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मालदीव में मुइज़्जू़ के सामने पहली बड़ी राजनीतिक परीक्षा, इस बार भारत विरोध नहीं बल्कि ये हैं मुद्दे- प्रेस रिव्यू
राष्ट्रपति बनने के एक साल के भीतर ही मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्ज़ू के सामने संसदीय चुनाव जीतने की चुनौती आ गई है.
अंग्रेजी अख़बार ‘द हिंदू’ ने मुइज़्जू़ की इस चुनौती पर विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की है.
अख़बार लिखता है कि इस चुनाव के नतीजे ही तय करेंगे कि मालदीव की संसद मजलिस में किस पार्टी का वर्चस्व होगा.
मुइज़्ज़ू पिछले साल सितंबर में मोहम्मद सोलिह को हराकर राष्ट्रपति बने थे.
मुइज्ज़ू ने राष्ट्रपति चुनाव भारत विरोध के नारे पर जीता था. हालांकि संसद में मोहम्मद सोलिह की पार्टी मालदिवियन डेमोक्रेटिक पार्टी का बहुमत है.
इससे मुइज़्ज़ू के लिए नए विधेयकों को पारित करना कठिन हो रहा है. नए कानून बनाने के लिए मौजूदा राष्ट्रपति की पार्टी के लिए संसदीय चुनाव जीतना ज़रूरी है.
मालदीव में संसदीय चुनाव के लिए वोटिंग आज हो रही है. देश की 93 संसदीय सीटों पर हो रहे चुनाव में 2,84,663 वोटर हिस्सा ले रहे हैं. इन चुनावों में 368 उम्मीदवार मैदान में हैं.
अख़बार लिखता है कि पिछले साल राष्ट्रपति चुनाव के बाद से मालदीव का राजनीतिक परिदृश्य काफी बदल गया है. देश की राजनीति में विभाजन साफ दिख रहा है.
कई राजनीतिक दलों के उतरने से चुनाव हुआ पेचीदा
पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद और उनके समर्थक सत्ता में रही मालदिवियन डेमोक्रेटिक पार्टी को छोड़ कर नई पार्टी बना चुके हैं.
वहीं पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन और मुइज़्ज़ू के बीच भी मतभेद उभर चुके हैं.
इस बीच, मनी लॉन्ड्रिंग और रिश्वतखोरी के आरोप में जेल जा चुके यामीन ने पीपुल्स नेशनल फ्रंट नाम से नई पार्टी बना ली है. उनकी पार्टी ने चुनाव में अपने उम्मीदवार खड़े करने का फैसला किया है.
चूंकि पार्टी रजिस्टर्ड नहीं हुई है इसलिए इसके कई उम्मीदवार स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ रहे हैं.
अख़बार लिखता है कि मालदीव की राजनीति में पिछले पांच साल से दो राजनीतिक धड़ों का वर्चस्व था. लेकिन अब यहां चार राजनीतिक धड़ों में मुकाबला हो रहा है. इसके साथ ही कई छोटी पार्टियां भी सक्रिय हैं.
पूर्व राष्ट्रपति यामीन पिछले सप्ताह हाई कोर्ट के आदेश पर रिहा हो गए थे. उनके रिहा होने के बाद संसदीय चुनाव में मुकाबला और रोचक हो गया है.
अख़बार लिखता है कि 2023 का राष्ट्रपति चुनाव भारत विरोध के नारे पर हुआ था. लेकिन इस बार का संसदीय चुनाव कई घरेलू मुद्दों पर लड़ा जा रहा है.
मालदीव में इस समय गिरती अर्थव्यवस्था, बेरोज़गारी और इन्फ्रास्ट्रक्चर बड़े चुनावी मुद्दे हैं. राष्ट्रपति मुइज़्ज़ू की सरकार इन मामलों पर घिरी नज़र आ रही है.
इस साल जनवरी में मालदिवियन डेमोक्रेटिक पार्टी के एडम अज़ीम ने राजधानी माले के मेयर पद के चुनाव में मुइज़्ज़ू की पीपुल्स नेशनल कांग्रेस के उम्मीदवार को हरा दिया था.
‘इंडिया’ के साझा मेनिफेस्टो लाने की कोशिश में ममता का अड़ंगा
भारत के लोकसभा चुनावों में विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' संयुक्त घोषणापत्र जारी करना चाहता है. लेकिन इसके लिए गठबंधन की सबसे मुखर पार्टी तृणमूल कांग्रेस को मनाना मुश्किल साबित हो रहा है.
‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि 'इंडिया' गठबंधन संयुक्त घोषणापत्र इसलिए जारी करना चाहता ताकि इससे लोगों को विपक्षी दलों के बीच एकता का संदेश दिया जा सके.
साथ ही मतदाताओं को लगे कि इंडिया गठबंधन में शामिल दलों का कोई साझा मकसद है.
सूत्रों का कहना है तृणमूल कांग्रेस इंडिया गठबंधन के प्रस्तावित साझा घोषणापत्र में जाति जनगणना को शामिल करने के ख़िलाफ़ है.
उनका ये भी कहना है कि तृणमूल कांग्रेस नहीं चाहती है कि साझा घोषणापत्र जारी हो इसलिए वह जाति जनगणना के मुद्दे को शामिल न करने का ‘बहाना’ बना रही है.
इस बीच, ममता ने एक बार फिर पश्चिम बंगाल में कांग्रेस और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) में मिली-भगत का आरोप लगाया है.
ममता ने कहा, ''मैंने ही गठबंधन के लिए इंडिया शब्द दिया था लेकिन इंडिया पश्चिम बंगाल में अस्तित्व में नहीं है. ये बंगाल के बाहर है.''
दूसरी ओर, विपक्षी गठबंधन इंडिया के सूत्रों का कहना है बगैर जाति जनगणना के मुद्दे के साझा घोषणापत्र जारी करने का कोई मतलब नहीं है क्योंकि ये विपक्षी दलों का अहम चुनावी मुद्दा है. अगर ममता राज़ी नहीं होती हैं तो तृणमूल के बगैर भी ये साझा घोषणापत्र लाया जा सकता है.
हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदने के लिए अधिकतम उम्र सीमा हटी
भारत में इंश्योरेंस सेक्टर का नियामक भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) ने हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदने की उम्र सीमा हटा दी है. नया नियम 1 अप्रैल से लागू हो गया है.
‘द हिंदू’ ने इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित करते हुए लिखा है कि इससे पहले 65 साल की उम्र से अधिक के लोग नई हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी नहीं खरीद सकते थे. लेकिन अब ये उम्र सीमा घटा दी गई है.
देश में ज़्यादा से ज़्यादा बुजुर्गों को हेल्थ इंश्योरेंस के दायरे में लाने के लिए आईआरडीएआई ने नियम में बदलाव किए हैं.
आईआरडीएआई के निर्देश में कहा गया गया है कंपनियां बुजुर्गों के लिए खास पॉलिसी लेकर आएं और उनके दावों और शिकायतों के निपटारे के लिए अलग कार्यक्रम बनाएं.
जो कंपनियां उम्र संबंधी अलग-अलग बीमारियों को देखते हुए पॉलिसी लाएंगी उन्हें खास प्रोत्साहन दिया जाएगा.
इससे हेल्थकेयर बीमा के दायरे में समावेशी नीतियों को बढ़ावा मिलेगा. इससे लोगों को हेल्थ बीमा पॉलिसी सस्ती दरों पर मिल सकेगी.
आईआरडीएआई एक स्वायत्त और संवैधानिक संगठन है जो देश के इंश्योरेंस और री-इंश्योरेंस सेक्टर का प्रबंधन और नियमन करता है.
लोकसभा चुनाव के दौरान गर्मी से कई राज्यों में बुरा हाल
देश में लोकसभा चुनाव के वक्त़ गर्मी का प्रकोप शुरू हो गया है. कई राज्य प्रचंड गर्मी से तप रहे हैं.
हिंदी अख़बार ‘अमर उजाला’ ने लिखा है कि जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के साथ ही उसके साथ के लगते तराई वाले राज्यों को छोड़कर पूर्वी, मध्य और दक्षिण भारत के कम से कम 15 राज्य प्रचंड गर्मी और लू की चपेट में हैं.
अख़बार लिखता है कि सुबह के 10 बजते ही दोपहरी जैसी गर्मी महसूस होने लग रही है. पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल के गंगा तट के इलाकों, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, बिहार और ओडिशा जैसे राज्यों के कई क्षेत्रों में अधिकतम पारा 42-45 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया है.
मौसम विभाग के मुताबिक, अगले पांच दिन और अधिक गर्मी का सामना करना पड़ेगा और तापमान में 2-3 डिग्री सेल्सियस तक ही वृद्धि दर्ज की जा सकती है.
कई राज्यों में अप्रैल से जून की अवधि में 20 दिनों तक लू चलने की आशंका है.
भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने शनिवार को अगले पांच दिनों के लिए लू और गर्मी का पूर्वानुमान जारी करते हुए बताया कि पूर्वी उत्तर प्रदेश, गंगा के तटीय पश्चिम बंगाल, उत्तरी रायलसीमा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, विदर्भ, मराठवाड़ा, महाराष्ट्र के कुछ हिस्से, तेलंगाना, ओडिशा के अलग-अलग हिस्सों में अधिकतम तापमान 42-44 डिग्री सेल्सियस रहेगा.
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