायत की है कि शुक्रवार सवेरे की प्रार्थना में स्कूल में अज़ान सुनाई गई थी. हम सभी एंगल से मामले की जांच कर रहे हैं और इस मामले में क़ानूनी कार्रवाई की जाएगी."

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बृजभूषण सिंह मामला: चार्जशीट में पुलिस ने दी तस्वीरें और वीडियो
यौन उत्पीड़न के आरोपों से घिरे भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष और बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह के ख़िलाफ़ कोर्ट में दी गई चार्जशीट में पुलिस ने महिला पहलवानों की छह में चार शिकायतों के मामले में सबूत के तौर पर तस्वीरें और कम से कम तीन मामलों में सबूत के तौर पर वीडियो पेश किए हैं.
द इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक ख़बर के अनुसार गुरुवार को दिल्ली पुलिस ने यौन उत्पीड़न, हिंसा और स्टॉकिंग के आरोपों का सामना कर रहे बृजभूषण सिंह के ख़िलाफ़ 1,500 पन्नों की चार्जशीट दायर की है.
बृजभूषण सिंह के ख़िलाफ़ पॉक्सो क़ानून के तहत लगे आरोपों के मामले में पुलिस ने कैंसलेशन रिपोर्ट फाइल की है. उन पर आरोप लगाने वाली नाबालिग़ पहलवान ने अपने आरोप वापिस ले लिए थे, जिसके बाद पुलिस ने कोर्ट को कैंसलेशन रिपोर्ट सौंपी है.
चार्जशीट में छह महिला पहलवानों के बयानों के साथ-साथ 70 से 80 चश्मदीदों के बयान और सबूत के तौर पर तस्वीरें, वीडियो और कॉल रिकॉर्ड शामिल किए गए हैं. सूत्रों के हवाले से अख़बार लिखता है कि पुलिस का कहना है कि तस्वीरें और वीडियो शिकायतों से जुड़े सबूत के तौर पर दिए गए हैं.
एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि उन्होंने शिकायतकर्ता और आरोपी दोनों की अलग-अलग टूर्नामेंट और खेलों की तस्वीरें सबूत के तौर पर रिपोर्ट में संलग्न की हैं.
उन्होंने कहा, "हमने चार्जशीट में हर शिकायत को अलग-अलग कर के पेश किया है क्योंकि छह महिला पहलवानों ने अपनी शिकायतों में एक नहीं बल्कि कई घटनाओं का ज़िक्र किया है. हमने हम मामले में सबूत के तौर पर चश्मदीदों के बयान, तस्वीरें और वीडियो जोड़े हैं. छह में से चार मामलों में हमने तस्वीरें दी हैं."
"कुछ तस्वीरें और वीडियो पहलवानों ने दिए हैं और कुश्ती महासंघ के दफ्तर, टूर्नामेंट और कैंपों से जुड़ी शिकायतों की जांच में हमें कुछ वीडियो भी मिले हैं जो हमने सबूत के तौर पर पेश किए हैं. अब कोर्ट पर है कि इन मामलों में वो क्या गुनाह तय करती है और क्या सज़ा देती है."

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मणिपुर में नहीं सुधर रहे हालात, ज़रूरी चीज़ों की आपूर्ति पर असर
अख़बार जनसत्ता में छपी एक ख़बर के अनुसार बीते कई दिनों से जातीय हिंसा से जूझ रहे देश के पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में शुक्रवार को भीड़ और रैपिड एक्शन फोर्स के जवानों के बीच झड़प हुई.
भीड़ ने रास्तों पर आगज़नी कर अवरोध पैदा किया और सरकार और लोगों की संपत्ति को भी नुक़सान पहुंचाया.
अख़बार लिखता है कि भीड़ ने केंद्रीय मंत्री आरके रंजन के घर पर हमला कर घर में आग लगाने की कोशिश की. वहीं शाही महल के पास आदिवासी समुदाय से ताल्लुक रखने वाले एक रिटायर्ड आईएएस अधिकारी के गोदाम को आग के हवाले कर दिया.
वहीं मणिपुर के खामेनलोग इलाक़े में नौ लोगों की हत्या के मामले में मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने कहा है कि दोषियों की तलाश अभी जारी है, अपराधियों को बख़्शा नहीं जाएगा.
एक और ख़बर में अख़बार लिखता है कि मणिपुर में एक नेशनल हाईवे और छह दूसरे रास्तों में रुकावट होने के कारण वहां ज़रूरी सामान की कमी हो गई है.
रास्ते बंद होने से राज्य के कई हिस्सों में शिशु आहार और दवाओं की कमी हो गई है, साथ ही सुरक्षाबलों की आवाजाही पर भी असर पड़ रहा है.
अख़बार लिखता है कि आदिवासियों ने राज्य को देश के दूसरे हिस्सों से जोड़ने वाले नेशनल हाईवे को और महिलाओं के नेतृत्व वाले समूहों ने कम से कम छह और सड़कों को बंद कर रखा है.
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