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पश्चिम बंगाल: मुर्शिदाबाद में राम नवमी जुलूस के दौरान हिंसा, बीजेपी ने ममता को घेरा- प्रेस रिव्यू
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद ज़िले में रामनवमी जुलूस के दौरान हिंसा भड़कने से कम से कम 20 लोग घायल हो गए हैं.
इस हिंसा में घायल हुई एक महिला की हालत गंभीर बताई जा रही है.
'द इंडियन एक्सप्रेस' ने मुर्शिदाबाद के रेजिनगर में हुई इस घटना की विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की है.
अख़बार लिखता है कि जुलूस के दौरान देशी बम विस्फोट की रिपोर्टें हैं लेकिन पुलिस ने इसकी पुष्टि नहीं की है.
अख़बार ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि कुछ शरारती तत्वों ने जुलूस पर छतों से पत्थर फेंके. इसके बाद हिंसा भड़क उठी. इसके बाद इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया.
इस घटना में 20 लोगों को चोटें आई हैं और गंभीर रूप से घायल एक महिला को मुर्शिदाबाद के अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
इस सप्ताह की शुरुआत में यहां के कामनगर इलाके में हिंसा भड़कने के बाद चुनाव आयोग ने मुर्शिदाबाद के डीआईजी को बदल दिया था.
अख़बार लिखता है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस इलाके में रामनवमी के दौरान हिंसा भड़कने की आशंका जताई थी.
उन्होंने कहा था कि बीजेपी यहां चुनाव में ध्रुवीकरण के लिए अशांति फैला सकती है. अगर मुर्शिदाबाद में हिंसा हुई तो चुनाव आयोग को इसकी जिम्मेदारी लेनी होगी.
ममता पर विपक्ष का हमला
मुर्शिदाबाद में हिंसा के बाद बीजेपी विधायक और राज्य में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी पर हमला किया.
उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी के भड़काने की वजह से ये हालात पैदा हुए हैं.
उन्होंने आरोप लगाया कि जुलूस में शामिल लोगों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे.
शुभेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया पर लिखा, '' ममता पुलिस राम भक्तों पर आंसू गैस के गोले दागने में शरारती तत्वों के साथ शामिल हो गई. पुलिस चाहती थी कि जुलूस तुरंत ख़त्म हो जाए.''
अधिकारी ने लिखा, ''ये सब ममता बनर्जी के भड़काने का नतीजा है. पश्चिम बंगाल में शांतिपूर्ण और हादसा रहित धार्मिक उत्सव चाहिए तो इस राज्य सरकार को बदलना होगा. मैं चुनाव आयोग से अपील करूंगा कि वो पुलिस की नाकामी का संज्ञान ले.''
बीजेपी के राज्यसभा सांसद समिक भट्टाचार्य ने भी इस घटना के लिए ममता बनर्जी को दोषी ठहराया.
उन्होंने लिखा, ''जिस राज्य में सीएम राम नाम को एक चैलेंज की तरह देखती हैं, वहां और क्या उम्मीद की जा सकती है.
बीजेपी ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर लिखा, ''पश्चिम बंगाल में रामनवमी शोभा यात्रा की सुरक्षा में नाकामी ममता बनर्जी की भारी अक्षमता का सुबूत है. मुर्शिदाबाद के रेजिनगर में हिंदुओं को निशाना बनाया गया, जो इस इलाके में अल्पसंख्यक हैं.''
पिछले साल रामनवमी के मौके़ पर हुगली जिले के रिसड़ा और शिबपुर में हिंसा भड़क उठी थी. उस समय दोनों समुदायों के लोगों ने एक-दूसरे पर पत्थरबाजी के आरोप लगाए थे.
चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के गवर्नर का कूचबिहार दौरा क्यों रोका?
चुनाव आयोग ने बुधवार को पश्चिम बंगाल के गवर्नर सी वी आनंद बोस को कूचबिहार ज़िले की उनकी प्रस्तावित यात्रा से रोक दिया.
'इंडियन एक्सप्रेस ' ने इस बारे में रिपोर्ट प्रकाशित की है. अख़बार ने लिखा है कि बोस गुरुवार और शुक्रवार को कूचबिहार की यात्रा पर जाने वाले थे. लेकिन चुनाव आयोग ने इसे चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन माना.
आयोग ने कहा कि कूचबिहार में 19 अप्रैल को वोटिंग हो रही है और 'साइलेंस पीरियड' शुरू हो चुका है लिहाजा वो ये यात्रा नहीं कर सकते.
चुनाव आयोग ने कहा है कि एक बार आदर्श आचार संहिता लागू होने और चुनाव की तारीख़ निर्धारित होने के बाद गवर्नर के लिए किसी स्थानीय कार्यक्रम का आयोजन नहीं किया जा सकता है.
अख़बार ने एक अन्य सूत्र के हवाले से लिखा है कि चुनाव आयोग को गवर्नर की यात्रा का तब पता चला, जब उनके दफ्तर ने जिलाधिकारी को उनके प्लान की जानकारी दी.
अख़बार के मुताबिक़, चुनाव आयोग ने कहा है कि जिला प्रशासन और पुलिस चुनाव प्रबंधन के लिए तैनात रहेंगे. उन्हें सिक्योरिटी कवर के लिए अलग-अलग लगाया जाएगा.
लोक प्रतिनिधित्व कानून 1951 की धारा 126 के तहत चुनाव से पहले साइलेंस पीरियड के 48 घंटों में किसी प्रचार की अनुमति नहीं है.
इस दौरान चुनाव अधिकारी लोक प्रतिनिधित्व कानून की धाराओं को बेहतरीन ढंग से लागू करना सुनिश्चित करते हैं.
चुनाव आयोग ने सभी जिला चुनाव अधिकारियों और पुलिस प्रमुखों को सख्त निर्देश दिए हैं कि उन सभी हाई प्रोफाइल लोगों, प्रचारकों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को चुनाव वाले इलाके से तुरंत बाहर कर दिया जाए, जो यहां के वोटर नहीं हैं. साइलेंस पीरियड को लागू करने और पारदर्शी चुनाव के लिए ये ज़रूरी है.
अमेठी सीट पर सस्पेंस कायम, क्या राहुल गांधी लड़ेंगे
क्या कांग्रेस नेता केरल की वायनाड सीट के साथ-साथ उत्तर प्रदेश की अमेठी सीट से भी चुनाव लड़ेंगे? फिलहाल राहुल गांधी ने भी इस पर सस्पेंस बना रखा है.
'हिन्दुस्तान टाइम्स' की ख़बर के मुताबिक़, बुधवार को जब एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी से पूछा गया कि क्या वो अमेठी लोकसभा सीट से भी चुनाव लड़ेंगे तो उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी जो कहेगी वो करेंगे.
राहुल गांधी लगातार तीन बार अमेठी लोकसभा सीट जीत चुके हैं लेकिन 2019 लोकसभा चुनाव में उन्हें यहां बीजेपी की स्मृति ईरानी से हारना पड़ा था.
राहुल गांधी केरल की वायनाड सीट से सांसद हैं. इस बार भी वो इस सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. लेकिन ऐसी चर्चा है कि वो अमेठी सीट से भी चुनाव लड़ सकते हैं.
इस बारे में पूछने पर उन्होंने कहा, ''ये बीजेपी का सवाल है. लेकिन पार्टी से जो भी आदेश होगा मैं उसका पालन करूंगा. हमारी पार्टी में इस तरह का फैसला केंद्रीय चुनाव कमेटी करती है.''
राहुल गांधी के अमेठी से चुनाव लड़ने की ख़बरों के बीच इस बात की भी चर्चा है कि कांग्रेस नेता और उनकी बहन प्रियंका गांधी रायबरेली से चुनाव लड़ सकती हैं.
इस सीट से उनकी मां सोनिया गांधी चुनाव जीतती रही हैं. लेकिन अब वो राज्यसभा की सांसद हैं और इस बार वो चुनावी मैदान में नहीं हैं.
यूपी में अमेठी और रायबरेली ही वो सीटें हैं, जहां से कांग्रेस ने अभी अपने उम्मीदवार घोषित नहीं किए हैं.
हरिद्वार में उत्तराखंड के तीन पूर्व मुख्मंत्रियों की प्रतिष्ठा दांव पर
उत्तराखंड की हरिद्वार लोकसभा सीट पर तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी हुई है.
इस सीट पर या तो कोई पूर्व सीएम चुनावी मैदान में खुद डटे हैं तो किसी के कंधों पर चुनाव जिताने की जिम्मेदारी है.
इसलिए हरिद्वार का चुनावी समर तीनों पूर्व सीएम का राजनीतिक भविष्य भी तय कर सकता है.
'अमर उजाला' लिखता है कि हरिद्वार संसदीय सीट पर 14 प्रत्याशी मैदान में किस्मत आजमा रहे हैं, लेकिन सबसे ख़ास बात यह है कि इस चुनाव में उत्तराखंड के तीन पूर्व सीएम के राजनीतिक कौशल की भी परीक्षा होनी है. इनमें एक पूर्व सीएम त्रिवेंदर सिंह रावत तो खुद चुनावी दंगल में हैं.
दूसरे पूर्व सीएम और वर्तमान सांसद डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक के कंधों पर भी भाजपा प्रत्याशी को जिताने का जिम्मा है. वो इस सीट से लगातार दो बार सांसद रहे हैं और इस बार पार्टी ने उनकी जगह त्रिवेंदर सिंह रावत को मैदान में उतारा है.
तीसरे पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत हैं, जिनके बेटे वीरेंद्र रावत कांग्रेस से चुनावी मैदान में हैं. पार्टी हाईकमान से बेटे के लिए टिकट लेकर आए पूर्व सीएम हरीश रावत पर भी कांग्रेस को चुनाव जिताने का भारी दबाव है.
माना जा रहा कि हरिद्वार सीट पर बीजेपी का प्रदर्शन डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक की राजनीति का आगे का रास्ता तय करेगा. उन पर त्रिवेंदर सिंह रावत की जीत पक्की कराने का दबाव है. त्रिवेंदर सिंह रावत के लिए भी पार्टी की ओर से मिले इस अवसर को हर हाल में भुनाने का दबाव है.
लंबे समय के बाद उन्हें यह अवसर मिला है और उनका प्रदर्शन उनकी भविष्य की राजनीति की दिशा तय करेगा.
पूर्व सीएम हरीश रावत का राजनीतिक भविष्य भी बेटे वीरेंद्र रावत के प्रदर्शन पर टिका है.
ऐसे में तीनों पूर्व सीएम जीत के लिए चुनाव में मेहनत करते दिख रहे हैं.
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