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आसमान से बरस रहे इसराइली बम फिर भी ग़ज़ा छोड़कर क्यों नहीं जाना चाहते कुछ परिवार?
- Author, फ़िरास किलानी
- पदनाम, बीबीसी अरबी, दरोत, इसराइल
उत्तरी ग़ज़ा पट्टी को छोड़कर जाने के लिए इसराइल की दी हुई डेडलाइन अब ख़त्म हो चुकी है लेकिन कुछ लोगों का कहना है कि वो ग़ज़ा छोड़ कर नहीं जाएंगे.
इसराइल की ओर से दी गई समयसीमा ख़त्म होने के बावजूद मोहम्मद इब्राहिम उत्तरी ग़ज़ा से नहीं जाएंगे.
घर के कमरे में 42 वर्षीय इब्राहिम अलग-अलग जगहों से आए अपने रिश्तेदारों के साथ बैठे हैं. इनमें से कुछ आपस में बात कर रहे हैं, तो वहीं कुछ घड़ी-घड़ी अपने फ़ोन में इस संकट से जुड़ी ख़बरें देख रहे हैं. इब्राहिम कहते हैं, "मैं अपनी ज़मीन नहीं छोड़ रहा, मैं कभी नहीं छोड़ूंगा."
वो कहते हैं, "अगर वो हमारे सिर पर इन छतों को तबाह भी कर दें तो भी मैं दूसरी जगह नहीं जा सकता. मैं यहीं रहूंगा."
अपने परिवार के साथ इब्राहिम पहले ही कई बार गज़ा शहर के आसपास एक से दूसरी जगह जा-जाकर रह चुके हैं.
उन्होंने कहा, "बीते रविवार देर रात दो बजे, हमले हुए और रॉकेट दागे गए. मैं अपनी पत्नी और चार बच्चों के साथ भागा."
इब्राहिम और उनका परिवार जबालिया इलाके को छोड़कर शेख रदवान आए, लेकिन उन्हें पता चला कि इस इलाके पर भी निशाना बनाकर हमला किया जाएगा. इसके बाद वो ग़ज़ा के बाहरी इलाके की एक बस्ती में आ गए.
लेकिन अब उन्हें उत्तरी ग़ज़ा छोड़ना सही नहीं लगा रहा. इसराइल ने लोगों को ये इलाका खाली करने की चेतावनी दी है.
मोहम्मद पूछते हैं, "हमें दक्षिण (ग़ज़ा) की ओर जाने के लिए कहा गया है, मैं और मेरा परिवार कहां जाएं?"
मोहम्मद के बच्चों को अपने घर का बागीचा याद आता है. अब वे अपने अन्य रिश्तेदारों के साथ एक फ्लैट में बंद हैं. उनके बेटे अहमद को अपने दोस्तों के साथ घर के पास साइकिल चलाना पसंद था.
इब्राहिम के बेटा अहमद अब अपने पिता से पूछ रहा है कि क्या उसका जिगरी दोस्त अब भी ज़िंदा है...लेकिन उसके पास दोस्त तक पहुंचने का कोई रास्ता नहीं है.
'कोई जीवन नहीं'
पास की गली में पेशे से बिल्डर 38 वर्षीय अबू जमील पानी की सप्लाई वाली पाइप के पास बैठे हैं और आख़िरी कुछ बूंदें बाहर निकालने की कोशिश में लगे हुए हैं.
वो कहते हैं, "आठ दिनों से यहां न तो खाना है और न पानी."
इसराइल ने ग़ज़ा में बिजली और पानी की आपूर्ति बंद कर दी है. साथ ही ईंधन और बाक़ी सामान को इस इलाके में आने से भी रोक दिया है.
अबू जमील कहते हैं, "पानी नहीं, बिजली नहीं, जीवन नहीं, कितना मुश्किल है."
लेकिन अपने पांच बच्चों के साथ जमील ने उत्तरी ग़ज़ा पट्टी में ही रहने का फ़ैसला किया है. वो दो बेटों और तीन बेटियों के पिता हैं. सबसे छोटे बच्चे की उम्र चार साल है.
वो कहते हैं, "हमारे पास जाने के लिए कोई जगह नहीं, अगर वो हमारे घर पर हमले करें तो भी हम यहां से नहीं जाएंगे. हम पांच या छह लोगों के इस परिवार के साथ कहां जा सकते हैं?"
सैनिक तैयार
हमास का कहना है कि इसराइली आदेश के बाद उत्तरी ग़ज़ा को अपना घर कहने वाले 11 लाख लोगों में से करीब चार लाख 48 घंटे के अंदर दक्षिण की ओर सलाह अल-दिन रोड के रास्ते चले गए हैं.
इसराइल की सीमा से करीब एक किलोमीटर दूर एक पहाड़ी से ग़ज़ा पट्टी को देखने पर जल्द ही होने वाले ज़मीनी हमलों की तस्वीर साफ़ हो जाती है.
पास के हाइवे पर हथियारबंद सैनिक घूम रहे हैं, वहीं आसमान में सेना के ड्रोन चक्कर काट रहे हैं.
सीमा पर बाड़े के पास छोटे हथियारों से हमलों की आवाज़ आ रही है. जवाब में इसराइली टैंक ने गोले बरसाए.
स्थानीय न्यूज़ रिपोर्टों में बताया गया कि इलाके में छिपे हमास के एक बंदूकधारी सदस्य की जान गई.
पास का ही इसराइली कस्बा देरोत पूरी तरह खाली हो चुका है, और हमारे यहां से जाने के कुछ मिनटों में ही प्रशासन ने इस इलाके को खाली करने का औपचारिक आदेश दिया.
सीमा से लौटते हुए भारी तोपखानों की गूंज सुनी जा सकती है. मुख्य सड़कों के आसपास के खेतों में बंदूकें गाड़ी गई हैं. हमारे सफ़र में कुछ मिनट भी ऐसे नहीं गुज़रे जब हमारे सामने कोई सैन्य काफ़िला या टैंक जाते न दिखा हो.
सैन्य ताकत का ये विशाल प्रदर्शन शनिवार, सात अक्टूबर को हमास के खूनी हमले के बाद इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू की हमास को ध्वस्त करने की योजना का केंद्र हो सकता है.
इसराइल के ऊपर हमास के हमले में अभी तक 1300 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है. वहीं, हमास 126 लोगों को बंधक बनाकर ले गया है.
फ़लस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार ग़ज़ा पट्टी और वेस्ट बैंक में इसराइल के हमले में रविवार सुबह तक मरने वाले फ़लस्तीनियों की संख्या 2,383 हो गई है और 10 हज़ार 814 लोग घायल हुए हैं.
चारों ओर जंग से घिरे
ग़ज़ा सिटी में बच्चे अभी भी सड़कों पर खेल रहे हैं.
ये बच्चे शांति के छोटे-छोटे पलों में पास की गलियों और सड़कों तक घूम रहे हैं.
हर ओर जंग से घिरी उनकी ज़िंदगी में उनके पास सिर्फ़ यही एक रास्ता है.
ग़ज़ा की करीब आधी आबादी 18 साल से कम उम्र की है. फ़लस्तीनी क्षेत्र के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार 700 बच्चे अभी तक इस संघर्ष में मारे जा चुके हैं.
ग़ज़ा में हमास प्रशासन ने लोगों से कहा है कि वो उत्तरी इलाके को न छोड़ें.
जबकि, इसराइल कह रहा है कि हमास लोगों को मानव ढाल के तौर पर इस्तेमाल करने के लिए उन्हें उत्तरी ग़ज़ा छोड़ने से रोक रहा है. हालांकि, इस आरोप को चरमपंथी संगठन ग़ज़ा ने खारिज किया है.
अगर इसराइल ने उत्तरी ग़ज़ा में ज़मीनी हमले शुरू करने का निर्णय ले लिया और हमास के लड़ाकों ने इसराइल के खिलाफ़ अपने कब्ज़े में आई इमारतों और सुरंगों के रास्ते गुरिल्ला युद्ध शुरू कर दिया, तो ये जंग कई महीनों तक चलेगी, इससे ये पूरा इलाका बर्बादी की कगार पर होगा.
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