इंडियाज़ गॉट लेटेंट: कंटेंट, कंट्रोवर्सी और कानूनी शिकंजे में रणवीर इलाहाबादिया, समय रैना

रणवीर इलाहाबादिया

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इमेज कैप्शन, रणवीर इलाहाबादिया और समय रैना
    • Author, अभिनव गोयल
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

यूट्यूबर और कॉमेडियन समय रैना के शो 'इंडियाज गॉट लेटेंट' को लेकर विवाद नहीं थम रहा है.

हाल ही में रिलीज हुए इसके एक एपिसोड में यूट्यूबर रणवीर इलाहाबादिया की टिप्पणी विवाद का केंद्र बनी हुई है.

उन्होंने शो के दौरान एक प्रतिभागी से माता-पिता के निजी संबंधों को लेकर आपत्तिजनक सवाल किया था, जिसकी बड़े पैमाने पर आलोचना हो रही है.

इलाहाबादिया और शो की पूरी टीम के ख़िलाफ़ कई राज्यों में एफ़आईआर तक दर्ज हो गई है. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के यूट्यूब को नोटिस भेजने के बाद इस एपिसोड को हटा दिया गया है.

लाल लकीर

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विवाद बढ़ने के बाद बुधवार, 12 फ़रवरी को समय रैना ने इंस्टाग्राम और एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, "इस मामले में जो भी हो रहा है वो मेरे लिए हैंडल करना मुश्किल साबित हो रहा है. मैंने इंडियाज़ गॉट लेटेंट के सभी वीडियोज़ अपने चैनल से हटा दिए हैं. मेरा एकमात्र उद्देश्य लोगों को हंसाना और उनका मनोरंजन करना था. मैं सभी एजेंसियों से पूरी तरह से सहयोग करूंगा ताकि पूरी निष्पक्षता से जांच पूरी हो सके."

इससे पहले रणवीर इलाहाबादिया ने भी मामले पर माफ़ी मांगी है. उनका कहना है, "मेरा कमेंट सही नहीं था और फनी भी नहीं था. कॉमेडी मेरी विशेषज्ञता नहीं है…मैं बस सभी से माफी मांगना चाहता हूं."

यूट्यूब या सोशल मीडिया पर अश्लीलता और फूहड़पन फैलाने के आरोप सिर्फ 'इंडियाज गॉट लेटेंट' पर नहीं लगे हैं. हाल के सालों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूटा है.

सवाल है कि आखिर इस तरह का कंटेंट बनाने की वजह क्या है? इसका समाज पर क्या असर पड़ता है? और इससे जुड़े नियम कानून क्या हैं?

क्या कहते हैं इस पेशे से जुड़े लोग

'इंडियाज गॉट लेटेंट'

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इमेज कैप्शन, 'इंडियाज गॉट लेटेंट' शो में नजर आए थे रणवीर इलाहाबादिया

स्टैंड अप कॉमेडियन संजय राजौरा रणवीर इलाहाबादिया की टिप्पणी और इंडियाज गॉट लेटेंट' शो के कंटेंट को कॉमेडी नहीं मानते हैं.

बीबीसी से बातचीत में वे कहते हैं, "जो चल रहा है, ये डार्क ह्यूमर भी नहीं है. अगर आप जाति की बात करते हुए ब्राह्मणवाद पर जोक्स बनाएं, या होलोकास्ट का जिक्र करते हुए आप पीड़ितों के पक्ष में खड़े होकर जोक्स बनाएं तो इसे डार्क ह्यूमर ज़रूर कहा जा सकता है, लेकिन जो उस शो में हुआ वो डार्क ह्मूयर भी नहीं है."

राजौरा कहते हैं, "इस तरह का कंटेंट एक बड़ी आबादी के बौद्धिक स्तर को कम कर रहा है. वह आबादी इस तरह के कंटेंट से खुश भी नजर आती है. मुझे आश्चर्य होता है कि लोग इस तरह के शो को देखकर दहाड़ें मारकर हंसते हैं."

हालांकि राजौरा इस मामले में एफआईआर किए जाने का विरोध करते हैं. उनका मानना है कि इस तरह की फूहड़ता बॉलीवुड की कई फिल्मों में परोसी जा रही है, लेकिन वहां इस तरह का विरोध नहीं देखा जाता.

रणवीर इलाहाबादिया

वहीं दूसरी तरफ 'द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज' के पहले सीजन के विजेता सुनील पाल इस तरह का कंटेंट बनाने वाले लोगों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हैं.

बीबीसी से बातचीत में वे कहते हैं, "जो गाली गलौज कर रहे हैं, वे ना तो कलाकार हैं और ना ही कॉमेडियन. लाफ्टर को दुनिया की सबसे बड़ी दवा बताया गया है, लेकिन यहां ये लोग इतनी घटिया बातें कर रहे हैं, जो हम सबके लिए शर्म की बात है."

उनका कहना है, "चार गालियां देकर इस तरह के लोग बड़े-बड़े प्लेटफार्म तक पहुंच जाते हैं. व्यूज और पैसे के लिए नंगेपन पर उतर रहे हैं."

"इनकी वजह से हमारे जैसे कलाकारों के ऊपर बहुत प्रेशर है. हमारे कॉमेडी के शो कम हो गए हैं. निजी तौर पर बहुत बड़ा नुकसान हो रहा है."

शो का फॉर्मेट

कुछ इस तरह की बात व्यंग्यकार आलोक पुराणिक भी करते हैं. उनका भी मानना है कि इस तरह के शो, ज्यादा पैसा कमाने और व्यूज के लालच में बनाए जा रहे हैं.

वे कहते हैं, "समस्या कहीं ज्यादा बड़ी है. पिछले कुछ सालों में स्टैंडअप कॉमेडी का एक सर्किल बन गया है. जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल होता है, वो उस सर्किल तक स्वीकार्य है, लेकिन जब वह एक बड़े सार्वजनिक प्लेटफॉर्म पर आती है, तो लोगों को हैरानी होती है."

पुराणिक कहते हैं, "तीखी से तीखी बात भद्र भाषा में कही जा सकती है. लोगों को हंसाना और व्यंग्य या जोक बनाना किसी सर्जरी की तरह होता है. एक इंच का कट ऊपर से नीचे हो जाए तो चीजें बदल जाती हैं."

आलोक पुराणिक
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एपिसोड

समाप्त

आलोक पुराणिक की बातों से अलग राय रखते हैं स्टैंड अप कॉमेडियन विशाल जादौन.

वो कहते हैं , कि "देश में राजनीतिक पार्टियों से जुड़े कई लोग सार्वजनिक तौर पर गालियां और नफ़रत फैलाने का काम करते हैं, लेकिन उनके ख़िलाफ कुछ नहीं होता."

जादौन कहते हैं, "समय रैना शो के जिस कंटेंट पर विवाद हो रहा है, वह पैसे देकर ही देखा जा सकता है. इसका मतलब है कि लोग वहां अपनी इच्छा से जा रहे हैं. मैं भी स्टैंडअप के समय गाली गलौज करता हूं, सेक्स, महिलाओं, पीरियड्स और माता-पिता की बात करता हूं."

वे कहते हैं, "ओटीटी बड़ा प्लेटफॉर्म है, उनको टारगेट करना मुश्किल है. हमारे जैसे स्टैंडअप कॉमेडियन को कोई भी कुछ बोल देता है. मैं गंदी और डार्क दोनों बातें करता हूं, लेकिन अगर आपके कंटेंट पर लोग हंस रहे हैं तो फिर लोग आहत नहीं होते."

हालांकि जादौन यह बात भी कहते हैं कि लोग ज्यादा लाइक और वायरल होने के लिए भी इस तरह के कंटेंट को बढ़ावा देते हैं.

वहीं 'भगत राम' नाम का यूट्यूब चैनल वाले रविंद्र चौधरी का मानना है कि इस मामले में एफ़आईआर का होना, आवाज़ों को दबाने जैसा है.

वे कहते हैं, "ये कंटेंट अश्लील श्रेणी में आता है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं की आप एफ़आईआर कर दें. आज कल आहत होने का ट्रेंड काफी ज्यादा है. वे लोग भी आहत हो रहे हैं, जो खुद गाली गलौज करते हैं."

एपिसोड

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इमेज कैप्शन, रणवीर इलाहाबादिया के जिस सवाल पर विवाद हो रहा है, वैसा की सवाल इस एपिसोड में पूछा गया था.

रविंद्र ओजी क्रू यूट्यूब चैनल पर प्रसारित हुए एक एपिसोड का जिक्र करते हैं. उनका कहना है कि रणवीर इलाहाबादिया के सवाल पर इतना विवाद हो रहा है, दरअसल उसे इसी एपिसोड से उठाया गया है.

वे कहते हैं, "इस एपिसोड में 9.48 मिनट पर सैम, एलन से वही सवाल करती हैं, जो रणवीर, इंडिया गॉट लेटेंट में परफॉर्म कर रहे प्रतिभागी से कर रहे हैं."

रविंद्र कहते हैं, "ज्यादातर स्टैंड अप कॉमेडियन दूसरे का कंटेंट उठा रहे हैं, जो भारत के हिसाब से नहीं चल पाता और कभी-कभी बड़े विवाद की वजह बन जाता है."

इसके उलट दो सालों से स्टैंडअप कॉमेडी कर रहे अक्षत कैन कहते हैं, "गालियां कंटेंट में नहीं होती, समाज में होती हैं. इसलिए वो कंटेंट का हिस्सा बन जाती हैं."

वे कहते हैं, "हर चीज की एक सीमा है. जब आर्टिस्ट की उम्र बढ़ती है तो उसमें स्टेबिलिटी आती है, जो उसके कंटेंट में भी झलकती है."

क्या कहता है भारतीय कानून?

भारतीय कानून

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इमेज कैप्शन, अश्लील साम्रगी बनाने और फैलाने पर पांच साल तक की सजा का प्रावधान है.

समय-समय पर सूचना और प्रसारण मंत्रालय अश्लील कंटेंट बनाने वाले सोशल मीडिया अकाउंट्स और प्रसारित करने वाले ओटीटी प्लेटफॉर्म पर कार्रवाई करता है.

मार्च 2024 में मंत्रालय ने अश्लील कंटेंट बनाने और प्रसारित करने वाले 18 ओटीटी प्लेटफॉर्म, 19 वेबसाइट, 10 ऐप और 57 सोशल मीडिया अकाउंट्स को ब्लॉक करवाया था. सोशल मीडिया अकाउंट्स में 12 चैनल यूट्यूब के थे.

यह कार्रवाई करते हुए तत्कालीन सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर का कहना था कि 'क्रिएटिव एक्सप्रेशन' के नाम पर अश्लीलता नहीं फैलाई जा सकती.

उस वक्त यह फैसला सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 के प्रावधानों के तहत लिया गया था.

सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट दिनेश जोतवानी कहते हैं, "फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को सूचना और प्रसारण मंत्रालय के नियमों का पालन करना होता है. मंत्रालय समय-समय पर इन प्लेटफॉर्म को समन जारी करता है, जो उन्हें भारत में मानने पड़ते हैं."

वे कहते हैं, "भारतीय न्याय संहिता की धारा 294 और 296 के तहत अश्लीलता करना और फैलाना अपराध है. धारा 294 में पहली बार अपराध करने पर दो साल तक सज़ा और दूसरी बार करने पर पांच साल तक सज़ा का प्रावधान है. वहीं धारा 296 में तीन महीने तक सज़ा का प्रावधान है. दोनों धाराओं में जुर्माना भी लगाया जाता है."

जोतवानी का कहना है कि आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले रणवीर इलाहाबादिया के साथ-साथ समय रैना और शो प्रोड्यूस करने वाले अन्य लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं, क्योंकि कई राज्यों में उनके ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज करवाई गई है.

वे कहते हैं, "इन धाराओं में बेल तो मिल जाएगी, लेकिन उन्हें ट्रायल पर जाना पड़ेगा. सुप्रीम कोर्ट के पास यह शक्ति है कि वह अलग-अलग राज्यों में दर्ज एफआईआर को कंसोलिडेट कर एक एफआईआर कर सकता है, नहीं तो उन्हें हर राज्य में जाकर बेल लेनी होगी."

जोतवानी का कहना है कि अगर इलेक्ट्रॉनिक रूप में कोई ऐसा कंटेंट प्रकाशित या प्रसारित करता है जो अश्लील हो, तो उसे आईटी एक्ट के सेक्शन 67 के तहत भी बुक किया जा सकता है.

इस धारा के तहत पांच लाख रुपए का जुर्माना और तीन साल की सजा का प्रावधान है.

किस बात की है चिंता?

स्टैंड अप कॉमेडी

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इमेज कैप्शन, हाल के सालों में स्टैंड अप कॉमेडी का चलन बढ़ा है.

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र के प्रोफेसर सुरिंद्र सिंह जोधका का कहना है कि इस तरह के मामले में नैतिक पोजीशन लेना इतना आसान नहीं है.

वे कहते हैं, "इस तरह का कंटेंट हमारे समाज की सच्चाई को बताता है. लाखों की संख्या में लोग उन्हें सुन रहे हैं, जो बताता है कि लोग इस तरह की बातें करते हैं. फर्क यह है कि अब ये सार्वजनिक तौर पर होने लगा है."

जोधका कहते हैं, "सोशल मीडिया ने समाज को बदल दिया है. पहले लोग आपस में मिलकर एक दूसरे से बातें करते थे. अब न्यू लिबरल कैपिटलिज्म आ गया है. हर किसी को अपने से मतलब है. मिडिल क्लास की एंग्जाइटी बढ़ रही है. उसके पास राजनीतिक आंदोलनों और उस तरह की बात के लिए समय नहीं है."

उनका कहना है, "इस कारण जो जगह खाली हुई है, वो इस तरह के कंटेंट ने ले ली है. हर कोई मोबाइल लेकर बैठा है, जिससे उसकी खपत बढ़ रही है."

विवाद के बीच वे एक बड़ी चिंता जाहिर करते हैं. उनका मानना है, "विवाद के बाद समाज में एक ओपिनियन बन जाता है कि सोशल मीडिया को कंट्रोल करना ज़रूरी है, जिससे सत्ता को एक ऐसा मौका मिलता है जिससे वह कानून बना पाती है. इस प्रक्रिया में जिनके पास बहुमत होता है, उनकी नैतिकता हावी हो जाती है और समाज के डेमोक्रेटिक ओपिनियन की जगह नहीं बचती."

जोधका का कहना है कि अगर ये मामला इस दिशा में बढ़ता है तो यह खासकर औरतों के खिलाफ जाएगा, क्योंकि नैतिकता के दायरे में वे सोशल मीडिया पर खुलकर सेक्सुएलिटी की बात नहीं कर पाएंगी और मैरिटल रेप जैसी चीजें, सभ्यता के दायरे को कभी नहीं तोड़ पाएंगी.

वे कहते हैं, "क्या कारण है कि इन चीजों के प्रति लोग इतने आकर्षित हो रहे हैं. एक गंभीर रिसर्च की ज़रूरत है, जिसमें उन लोगों से पूछा जाए कि वे क्यों इस तरह के प्रोग्राम देखते हैं और उन्हें इसमें क्या अच्छा लगता है. तभी हम किसी नतीजे पर पहुंच पाएंगे."

बच्चों पर कितना असर?

बच्चों पर असर

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इमेज कैप्शन, जानकारों का ऐसा दावा है कि मोबाइल फ़ोन पर अश्लील कंटेंट देखने वालों में एंग्जाइटी और पैनिक अटैक का ख़तरा ज्यादा रहता है.

सर गंगा राम अस्पताल में न्यूरो सर्जन और मनोवैज्ञानिक डॉक्टर रिचा सिंह का मानना है कि अश्लीलता से भरे कंटेंट का सबसे ज्यादा बुरा असर उन बच्चों पर पड़ता है जिनकी उम्र 13 से 20 साल है.

वे कहती हैं, "किशोरावस्था के दौरान बच्चों के शरीर में बदलाव होते हैं. शारीरिक बदलाव तो दिखाई देते हैं लेकिन मानसिक बदलाव उस तरह से दिखाई नहीं देते. इस समय हार्मोंस में बदलाव होता है, जिसकी वजह से बच्चे अपने दोस्तों की बात ज्यादा मानने लगते हैं."

डॉ. रिचा कहती हैं, "उम्र के इस पड़ाव पर बच्चे खुद को स्पेशल समझते हैं. जब बच्चे देखते हैं कि कोई व्यक्ति गाली देकर या अश्लील बातें कर कूल लग रहा है और लोग उसे पसंद कर रहे हैं तो वह भी उन्हें कॉपी करने की कोशिश करता है. इसका असर यह होता है कि जिन घरों में गाली नहीं भी दी जाती, वहां तक यह पहुंच जाती है."

उनका कहना है, "ऐसी स्थिति में बच्चे अपनी दिशा से भटक जाते हैं और उनके अंदर जोखिम उठाने का व्यवहार मजबूत होता है, जिसके कारण कई बार जान तक चली जाती है."

करिश्मा मेहरा

ऐसी ही बात ओडिशा में कटक के रहने वाले मनोचिकित्सक डॉक्टर सम्राट कर भी करते हैं. वे कहते हैं कि किशोरावस्था की उम्र में बच्चा जो देखता है, वही सीखता है.

डॉक्टर सम्राट कर का कहना है, "बच्चों को अश्लील कंटेंट देखने के लिए प्राइवेसी की ज़रूरत पड़ती है जिसके कारण वह माता-पिता से दूर होने लगता है. इस तरह का ज्यादा कंटेंट देखने पर बच्चा प्लानिंग की स्टेज तक भी पहुंच जाता है और वह बड़े अपराधों को भी अंजाम दे सकता है."

वे कहते हैं, "माता-पिता बोलते हैं कि मेरे बच्चे अश्लील और फूहड़ कंटेंट ज्यादा देखते हैं. जब हम बात करते हैं तो पता चलता है कि माता-पिता घर में ज्यादा मोबाइल चलाते हैं. उसे देखकर बच्चा फॉलो करता है. कई मामलों में माता-पिता अपना फोन बच्चों को देते हैं, जिसके कारण उनकी प्रोफाइल पर दिखाई दे रहा कंटेंट बच्चों तक पहुंच जाता है."

डॉक्टर सम्राट का कहना है, "इससे बच्चों में हार्ट बीट बढ़ना, एंग्जाइटी और पैनिक अटैक बढ़ते हैं."

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