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अमेरिका में लोगों की उम्र क्यों घट रही है? – दुनिया जहान
अमेरिका में पिछले 100 सालों में पहली बार लोगों की अपेक्षित आयु में बड़ी गिरावट आ रही है.
अब अमेरिका में लोगों की औसत अपेक्षित आयु या लाइफ़ एक्सपेंक्टेंसी 76 वर्ष हो गयी है.
पिछले दो तीन साल पहले तक यह 79 वर्ष के करीब थी. 1900 की शुरुआत से अमेरिका में बेहतर चिकित्सा व्यवस्था और दवाइयों की वजह से लोगों की अपेक्षित आयु लंबी रही है.
लेकिन पिछले कुछ सालों में इसमें गिरावट आने लगी है. हम यह भी सोच सकते हैं कि ऐसा कोविड महामारी की वजह से भी हुआ हो.
हालांकि इसके कुछ और चिंताजनक कारण भी सामने आ रहे हैं. इसका प्रभाव ख़ासतौर पर युवाओं पर पड़ता दिख रहा है.
इस हफ़्ते दुनिया जहान में हम जानेंगे कि अमेरिका में अपेक्षित आयु क्यों घट रही है?
ग़ैर बराबरी
2020 में कोरोना वायरस महामारी कई देशों में एक राजनीतिक मुद्दा भी बन गयी थी लेकिन अमेरिका में इसका राजनीतिकरण सबसे अधिक हुआ. अमेरिका में कुछ लोग वैक्सीन लगवाने से हिचकिचा रहे थे और कोविड संबंधी नियंत्रणों का विरोध कर रहे थे.
इसलिए अगर जनसंख्या के अनुपात में देखा जाए तो कोविड महामारी फैलने के बाद तीन वर्षों में अमेरिका में अन्य धनी देशों की तुलना में अधिक लोग मारे गए.
अमेरिका में अब तक कोविड से मरने वालों की संख्या 10 लाख से अधिक हो चुकी है. निस्संदेह पिछले कुछ सालों में अमेरिका में लोगों कि असमय मृत्यु का यह एक मुख्य कारण रहा है.
लेकिन इसके दूसरे कारण भी रहे हैं. सैन फ़्रांसिस्को के प्रेसिडियो ग्रैजुएट स्कूल के एक प्रोफ़ेसर जेरेमी नेय का कहना है कि आय का सीधा संबंध अपेक्षित आयु से है. वो अमेरिका में ग़ैर-बराबरी के विषय पर शोध करते हैं.
वो कहते हैं, “आय, आवास, शिक्षा और हिंसक अपराध जैसे मुद्दों का हमारी अपेक्षित आयु पर प्रभाव पड़ता है. अगर आप पिछड़े और हिंसाग्रस्त इलाकों में रह रहे हों, तो हो सकता है आप 65 साल तक जिएं और अगर किसी अच्छे इलाके में रह रहे हों तो हो सकता आप 85 साल तक जिएं. यानी ये बातें आपकी आयु को 20 साल घटा या बढ़ा सकती हैं. पिछले 40 सालों में अमेरिका में इसी वजह से अलग अलग क्षेत्रों में अपेक्षित आयु में 20 साल का अंतर नज़र आ रहा है.”
जेरेमी नेय का मानना है कि अमेरिका के क्षेत्रों में अपेक्षित आयु में यह फ़र्क इसलिए भी है क्योंकि इन क्षेत्रों में उपलब्ध चिकित्सा सेवाओं में बहुत अंतर है.
अमेरिका में ग़रीब लोगों को स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के लिए 60 साल पहले मेडिकएड प्रोग्राम शुरू किया गया था. 20 साल पहले राष्ट्रपति बराक ओबामा के शासनकाल के दौरान इस योजना का विस्तार करके अधिक लोगों को इसका लाभ पहुंचाने का प्रावधान लाया गया था.
मगर इसे लागू करने के बारे में हर राज्य को ख़ुद फ़ैसला करने का अधिकार था. 10 अमेरिकी राज्यों ने इस योजना का विस्तार करने के लिए लाए बदलाव को लागू करने से इनकार कर दिया.
बीबीसी से बात करते हुए जेरेमी नेय ने कहा, “जिन राज्यों ने योजना को लागू किया है वह प्रति एक लाख लोगों में 200 लोगों की ज़िंदगी बचाने में सफल रहे हैं. साथ ही असमय मृत्यु दर को भी 50 प्रतिशत घटाया जा सका है. यह एक केंद्रीय योजना है. जिन राज्यों ने इसे लागू नहीं किया है वहां लोगों की औसत आयु पर इसका प्रभाव पड़ा है.”
शोधकार्यों की संख्याओं से पता चलता है कि ग़रीब समुदाय के लोगों की औसत आयु कम है. काले अमेरिकी लोग और लातिन अमेरिकी मूल के हिस्पैनिक समुदाय के लोगों की औसत आयु गोरे अमेरिकी लोगों की तुलना में कम पायी गयी है.
जेरेमी नेय ने कहा, “आय और नस्ल का भी अपेक्षित आयु से संबंध है. दुर्भाग्यवश काले अमेरिकी लोगों की आय अक्सर गोरे अमेरिकी लोगों से कम होती है. ख़ासतौर पर देश के दक्षिणी हिस्से में. वो गोरों की तुलना में पांच साल कम जीते हैं. कोविड महामारी से अमेरिका मे लोगों की अपेक्षित आयु घटी लेकिन उसके बिना भी काले लोगों की अपेक्षित आयु कम रही है.”
अपेक्षित आयु घटने की एक और वजह है अपराध और कारावास.
जेरेमी नेय कहते हैं कि समाज में असमानता का भी इस पर बड़ा असर पड़ता है. मिसाल के तौर पर फ़्लोरिडा राज्य के उन हिस्सों में अपेक्षित आयु अधिक है जहां लोग अच्छा खाते हैं, एक्सरसाइज़ करते हैं.
लेकिन राज्य की यूनियन काउंटी में स्थिति बहुत ख़राब है. राज्य की सबसे बड़ी जेल भी वहीं है. जो जेल में बंद हो जाते हैं उनमें से कई लोग कम आयु में ही मर जाते हैं.
अपेक्षित आयु घटने की एक वजह है युद्ध. पिछले 20 सालों में अमेरिका इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान में लंबे समय तक युद्ध में उलझा रहा है.
उससे पहले वियतनाम में 20 साल तक चले युद्ध में 58 हज़ार अमेरिकी मारे गए थे जिसका अमेरिकी समाज पर गहरा असर पड़ा था.
लेकिन एक और बड़ी वजह भी है जिसकी वजह से हर साल सैकड़ों लोग अमेरिका में मारे जाते हैं.
हथियार और मास शूटिंग
अमेरिका में हर साल मास शूटिंग यानी गोलीबारी की घटनाओं में हज़ारों लोग मारे जाते हैं. 2021 में अमेरिका में 48 हज़ार लोग गोली लगने की वजह से मारे गए थे. पिछले कुछ सालों में इसमें वृद्धि हुई है.
अमेरिका में सेंटर फ़ॉर इंजूरी प्रिवेंशन ऐंड कंट्रोल की स्थापना करने में बड़ी भूमिका निभाने वाले डॉक्टर मार्क रोज़नबर्ग कहते हैं कि अमेरिका में एक साल से 17 साल की उम्र में होने वाली मौतों का सबसे बड़ा कारण रायफ़ल और रिवॉल्वर जैसे हथियार हैं.
हथियारों से होने वाली हिंसा में वृद्धि का एक कारण यह है कि पिछले कुछ दशकों में वहां इन हथियारों की बिक्री में भारी उछाल आया है. अब अमेरिका में आम लोगों के पास करोड़ों की संख्या में हथियार आ चुके हैं.
वो कहते हैं, “लोग अपने घरों में बंदूकें रखते हैं जो कई बार परिवार के बच्चों के हाथ लग जाती हैं और दुर्घटनावश गोली चल जाती है जिसमें लोग घायल हो जाते हैं या मारे जाते हैं.”
“कई युवा ग़ैरक़ानूनी तरीके से हथियार प्राप्त कर लेते हैं इनमें कई लोग ग़रीबी और मानसिक बीमारियों की वजह से परेशान होते हैं और तंग आकर दूसरों का और कई बार ख़ुद को भी निशाना बना देते हैं. लोग अपनी सुरक्षा का हवाला देकर घर में हथियार रखते हैं, लेकिन उसके ज़रिए वो अपने और समाज के लिए ख़तरा और बढ़ा देते हैं. बंदूकें जितनी अधिक होंगी, वारदातें भी उतनी अधिक बढ़ जाएंगी.”
एक और चौंकाने वाली बात यह भी है कि हथियारों से होने वाली हिंसा से काले समुदाय के लोग, गोरे समुदाय के लोगों के मुकाबले कहीं अधिक प्रभावित होते हैं.
डॉक्टर मार्क रोज़नबर्ग कहते हैं, “अटलांटा में मैंने पाया कि 18 से 24 साल के बीच की आयु में हिंसा से मरने वाले काले लोगों की संख्या गोरे लोगों की तुलना में लगभग दोगुनी है. यह इस देश की न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाती हैं. यह देख कर मुझे काफ़ी दुख हुआ और लगा कि इस बारे में कुछ करना पड़ेगा.”
अमेरिका में अपेक्षित आयु घटने का यह एक प्रमुख कारण है क्योंकि इसका सबसे अधिक असर युवाओं पर पड़ता है.
डॉक्टर मार्क रोज़नबर्ग कहते हैं कि अगर किसी युवा की मृत्यु 20 साल की आयु में हो जाती है... और यह माना जाए कि अपेक्षित आयु 65 साल है तो संभवत: 45 साल का जीवन नष्ट हो रहा है.
हथियारों से होने वाली हिंसा का अपेक्षित आयु पर प्रभाव समझने का यह भी एक मापदंड है.
हथियारों के अलावा एक और चीज़ भी है जिसका देश की अपेक्षित आयु पर गहरा प्रभाव पड़ा है.
ड्रग्स और ड्रग ओवरडोज़
अमेरिका के रोग नियंत्रण केंद्र ने एक चौंकाने वाली रिपोर्ट में कहा कि पिछले साल देश में ड्रग ओवरडोज़ की वजह से एक लाख आठ हज़ार से अधिक लोगों की मौत हुई.
2020 की तुलना में यह 50 प्रतिशत अधिक है.
वेस्ट वर्जीनिया यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ़ मेडिसिन की एक प्रोफ़ेसर ज्यूदिट फ़ेनबर्ग ने 1980 के दशक के बाद से अमेरिका में ड्रग्स की लत और एड्स बीमारी के फैलने के प्रभाव पर काफ़ी शोध किया है.
उन्होंने बीबीसी से कहा, “मैंने 2005 में सिनसिनाटी में हेरोइन के इंजेक्शन लगाने से होने वाली बीमारियों के कुछ मामले देखे जिससे मुझे आशचर्य हुआ क्योंकि तब तक अमेरिका के उस हिस्से में हेरोइन के इस्तेमाल की ख़ास चर्चा नहीं थी. मुझे विश्वास था कि यह एक ऐसी समस्या है जो तेज़ी से फैलती है.”
1980 के दौरान ड्रग्स की लत बड़े शहरों में अधिक पायी जाती थी. लेकिन अब पूरे अमेरिका में ड्रग्स की लत फैलने लगी थी.
छोटे शहरों के मज़दूरों में भी यह लत फैल रही थी. मगर यह लोग हेरोइन जैसे ड्रग्स ही नहीं बल्कि ऐसी दवाइयों का सेवन कर रहे थे जिन्हें डॉक्टरों ने निरंतर होने वाले दर्द के इलाज के लिए प्रिस्क्राइब करना शुरू किया था.
डॉक्टरों का कहना था कि मरीज़ों को इन ओपिऑइड की लत लगने या उस पर निर्भर होने की संभावना बहुत कम है.
बाद में पता चला कि डॉक्टरों की यह सलाह पूरी तरह ग़लत थी. ज्यूदिट फ़ेनबर्ग का कहना है कि संकट और गंभीर हो गया क्योंकि मरीज़ों को बिना सही पड़ताल के इन दवाइयों के प्रिस्क्रिप्शन दिए जाने लगे.
उन्होंने बताया कि वेस्ट वर्जीनिया के दक्षिणी इलाके में कर्मिक नाम का एक छोटा सा कस्बा है जिसकी आबादी 392 थी और वहां एक दवाई की दुकान थी जहां आसानी से ओपिऑइड मिल जाते थे.
इस दुकान के बाहर लोगों और गाड़ियों की लंबी कतार लगी रहती थी. स्थानीय लोग ही नहीं बल्कि आसपास के शहरों में भी लोगों को पता चल गया था कि इस दुकान से आसानी से ओपिऑइड ख़रीदी जा सकती है.
जिस शहर में केवल 392 लोग रहते थे वहां की इस दुकान को चार सालों में लगभग सवा करोड़ ओपिऑइड गोलियों की सप्लाई हुई.
ज्यूदिट फ़ेनबर्ग कहती हैं कि यह महामारी तेज़ी से फैलती गयी और कई समुदायों को छिन्न भिन्न कर दिया.
“अगर हम अलग अलग राज्यों की संख्याओं को देखें तो इसके असर का अंदाज़ा लगाया जा सकता है. पिछले 10 सालों में वेस्ट वर्जीनिया में इन ओपिऑइड्स से मरने वालों की संख्या सबसे ज़्यादा रही है. इससे यहां प्रति एक लाख लोगों में 90 लोगों की मौत होती है. इसमें कोई शक नहीं है कि ओपिऑइड की महामारी का अमेरिकी लोगों की अपेक्षित आयु पर गहरा प्रभाव पड़ा है.”
2022 में एक साल में ड्रग ओवरडोज़ से मरने वालों की संख्या एक लाख से ऊपर हो गयी. यानी गोलीबारी में मरने वालों की संख्या से दोगुना अधिक.
कैंसर और दिल की बीमारी से होने वाली मौतें
कोविड की महामारी से तीन सालों के दौरान अमेरिका में 10 लाख से अधिक जाने गयी थीं. मगर कुछ अन्य बीमारियां भी हैं जिनका देश के लोगों की अपेक्षित आयु पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है.
हॉर्वर्ड यूनिवर्सिटी में हैल्थ इकोनॉमिक्स की प्रोफ़ेसर एलिन मारा ने कहा, “कैंसर और दिल की बीमारियों से होने वाली मौतें बढ़ रही हैं जिस पर बात नहीं हो रही है जब कि इन बीमारियों से मरने वाले लोगों की संख्या ड्रग ओवरडोस, आत्महत्या और शराब की वजह से मरने वाले लोगों कि संख्या से दोगुना है. इसे कम करने के लिए पिछले दशकों जितना ज़ोर दिया जाता था, अब उतना नहीं दिया जा रहा है.”
अमेरिका में हर साल कैंसर और दिल की बीमारी से छ: लाख से अधिक लोगों की मृत्यु होती है. यह संख्या धीरे धीर बढ़ती जा रही है. अक्सर मोटापे की समस्या को भी घटती अपेक्षित आयु से जोड़ कर देखा जाता है. इसमें कितनी सच्चाई है?
एलिन मारा ने कहा, “मोटापे से मुश्किल तो बढ़ती है. लेकिन कई बार इस पर ध्यान देते समय और समस्याओं पर से ध्यान हट जाता है. मैंने अलग अलग राज्यों में मृत्यु दर की संख्याओं का अध्ययन किया है. ऐसा तो नहीं लगता कि जिन राज्यों में मोटापे की दर अधिक है वहां मृत्यु दर भी अन्य राज्यों की तुलना में बढ़ गयी हो. दिल के मरीज़ों में मोटापे की वजह से जोख़िम ज़रूर बढ़ जाता है लेकिन यह कहना मुश्किल है कि इसका संबंध अपेक्षित आयु घटने से है.”
प्रोफ़ेसर जेरेमी नेय ने कहा था कि सभी को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं, ख़ासतौर पर ग़रीबों को. और यह अपेक्षित आयु घटने का एक बड़ा कारण है. एलिन मारा की भी यही राय है.
“इस बात के कई सबूत हैं कि मेडिकएड जैसी योजनाओं से लोगों की जान बचाई जा सकती है. लेकिन अमेरिका के सभी राज्यों में इस योजना के विस्तार को लागू नहीं किया गया है. जिन राज्यों ने इसे लागू नहीं किया है वहां मृत्यु दर अधिक है.”
अमेरिका में जिन लोगों के पास मेडिकल बीमा होता है उन्हें भी कई बार को-पे के प्रावधान के तहत इलाज की कुछ रक़म ख़ुद चुकानी पड़ती है.
एलिन मारा कहती हैं कि अगर लोगों को लगे कि उन्हें दिल का दौरा पड़ रहा है फिर भी वो एमरजेंसी अस्पताल में जाने से डरते हैं. दवाइयां महंगी हों तो लोग दवाइयां लेना भी कम कर देते हैं जिसका उन पर घातक असर पड़ता है.
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