इसराइल-हमास संघर्ष: सऊदी अरब ने बुलाई इस्लामिक देशों के संगठन ओआईसी की बैठक, ईरान ने क्या कहा?

इसराइल और हमास के बीच जारी संघर्ष के दौरान गज़ा पर चर्चा के लिए सऊदी अरब ने ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इस्लामिक कोऑपरेशन (ओआईसी) की बैठक बुलाई है.

बीते शनिवार को इसराइल पर गज़ा के चरमपंथी संगठन हमास ने हमला किया. इसके जवाब में इसराइल ने कार्रवाई शुरू की और अब इसराइल ने गज़ा पट्टी के आधे हिस्से को खाली करने का आदेश दिया है.

ओआईसी ने एक बयान जारी कर कहा कि सऊदी अरब की गुज़ारिश पर गज़ा मुद्दे पर चर्चा के लिए बुधवार को मंत्री स्तरीय बैठक बुलाई जा रही है.

जेद्दा में होने वाली इस आपात बैठक में ग़ज़ा के 'निहत्थे लोगों के लिए ख़तरे' और इसराइल की सैन्य कार्रवाई को लेकर चर्चा होगी.

हमास के हमले के बाद इसराइल ने गज़ा पर ताबड़तोड़ बम बरसाए. उसने ग़ज़ा पट्टी की घेराबंदी की और अपनी सेना और भारी हथियारों को ग़ज़ा से सटी सीमा के पास तैनात किया और ज़मीनी हमले की कार्रवाई के लिए तैयारी की है.

इसराइल ने शनिवार को ग़ज़ा के लोगों से कहा कि 24 घटों के भीतर वादी ग़ज़ा के ऊपर का हिस्सा छोड़कर दक्षिण की तरफ चले जाएं क्योंकि हमास के लड़ाकों को ख़त्म करने के लिए वो बड़ी कार्रवाई करने वाला है.

ओआईसी ने क्या कहा?

57 इस्लामिक देशों के संगठन ओआईसी ने बुधवार को इसराइल और हमास के संघर्ष और ग़ज़ा के आम नागरिकों की स्थिति पर चर्चा के लिए संगठन में शामिल देशों के विदेश मंत्रियों की आपात बैठक बुलाई है.

ओआईसी ने कहा है कि ये बैठक ओआईसी के मौजूदा सत्र की अध्यक्षता कर रहे सऊदी अरब के कहने पर बुलाई गई है.

इसमें ग़ज़ा में बढ़ रहे तनाव, यहां के हालात और आम लोगों पर मौजूद ख़तरों के अलावा मध्य पूर्व में पूरे इलाक़े की स्थिरता और सुरक्षा को लेकर भी चर्चा होगी.

इससे पहले ओआईसी ने एक के एक ट्वीट कर इसराइल की 'निंदा की' थी और कहा था, "कब्ज़ा करने वाली शक्ति ने फ़लस्तीनी लोगों को जबरन इलाक़ा खाली करने को कहा है, ये इसराइल के कब्ज़े के कारण बढ़ रहे माानवीय संकट को पड़ोसी देशों की तरफ धकेल देना है."

ओआईसी ने कहा, "ओआईसी ग़ज़ा पट्टी तक जाने वाली मेडिकल सप्लाई, राहत सामग्री और ज़रूरी चीज़ों का रास्ता रोकने की कोशिश की कड़ी निंदा करती है. ये पूरे समुदाय को सज़ा देने जैसा काम है और अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों का खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन है."

"संगठन अपील करता है कि फ़लस्तीनी लोगों के प्रति इसराइल के इस आक्रामक व्यवहार को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय जल्द कारगर कदम उठाए, नहीं तो इसकी वजह से अभूतपूर्व मानवीय त्रासदी पैदा हो सकती है."

इसके साथ ही ओआईसी ने ग़ज़ा पट्टी तक ज़रूरी सामान पहुंचाने के लिए मानवीय कॉरिडोर बनाने भी अपील की.

इससे पहले गुरुवार को भी ओआईसी ने मौजूदा तनाव के लिए इसराइल को ज़िम्मेदार ठहराया था और कहा था कि इसराइल को फ़लस्तीन के लोगों पर हो रहे हमलों को तुरंत रोकना चाहिए.

संगठन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मामले में गुज़ारिश की थी कि इसराइल को रोकने के लिए हस्तक्षेप करे.

7 अक्तूबर को हमास के लड़ाकों ने ग़ज़ा की तरफ़ से इसराइल पर हमला किया और भारी तबाही मचाई.

सऊदी अरब भी हुआ सक्रिय

हमास के ख़िलाफ़ इसराइली सेना के अभियान के शुरू होने के बाद सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान ने फ़लस्तीनी क्षेत्र के राष्ट्रपति महमूद अब्बास से बात की है और उनसे कहा, "सऊदी अरब फ़लस्तीनियों के अधिकार, उनकी उम्मीदों, महत्वाकांक्षाओं और शांति के लिए साथ खड़ा है."

तब से लेकर अब तक सऊदी क्राउन प्रिंस और देश के दूसरे नेता इसराइल के हमले के कारण ग़ज़ा में पैदा हो रहे मानवीय संकट के मुद्दे पर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और फ्रांस की विदेश मंत्री कैथरीन कोलोन्ना, तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन, कनाडा की विदेश मंत्री मेलनी जोली, इटली के डिप्टी प्रधानमंत्री एंटोनयो तजानी, अल्बानिया के विदेश मंत्री इग्ली हसानी, माल्टा के विदेश मंत्री इयान बॉर्ग, विदेश मामलों के यूरोपीय संघ के अध्यक्ष जोसेप बुरेल, स्वीडन के विदेश मंत्री टोबियास बिलस्टॉर्म, इंडोनीशिया क विदेश मंत्री रेनो मार्सुदी, नॉर्वे की विदेश मंत्री एन्निकेन हूफेल, भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और ब्राज़ील के विदेश मंत्री माउरो विएरा से चर्चा कर चुके हैं.

रविवार को सऊदी अरब के विदेश मंत्री फ़ैसल बिन फ़रहान बिन अब्दुल्लाह ने अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन से मुलाक़ात की.

दोनों के बीच चर्चा में भी ग़ज़ा का मुद्दा अहम बना रहा. सऊदी विदेश मंत्री ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अधिक आम लोग प्रभावित हो रहे हैं जिन्हें हिंसा की क़ीमत चुकानी पड़ रही है. उन्होंने कहा कि ग़ज़ा के आसपास के इलाक़े में तुरंत संघर्ष विराम की घोषणा किए जाने की ज़रूरत है.

चीन से अनुरोध

रविवार को ही सऊदी अरब के विदेश मंत्री ने चीनी विदेश मंत्री वांग यी से फ़ोन पर बात की.

उन्होंने चीन से गुज़ारिश की कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य होने के नाते वो ये सुनिश्चित करे कि परिषद शांति और सुरक्षा बहाल करने की अपनी भूमिका निभाते हुए तुरंत संघर्ष विराम के लिए कोशिश करे, साथ ही ग़ज़ा के लोगों तक मदद पहुंचाने के लिए इसराइल से उसकी घेराबंदी ख़त्म करने को कहे.

इससे पहले शनिवार को सऊदी विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा कि वो ग़ज़ा से लोगों के जबरन विस्थापन की कोशिशों को ख़ारिज करता है और ग़ज़ा के निहत्थे लोगों को निशाना बनाने की कड़ी आलोचना करता है.

बयान में विदेश मंत्रालय ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को जल्द से जल्द सामने आ कर आम लोगों के ख़िलाफ़ सभी तरह की सैन्य कार्रवाई रोकने और मानवीय संकट को बढ़ने से रोकने की ज़रूरत है.

साथ ही इसकी कोशिश भी की जानी चाहिए कि ग़ज़ा में लोगों तक मेडिकल सेवाओं समेत और ज़रूरी मदद पहुंचाई जान चाहिए. वहां के लोगों को सम्मानजनक जीवन जीने के लिए ज़रूरी आम ज़रूरतों से महरूम रखना अंतरराष्ट्रीय मानवीय क़ानूनों का उल्लंघन है. इससे इलाक़े में ये संकट और गहरा होगा.

ईरान ने कहा, 'हमास का देंगे साथ'

रविवार को हमास के नेता इस्माइल हानिया ने क़तर में ईरान के विदेश मंत्री हुसैन अमीर अब्दुल्लाहियन से मुलाक़ात की है.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स में छपे हमास के एक बयान के मुताबिक़, अमीर-अब्दुल्लाहियन ने अपने लक्ष्यों को पूरा करने के लिए हमास के साथ सहयोग जारी रखने पर सहमति जताई है.

इधर रविवार को ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी ने क़तर के अमीर तमीम बिन हमद अल थानी से फ़ोन पर बात की है. इस दौरान ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि "इसराइल की ज़ायनिस्ट सरकार ने हाल के दिनों में जो किया है वो स्पष्ट तौर पर युद्ध अपराध, नरसंहार और अंतरराष्ट्रीय समझौतों का उल्लंघन है."

ईरान की सरकारी न्यूज़ एजेंसी आईआरएनए के अनुसार उन्होंने फ़लस्तीनी क्षेत्र में इसराइल की कार्रवाई को "मानवता के ख़िलाफ़ अपराध" करार दिया और कहा कि इसराइल को तुरंत अपने क़दम वापस लेने की ज़रूरत है.

उन्होंने एक बार फिर वही बात दोहराई जो उनके विदेश मंत्री ने की थी. उन्होंने कहा कि फ़लस्तीनियों की प्रतिक्रिया 70 साल से उनके इलाक़े पर हो रहे कब्ज़े और उनके पूजा के स्थलों के अपमान का नतीजा है.

उन्होंने अमेरिका और उसके सहयोगियों पर निशाना साधते हुए कहा कि अमेरिका और वो दूसरे मुल्क जो इसराइल की मुहिम में उसका साथ दे रहे हैं फ़लस्तीनी लोगों के ख़िलाफ़ अपराध के ज़िम्मेदार हैं.

राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी ने ओमान के सुल्तान हातिम बिन तारिक से बात की और बातचीत के दौरान कहा कि इसराइल 'वॉर मशीन' बन चुका है जिसे रोकने के लिए संयुक्त राष्ट्र, ओआईसी, अरब लीग और दूसरे अंतरराष्ट्रीय संगठनों को सामने आने की ज़रूरत है.

ईरान की ही तस्नीम न्यूज़ एजेंसी के अनुसार आयतुल्ला सैय्यद अली ख़ामेनेई ने तेहरान में इस्लामिक क्रांति से अगुआ इब्राहिम जकज़ाकी से मुलाक़ात की और कि "इस्लामिक दुनिया में ये सभी का दायित्व है कि वो फ़लस्तीनी लोगों की मदद करें."

इससे पहले इसराइल और हमास के बीच जंग छिड़ने के बाद ईरान और इराक़ ने ओआईसी की आपात बैठक बुलाने की गुज़ारिश की थी.

सोमवार को द्विपक्षीय रिश्तों पर चर्चा के लिए दोनों देशों ने विदेश मंत्रियों ने फ़ोन पर बात की थी जिस दौरान फ़लस्तीनी मुद्दे पर भी चर्चा हुई.

बातचीत में ईरान के विदेश मंत्री हुसैन अमिर अब्दुल्लाहियन ने कहा कि फ़लस्तीनी विद्रोही गुटों की कार्रवाई लंबे वक्त से चले आ रहे इसराइल के आक्रामक रवैये को लेकर प्रतिक्रिया है. मौजूदा तनाव को कम करने के लिए तुरंत ओआईसी की बैठक बुलाई जानी चाहिए.

संयुक्त राष्ट्र की अपील

यूनिसेफ़ ने रविवार को सोशल मीडिया एक्स पर लिखे एक पोस्ट में कहा कि मध्य पूर्व में बच्चों की स्थिति बेहद गंभीर है.

यूनिसेफ़ ग़ज़ा पट्टी में बच्चों की ज़रूरतों को पूरा करने की कोशिश कर रहा है लेकिन उन तक पहुंच पाना बेहद मुश्किल और ख़तरनाक होता जा रहा है.

बच्चों के लिए काम करने वाली संयुक्त राष्ट्र की इस संस्था ने हमलों पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है और कहा है कि बच्चों तक पहुंचने के लिए 'हमें मानवीय आधार पर हमलों पर रोक की ज़रूरत है.' यूनिसेफ़ के इस ट्वीट को संयुक्त राष्ट्र ने रीट्वीट किया है.

संयुक्त राष्ट्र ने भी रविवार को एक ट्वीट कर कहा कि ग़ज़ा में पीने का साफ पानी ख़त्म हो रहा है जिसके बाद यहां के 20 लाख लोग कुंओं का गंदा पानी पीने को बाध्य हो रहे हैं.

इसमें कहा गया कि सप्ताह भर से ग़ज़ा के लिए आ रही मानवीय मदद को वहां पहुंचने नहीं दिया गया है. संस्था ने मानवीय मदद पहुंचाने के लिए संघर्ष विराम की मांग की.

इससे पहले संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंटोनियो गुटेरेश ने कहा था, "युद्ध ही सही लेकिन इसके भी नियम होते हैं."

उन्होंने ग़ज़ा में जल्द से जल्द मानवीय मदद को पहुंचाने की मांग की और कहा कि वहां पानी, खाना और ईंधन की कमी हो गई है.

हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि ग़ज़ा में बंधक बनाकर रखे गए लोगों को तुरंत छोड़ा जाना चाहिए.

इससे पहले मानवीय मामलों के संयुक्त राष्ट्र के महासचिव मार्टिन ग्रिफ़ित्स ने ग़ज़ा के उत्तरी हिस्से को छोड़कर दक्षिणी हिस्से में जाने के इसराइल के आदेश को मानवता के ख़िलाफ़ कहा था.

उन्होंने कहा था, "पहले से ही महिला और बच्चों समेत डरे-सहमे आम लोगों को घनी आबादी वाले एक इलाक़े से निकल कर घनी आबादी वाले दूसरे इलाक़े में जाने को कहना, वो भी युद्ध रोके बिना और मानवीय मदद के बिना... न केवल ख़तरनाक़ है बल्कि क्रूर कदम है."

और मुल्कों का रुख़

इसराइल-हमास संघर्ष के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू और फ़लस्तीनी प्राधिकरण के राष्ट्रपति महमूद अब्बास से फ़ोन पर बातचीत की है.

बाइडन ने जहां इसराइल को अपना समर्थन जारी रखने का भरोसा दिया, वहीं उन्होंने महमूद अब्बास से बीते शनिवार को हमास की तरफ़ से इसराइल पर हुए हमले की निंदा करने की अपील की है.

बाइडन ने हमास के हमले को 'आतंकवादी हमला' करार दिया है और कहा है कि वो इसराइल, जॉर्डन और मिस्र के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र के साथ संपर्क में है ताकि हमास के हमले कS मानवीय परिणाम को कम किया जा सके.

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने भी हमास के हमले को आतंकी हमला करार दिया और कहा कि वो हमेशा इसराइल के साथ खड़े रहेंगे.

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा, "ये मध्य पूर्व में अमेरिका की नीति के नाकाम होने का एक उदाहरण है."

उन्होंने कहा कि उपनिवेशवादी ताक़तों ने फ़लस्तीनियों की हितों को नज़रअंदाज़ किया और ये अमेरिका की एकतरफा नीति का ही नतीजा है कि सालों साल स्थिति बद से बदतर हो गई है. उन्होंने स्वतंत्र फ़लस्तीन राष्ट्र बनाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया.

भारत का रुख़

रही बात भारत की तो हमास के हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे "आतंकवादी हमला" कहा और कहा, "हम इस कठिन समय में इसराइल के साथ एकजुटता से खड़े हैं."

इसके क़रीब पांच दिन बाद विदेश मंत्रालय ने कहा कि फ़लस्तीनियों और इसराइल को लेकर भारत के रुख़ में कोई बदलाव नहीं आया है.

मंत्रालय ने कहा कि भारत 'फ़लस्तीनियों के लिए स्वतंत्र और स्वायत्त देश फ़लस्तीन की मांग के समर्थन में है.'

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा, “भारत हमेशा से फ़लस्तीनी लोगों के लिए एक संप्रभु, स्वतंत्र देश फ़लस्तीन की स्थापना के लिए सीधी बातचीत करने की वकालत करता रहा है. एक ऐसा देश बने जिसकी अपनी सीमा हो और फ़लस्तीनी वहां सुरक्षित रह सके. जो इसराइल के साथ भी शांति के साथ रहे.”

शनिवार को चीनी विदेश मंत्रालय से प्रवक्ता वांग वेन्बिन ने कहा कि चीन हमेशा से न्याय और समता के पक्ष में है.

उन्होंने कहा कि चीन आम नागरिकों को किसी भी तरह नुक़सान पहुंचाने और अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों का उल्लंघन करने की कार्रवाई का समर्थन नहीं करता.

उन्होंने कहा कि चीन शांति वार्ता के पक्ष में है और संघर्ष विराम की हिमायत करता है. चीन तनाव कम करने और संघर्ष विराम के लिए कोशिश करता रहेगा.

एक सवाल के उत्तर में उन्होंने कहा कि चीन इस बात का समर्थन करता है कि संयुक्त राष्ट्र तनाव कम करने, स्थिति को और बिगड़ने से रोकने और अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों का पालन सुनिश्चित कराने में सक्रिय भूमिका ले.

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