जब दिल की बीमारी भी पकड़ सकेगा स्मार्टफ़ोन

    • Author, टॉम अफ़
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

ख़ून का थक्का जमना (ब्लड क्लॉटिंग) एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है. अगर आपकी ब्लड क्लॉटिंग कम है तो आप हैमरेजिंग के शिकार हो सकते हैं. इससे इंटर्नल ब्लीडिंग हो सकता है और आपकी मौत हो सकती है.

और अगर ख़ून में क्लॉटिंग ज्यादा हो रही है तो आप थ्रोमोबिसिस के ख़तरे से घिर सकते हैं. इससे आपको दिल का दौरा पड़ सकता है.

ब्लड में क्लॉटिंग हो रही या नहीं इसे जानने के लिए डॉक्टरों को आपके शरीर से एक सीरिंज खून निकाल कर इसकी जांच करनी पड़ती है. लेकिन अब आप अपने स्मार्टफोन के सहारे खुद ब्लड क्लॉटिंग की जांच कर सकते हैं.

पहला मोबाइल फ़ोन बनाने वाली टीम का नेतृत्व करने वाले मार्टिन कूपर ने इस हफ्ते कहा कि सेलफ़ोन अब हमारी सेहत की मॉनिटरिंग करने वाला अहम टूल बन जाएगा. अब यह संभावना सच होती दिख रही है.

मार्च 2022 में वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी में वैज्ञानिकों ने खून की एक बूंद में क्लॉटिंग का पता लगाने के लिए आईफ़ोन का इस्तेमाल किया था.

उन्होंने डिवाइस के लाइट डिटेक्टिंग एंड रेंजिंग (Lidar) सेंसर का इस्तेमाल किया, जो फ़ोन के आसपास की 3डी इमेज बनाने के प्लस्ड बीम का इस्तेमाल करता है.

यह वह तकनीक है जो आपके डिवाइस को वास्तविक और वर्चुअल दुनिया को ऑग्मेंटेड रियलिटी के साथ मिलाने के लिए वस्तुओं या दूरियों का सटीक नापा जा सकता है.

मसलन ये यह दिखा सकती है कि आपके कमरे में फर्नीचर का एक टुकड़ा कैसा दिख सकता है. ये तस्वीरें लेते समय ऑटो फोकस को बेहतर बनाने में भी आपकी मदद कर सकती है.

फ़ोन के कैमरे के इस्तेमाल से सेहत की पड़ताल

लेकिन इसके लिए सेंसर को इतना सटीक होना होगा कि वो खून के गाढ़ेपन और दूध में मिलावट को पकड़ सके. श्यानता (Viscosity) के आधार जब रोशनी द्रव के ज़रिये बिखरती है तो लेज़र के कंपन एक खास तरह के छींटदार पैटर्न बनाते हैं.

उदाहरण के लिए अगर दूध में वसा की मात्रा अलग-अलग होगी तो पैटर्न बदल जाएगा. ब्लड क्लॉटिंग के मामले में भी ऐसा ही होता है.

शोधकर्ताओं ने पाया कि वे कांच की स्लाइड पर रखी छोटी खून की बूंद में वो गाढ़े और हल्के ख़ून के बीच अंतर कर पा रहे थे.

हाल के एक शोध में टीम ने खून का थक्का जमने का पता लगाने के लिए ख़ून की एक बूंद में तांबे के कण की गति को ट्रैक करने में स्मार्टफ़ोन पर कैमरे और वाइब्रेशन मोटर का इस्तेमाल किया.

दूसरे शोधकर्ता कुछ ऐसी तकनीकें विकसित कर रहे हैं जो आपके दिल की सेहत मसलन ब्लड प्रेशर का पता लगाने के लिए फ़ोन के कैमरे का इस्तेमाल करती हैं.

टोरंटो विश्वविद्यालय, कनाडा और चीन के झेजियांग में होंगज़ू नॉर्मल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने ऐसे एल्गोरिदम विकसित किए हैं जो स्मार्टफोन पर फ्रंट-फेसिंग कैमरों से लिए गए तस्वीरों में चेहरे पर न दिखने वाले रक्त प्रवाह को भी उठा (पहचान) ले सकते हैं.

चीनी वैज्ञानिकों की एक और टीम ने डीप-लर्निंग एल्गोरिदम विकसित की है, जो स्मार्टफोन से ली गई चार तस्वीरों से दिल की सेहत के दूसरे संकेतों को भी पकड़ सकती है.

एल्गोरिदम और सेहत के हाल के बारीक संकेत

फ़ोन से ली गई तस्वीरें- एक फ्रंट-ऑन व्यू, दो प्रोफ़ाइल और एक ऊपर से ली गई तस्वीरों में इन संकेतों को पकड़ा जा सकता है. एल्गोरिदम गालों, माथे और नाक में बेहद सूक्ष्म बदलावों पर फोकस करता दिखता है. मसलन ये झुर्रियों, धारियों और त्वचा के नीचे जमी वसा को ये पकड़ लेता है. इसे सामान्य तौर पर पकड़ना मुश्किल है.

80 फीसदी मामलों को ये हृदय रोग का सही तरीके से पता लगा सकता है. हालांकि 46 फीसदी मामलों में इसने गलत पहचान भी की.

मतलब ये कि अगर आगे प्रोफ़ेशनल मेडिकल डायग्नोसिस की मदद नहीं ली गई तो ये मरीजों के लिए अनावश्यक चिंता भी पैदा कर सकता है.

चीन में नेशनल सेंटर फॉर कार्डियोवेस्क्युलर डिज़ीज़ के जिन शोधकर्ताओं ने इस स्टडी को अंजाम दिया था उनका कहना है कि डिवाइस उन रोगियों की पहचान करने का एक "सस्ता, सरल और असदार" तरीका हो सकता है, जिन्हें आगे और जांच की जरूरत है.

ऐसी उम्मीदें हैं कि स्मार्टफोन दिल के उन हालातों का भी पता करने में मदद कर सकता है, जिनकी पहचान मुश्किल होती है. साथ ही ये सस्ता और ज्यादा पोर्टेबल माध्यम साबित होगा.

आगे और क्या होगा?

लॉस एंजिल्स के बच्चों के अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ जेनिफ़र मिलर और सदर्न कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के इंजीनियरों ने हाथ से पकड़े जाने वाले अल्ट्रासाउंड स्कैनर का प्रोटोटाइप तैयार किया है, जो इकोकार्डियोग्राम बनाने के लिए स्मार्टफ़ोन से लिंक कर सकता है.

इकोकार्डियोग्राम इस स्थिति की निगरानी कर सकेगा कि हृदय से ख़ून का प्रवाह किस तरह हो रहा है.

हालांकि इनमें से टेक्नोलॉजी अभी भी रिसर्च और ट्रायल के विभिन्न चरणों में हैं लेकिन आपके फ़ोन में कुछ ऐसी चीजें आ गई हैं, जिनसे आप अपने स्वास्थ्य पर निगरानी रख सकते हैं.

'द स्मार्टफोन: एनेटॉमी ऑफ़ एन इंडस्ट्री' की लेखिका एलिज़ाबेथ वॉयेक, रिवा नाम के एक अमेरिकी स्टार्ट-अप का हवाला देती हैं जो फ़ोन के कैमरे और इसके फ्लैश से इस्तेमाल से ब्लड प्रेशर को ट्रैक कर सकता है.

वो कहती हैं, "आप अपनी उंगलियों को स्मार्टफ़ोन के कैमरे पर रखते हैं और फिर यह आपके ब्लड प्रेशर को ट्रैक करने के लिए आपकी धमनियों की खून के प्रवाह को मापता है."

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