इसराइल और फ़लस्तीनी मीडिया में क्या कुछ लिखा जा रहा है?

    • Author, दिलनवाज़ पाशा
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

इसराइल-हमास संघर्ष को अब आठ दिन हो गए हैं. इस संघर्ष में अब तक 1300 से अधिक इसराइली और 2300 से अधिक फ़लस्तीनी मारे जा चुके हैं.

इसराइल की सेना ग़ज़ा में ज़मीनी अभियान चलाने के लिए सीमा पर तैयार खड़ी है और ग़ज़ा में रहने वाले लोगों को उत्तरी इलाक़े छोड़ देने की चेतावनी दी गई है.

फ़लस्तीनी, इसराइली और मध्य पूर्व के मीडिया के अलावा दुनियाभर के मीडिया की कवरेज इससे जुड़े घटनाक्रमों पर ही केंद्रित है.

इस संघर्ष के आठवें दिन फ़लस्तीनी मीडिया की कवरेज ग़ज़ा में हो रही इसराइल की बमबारी और उससे जुड़ी तबाही और जानी नुक़सान पर केंद्रित रही.

इसराइल ने ग़ज़ा के लोगों को शनिवार शाम तक उत्तरी ग़ज़ा छोड़ने का अल्टीमेटम दिया. इससे जुड़े कई विश्लेषण भी प्रकाशित हुए हैं.

वहीं इसराइल के अंग्रेज़ी और हिब्रू मीडिया की कवरेज इसराइल की सैन्य तैयारियों, ग़ज़ा में प्रस्तावित ज़मीनी अभियान और हमास के हमले में मारे गए लोगों पर केंद्रित रही.

हमास के अग़वा किए गए लोगों के परिजनों ने तेल अवीव में प्रदर्शन किए हैं, इसराइली मीडिया ने इससे जुड़ी रिपोर्टें भी प्रकाशित की हैं.

इसराइल की सेना ने ग़ज़ा के अस्पतालों को भी खाली करने का नोटिस दिया है. ग़ज़ा के अल-क़ुद्स अस्पताल को इसराइल की सेना ने शाम चार बजे तक खाली करने की चेतावनी दी है. फ़लस्तीनी मीडिया में इससे जुड़ी कई रिपोर्टें प्रकाशित हुई हैं.

इसराइल के हारेत्ज़ अख़बार में प्रकाशित एक विश्लेषण में कहा गया है, ‘इसराइलः सरकार से वंचित आघात झेल रहा एक देश.’

इस लेख में 7 अक्तूबर को हुए हमास के घातक हमले के बाद देश के राजनीतिक हालात का विश्लेषण करते हुए कहा गया है कि ‘इसराइल में जो अराजकता पैदा हुई है वो एक तरह से पूरे देश को प्रेरित कर रही है. नेतन्याहू के लिए विभाजन कोई समस्या नहीं है, बल्कि ये उनकी स्थायी विशेषता है.’

वहीं इसराइल में विपक्ष के नेता याइर लेपिड ने आपातकालीन सरकार को आपदा कहा है.

हारेत्ज़ ने हमले को लेकर चल रही कॉन्सपिरेसी थ्योरी पर भी एक लेख प्रकाशित किया है और आशंका ज़ाहिर की है कि इस हमले में भीतरी लोग भी शामिल हो सकते हैं.

इसराइली सेना की नाकामी

इस लेख में अख़बार ने लिखा है कि कई कट्टरपंथी इसराइली ग़ज़ा युद्ध को आईडीएफ़ (इसराइली सेना) के शीर्ष अधिकारियों की नाकामी बता रहे हैं. इसराइल में इस समय ‘भीतरघातियों’ के बारे में भी ख़ूब सर्च किया जा रहा है.

इसराइल के चर्चित अख़बार टाइम्स ऑफ़ इसराइल ने एक संपादकीय में लिखा है कि ‘इसराइल राष्ट्र को नज़रअंदाज़ किया गया.’

इस लेख में कहा गया है कि इस संकट के लगभग हर पहलू में इसराइली ये महसूस कर रहे हैं कि उन्हें अकेला छोड़ दिया गया है और सरकार की खाली जगह को वो स्वयं भरने का प्रयास कर रहे हैं.

इसराइल ने संकेत दिए हैं कि वो अग़वा किए गए लोगों की परवाह किए बिना ही ग़ज़ा में ज़मीनी अभियान शुरू कर सकता है.

टाइम्स ऑफ़ इसराइल ने अपने लेख में कहा है, “हमें नहीं पता कि ग़ज़ा में कुल कितने अपहृत और शव हैं. अग़वा किए गए लोगों के परिजन अधिकारियों के सामने गिड़गिड़ा रहे हैं कि उन्हें स्पष्टीकरण दिया जाए, एक समय तो उनसे एक शीर्ष अधिकारी ने यह तक कह दिया कि अग़वा किए गए लोगों के विषय पर युद्ध के बाद बात होगी.”

“अब ये लोग उन इलाक़ों पर इसराइल की बमबारी देखने के लिए मजबूर हैं जहां उनके अपनों को अग़वा करके रखा गया होगा. ये अकल्पनीय स्थिति है.”

इस लेख में कहा गया है कि फ़लस्तीनियों के साथ क़ैदियों की अदला-बदली के लिए समझौते के विचार को इसराइल में इस समय बहुत समर्थन हासिल नहीं है. सिर्फ अगवा किए गए लोगों के परिवार ही अकेले नहीं हैं बल्कि जो लोग मारे गए हैं, उनके लिए भी राष्ट्र नदारद है.

इस लेख में कहा गया है कि अब तक हर अंतिम संस्कार में शामिल होते रहने वाले इसराइल के मंत्री इस बार अंतिम यात्राओं में जाने से बच रहे हैं क्योंकि शायद वो लोगों के ग़ुस्से का सामना करने से डर रहे हैं.

बुधवार सुबह पूर्व विज्ञान मंत्री इज़हार शाई के बेटे यारोन शाई के अंतिम संस्कार में इकोनॉमी मंत्री नीर बारकात शामिल हुए. उनकी मौजूदगी में शाई के भाई ओफिर ने इसराइल के प्रधानमंत्री और मंत्रियों पर भड़ास निकालते हुए कहा, “आपने सैनिकों को अकेला छोड़ दिया है, आपने ग़ज़ा की सीमा पर रहने वाले लोगों को अकेला छोड़ दिया. आपने इसराइल राष्ट्र को अकेला छोड़ दिया. आपने मेरे प्यारे भाई को अकेला छोड़ दिया.”

इसराइल के मीडिया में शुक्रवार शाम अचानक टीवी पर नेतन्याहू के दिए राष्ट्र के नाम संदेश को लेकर भी आलोचना हो रही है.

नेतन्याहू ने फैलाई बेचैनी

टाइम्स ऑफ़ इसराइल ने एक लेख में कहा है कि नेतन्याहू ने अचानक राष्ट्र के नाम संदेश की घोषणा की लेकिन इसमें कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं था.

अख़बार ने लिखा, “नेतन्याहू की घोषणा से देश में बेचैनी फैल गई, लेकिन उनके भाषण में कुछ भी ऐसा नहीं था जिसे तुरंत राष्ट्र को बताये जाने की ज़रूरत थी.”

अभी तक सिर्फ एक इसराइली राष्ट्रपति ने ही शबात के दिन राष्ट्र को संबोधित किया है. यहूदी शुक्रवार को आराम करने का दिन मानते हैं. नेतन्याहू के अलावा 1994 में प्रधानमंत्री इत्ज़ाक रबिन ने अग़वा किए गए सैनिक नैकशॉन वॉश्मैन को छुड़ाने के अभियान के नाकाम होने की जानकारी शबात को दिए संदेश में दी थी.

हिब्रू भाषा की सबसे चर्चित मीडिया वेबसाइट वाईनेट ने ग़ज़ा पर ज़मीनी हमले से पहले इसराइल की तैयारियों के बारे में विस्तार से लिखा है.

इस लेख में कहा गया है, “जनरल स्टाफ़ ने यूनिटों को ज़मीनी हमले की योजना से जुड़े निर्देश देने शुरू कर दिए हैं, तब तक एयरफोर्स हमास के कमांड सिस्टम और जवाबी हमले की क्षमता को नष्ट कर रही है. हिज़बुल्लाह अभी पीछे है लेकिन एक बार ग़ज़ा में इसराइल के घुसने के बाद उसके इरादों की परीक्षा होगी. इसराइल की रक्षात्मक क्षमता को पहुंची चोट की पृष्ठभूमि में अमेरिका से मिलने वाली मदद बेहद महत्वपूर्ण है. अमेरिका मिसाइलों को इंटरसेप्ट करने और ईरानी मिलिशिया पर हमला करने के लिए तैयार हैं, ताकि आईडीएफ़ ग़ज़ा में अपने अभियान पर ही केंद्रित रहे.”

शनिवार को इसराइल की वायुसेना ने ग़ज़ा के लोगों को उत्तरी इलाक़ा खाली करने की चेतावनी भी दी.

वाईनेट ने लिखा है कि ये चेतावनी ‘ग़ज़ा में हमले को वैधता देने के लिए दी गई है ताकि इसराइल बाइडन प्रशासन और पश्चिमी देशों को ये तर्क दे सके कि इसराइल अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों का पालन करते हुए कार्रवाई कर रहा है.’

फ़लस्तीनी मीडिया में क्या चल रहा है?

फ़लस्तीनी मीडिया में इसराइली हमलों में मरने वालों की बढ़ती संख्या, ग़ज़ा में पैदा हो रहे मानवीय संकट और वैश्विक प्रतिक्रियाओं का ज़िक्र है.

पेलेस्टाइन क्रॉनिकल ने ‘हमास के इसराइली बच्चों की हत्या करने के दावों’ पर सीएनएन की रिपोर्टर के माफ़ी मांगने से जुड़ी ख़बर प्रकाशित की है.

सीएनएन की रिपोर्टर सारा सिडनर ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर माफ़ी मांगते हुए कहा था कि उन्हें इसराइल के इस दावे की और सतर्कता से पड़ताल करनी चाहिए थी.

फ़लस्तीनी मामलों पर नज़र रखने वाली वेबसाइट मोंडोवाइज में अपना अनुभव लिखते हुए एक रिपोर्टर ने लिखा है, “मैंने नकबा के बारे में बहुत सी कहानियां लिखीं थीं, आज मैंने नकबा का अनुभव किया.”

नकबा शब्द का मतलब होता है त्रास्दी और फ़लस्तीनी लोग इसे 1948 में अपनी ज़मीनों से ज़बरदस्ती हटाये जाने की घटनाओं से जोड़कर देखते हैं.

रिपोर्टर तारिक एजाज़ ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, “शुक्रवार सुबह इसराइल की सेना के घर छोड़कर चले जाने के कॉल के साथ हमारी आंख खुली.”

एजाज़ लिखते हैं, “शुक्रवार सुबह इसराइल के एक नंबर से मुझे फोन आया. मैंने ये फोन नहीं उठाया क्योंकि मैं एक बहुत अशांत रात से उबरने की कोशिश कर रहा था. जिस घर में ख़ौफ़ज़दा बच्चे हों उसमें नींद लेना आसान नहीं है. हर गिरते बम पर वो चीखते हैं. आसपास जो हो रहा है, उसे समझना मुश्किल हो जाता है. मैं जानना चाहता हूं कि बम कहां गिरा, कौन मरा, लेकिन मुझे बच्चों को शांत करना पड़ता है.”

इस रिपोर्ट में लिखा है, “कुछ मिनट बाद फिर से फोन आया, इस बार मैंने उठा लिया और इसराइली सेना का संदेश सुना- तुम्हें अपना घर खाली करना होगा, दक्षिण की तरफ़ जाओ. अपनी ज़िंदगी के लिए तुम ही ज़िम्मेदार हो.”

“मैं फिर से सो गया, बाद में मेरी आंख एक भीषण धमाके से खुली. इसके बाद जो घटनाक्रम हुआ वो बम धमाके से भी ज़्यादा ख़तरनाक था. 1948 में जो लोगों ने अनुभव किया था, उसे आज मैंने जिया. ये दूसरा नकबा है.”

'ख़ामोश लोगों का नरसंहार'

हमास और इस्लामिक जेहाद से जुड़ी वेबसाइट क़ुद्स न्यूज़ नेटवर्क ने अपनी एक रिपोर्ट में हिज़बुल्लाह के शेबा फार्म्स इलाक़े पर ‘बड़े हमले’ का ज़िक्र किया है.

इस रिपोर्ट में हिज़बुल्लाह के हवाले से इसराइली सेना के कई ठिकानों पर हमले का दावा करते हुए कहा गया है कि रॉकेट निशाने पर लगे. इसके बाद हिज़बुल्लाह और इसराइली सेना के बीच गोलीबारी और बमबारी भी हुई.

वहीं अपने आप को स्वतंत्र मीडिया बताने वाली फलस्तीनी मुद्दों पर केंद्रित और शिकागो से संचालित वेबसाइट इलेक्ट्रॉनिक इंतीफादा ने अपना कवरेज फ़लस्तीन के मानवीय संकट पर केंद्रित रखा है. वेबसाइट ने अपने एक लेख में लिखा है, “ख़ामोश लोगों का नरसंहार.”

इस लेख में रिपोर्टर ने लिखा है, “जब ग़ज़ा की तरफ़ से इसराइल पर हमला हुआ तब मैं निश्चिंत था कि समूचे ग़ज़ा को इसकी क़ीमत चुकानी होगी. इसराइल के प्रधानमंत्री ने ग़ज़ा के लोगों को तुरंत यहां से चले जाने की चेतावनी दी, लेकिन हम कहां जाएं. हम राफ़ा चौकी की तरफ़ गए, वहां भी हमले हुए. लाखों लोग प्रभावित हैं, लेकिन उनके पास कहीं जाने की जगह नहीं है. ग़ज़ा में जो हो रहा है, वह ख़ामोश लोगों का नरसंहार है.”

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