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हमास से संघर्ष में लगे इसराइल को ईरान की चेतावनी, आख़िर क्या है इरादा
- Author, दिलनवाज़ पाशा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
इसराइल पर 7 अक्टूबर (शनिवार) को हमास के अचानक और भीषण हमले के बाद से मध्यपूर्व में परिस्थितियां तेज़ी से बदल रही हैं.
हमास के हमले में अब तक 1400 से अधिक इसराइली नागरिकों की मौत के बाद अब ग़ज़ा पर इसराइल की बमबारी को 8 दिन हो गए हैं. ग़ज़ा में अब तक 2300 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं जिनमें एक तिहाई के क़रीब बच्चे हैं.
इसराइली सेना के तीन लाख से अधिक जवान ग़ज़ा की सीमा पर तैनात हैं. इसराइल ने टैंकों और तोपखानों के अलावा भारी हथियार तैनात किए हैं. हालांकि इसराइली सेना ने अभी तक ग़ज़ा पर अपना प्रतीक्षित 'ज़मीनी हमला' शुरू नहीं किया है.
इसी बीच, ईरान के विदेश मंत्री हुसैन अमीर अब्दुल्लाहियन मध्य पूर्व के नेताओं से मिल रहे हैं. इराक़ और सीरिया के दौरे के बाद ईरानी विदेश मंत्री शनिवार को लेबनान और क़तर पहुंचे.
उन्होंने इसराइल से ग़ज़ा में हमले रोकने का आह्वान किया और चेतावनी दी कि अगर 'लेबनान का हिज़बुल्लाह इसमें शामिल होता है तो ये संघर्ष मध्य पूर्व के अन्य इलाक़ों में भी फैल सकता है.'
उन्होंने कहा, “अगर ऐसा हुआ तो इसराइल को बड़े भूकंप का सामना करना पड़ेगा.”
शनिवार को लेबनान की राजधानी बेरूत में पत्रकारों से बात करते हुए ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि हिज़बुल्लाह ने संघर्ष की सभी स्थितियों का आंकलन किया है और इसराइल को तुरंत ग़ज़ा पर हमले बंद करने चाहिए.
वहीं अमेरिकी न्यूज़ वेबसाइट एक्सियोस ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि ईरान ने संयुक्त राष्ट्र के ज़रिए इसराइल को संदेश दिया है कि अगर ग़ज़ा में इसराइल का अभियान जारी रहा तो ईरान को दख़ल देना पड़ेगा, ख़ासकर अगर इसराइल ग़ज़ा पर ज़मीनी हमला करता है.
एक्सियोस ने राजयनिक सूत्रों के हवाले से ये ख़बर दी है. ईरान का ये संदेश ऐसे समय में आया है जब अमेरिका ईरान और हिजबुल्लाह को ग़ज़ा संघर्ष में शामिल होने से रोकने की कोशिश कर रहा है.
अमेरिका के दो युद्धपोत इसराइल को समर्थन देने के लिए जंगी बेड़ों के साथ मध्य पूर्व में पहुंच चुके हैं.
जानकारों की राय है कि ईरान अगर हमास-इसराइल संघर्ष में किसी भी तरह शामिल होता है तो इससे संघर्ष के मध्य पूर्व के अन्य इलाक़ों में फैलने का ख़तरा पैदा हो जाएगा.
हमास के अधिकारियों से मुलाक़ात
इसी बीच लेबनान-इसराइल बॉर्डर पर हिज़बुल्लाह की तरफ़ से मिसाइलें दागे जाने और इसराइल की जवाबी बमबारी की ख़बरें हैं. इसराइली मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक एक गांव पर हिज़बुल्लाह के मिसाइल हमले में एक नागरिक की जान गई है और कई घायल हुए हैं.
इसराइल ने लेबनान की तरफ़ से हमलों के बाद लेबनान सीमा से सटे चार किलोमीटर के इलाक़े को बफ़र ज़ोन घोषित कर दिया है और यहां से आबादी को हटा लिया है.
ईरानी विदेश मंत्री अमीर अब्दुल्लाहियन ने शनिवार को बेरूत में हिज़बुल्लाह के नेता हसन नसरल्लाह से मुलाक़ात के बाद कहा था, “ग़ज़ा के नागरिकों के ख़िलाफ़ अपराध बंद करो, क्योंकि कुछ ही घंटों में बहुत देर हो जाएगी.”
उन्होंने कहा, “मैं उन स्थितियों के बारे में जानता हूं जिनकी तैयारी हिज़बुल्लाह ने की है. अब हिज़बुल्लाह जो क़दम उठायगा उससे इसराइल के लिए बड़ा भूकंप आएगा.”
बेरूत के बाद ईरानी विदेश मंत्री क़तर की राजधानी दोहा पहुंचे और यहां उन्होंने फ़लस्तीनी क्षेत्र के राजनीतिक ब्यूरो के प्रमुख इस्माइल हानिया से मुलाक़ात की. ईरानी विदेश मंत्री ने क़तर के विदेश मंत्री और प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन अब्दुलर्रहमान बिन जासिम अल थानी से भी मुलाक़ात की.
हमास के नेता से हुई मुलाक़ात किसी ईरानी अधिकारी और हमास अधिकारी के बीच 7 अक्तूबर को इसराइल पर हुए हमास के हमले के बाद पहली मुलाक़ात है.
क़तर पहुंचने से पहले ईरानी विदेश मंत्री इराक़, सीरिया और लेबनान में राजनीतिक नेताओं से मुलाक़ात कर चुके हैं. उनकी वार्ताएं ग़ज़ा में जारी संघर्ष पर ही केंद्रित रही हैं.
इसी बीच ईरान के राष्ट्रपति इब्राहीम रईसी ने कहा है कि इसराइल ग़ज़ा में जो क़दम उठा रहा है वो 'युद्ध अपराध और नरसंहार के बराबर हैं.'
ग़ज़ा को लेकर ईरान की रणनीति
हमास के इसराइल पर हमले के बाद से ही ईरान लगातार इसराइल की निंदा कर रहा है और तर्क दे रहा है कि ये हमला इसराइल की नीतियों की वजह से हुआ है.
ईरान ने कहा है कि इसराइल ने दशकों से फ़लस्तीनियों के अधिकारों का दमन किया है और ये हमला उसी का नतीजा है.
ईरान का आरोप है कि इसराइल ने वेस्ट बैंक में भी फ़लस्तीनियों पर हमले किए हैं और इसराइल की सेना ने ‘लगातार फ़लस्तीनियों को अपमानित किया है.’
ईरान ने ये संकेत भी दिए हैं कि वो इस संघर्ष में हमास के साथ है. हमास के कई नेताओं ने अपने बयान में ये माना है कि ईरान से उन्हें मदद मिली है.
संयुक्त अरब अमीरात और मोरक्को से राजनयिक संबंध बहाल होने के बाद सऊदी अरब और इसराइल के बीच अमेरिका की मध्यस्थता में इसराइल के साथ वार्ता किए जाने की ख़बरें भी आती रही हैं.
हमास के हमले से पहले ही ईरान के सर्वोच्च नेता आयातुल्लाह अली ख़ामेनेई ने सऊदी अरब को चेताते हुए कहा था कि इसराइल के साथ वार्ता भारी पड़ेगी.
ऐसी रिपोर्टें हैं कि सऊदी अरब ने हमास के हमले और इसराइल के जवाबी हमले के बाद इसराइल के साथ वार्ता रोक दी है.
इस्लामी दुनिया का नेतृत्व चाहता है ईरान?
ग़ज़ा पर इसराइली हवाई हमलों के बाद ईरान की राजधानी तेहरान समेत कई शहरों में फ़लस्तीनियों के समर्थन में बड़े प्रदर्शन हुए हैं.
विश्लेषक मानते हैं कि मौजूदा हालात में ईरान एक ऐसे राष्ट्र के रूप में उभरना चाहता है जो इस्लामी दुनिया के नेतृत्व का मज़बूती से दावा कर सके.
दिल्ली की जवाहर लाल यूनिवर्सिटी में प्रोफ़ेसर और मध्य पूर्व मामलों के विशेषज्ञ प्रोफ़ेसर कमाल पाशा कहते हैं, “ईरान ये साबित करना चाहता है कि वो फ़लस्तीनी मुद्दे को ज़ोर-शोर से उठा रहा है और इस पर खुला स्टैंड ले रहा है. फ़लस्तीनी मुद्दा एक इस्लामिक मुद्दा है, ईरान हमास का खुला समर्थन करके ये संदेश भी दे रहा है कि अरब जगत के अन्य राष्ट्र अमेरिका के पीछे चलते हैं और वो कुछ नहीं कर पाएंगे और वह ही अकेला ऐसा बड़ा राष्ट्र है जो फ़लस्तीनियों के साथ खड़ा रहेगा.”
इसराइल की वायुसेना पिछले आठ दिनों से लगातार ग़ज़ा पर बमबारी कर रही है. ग़ज़ा का एक बड़ा हिस्सा पूरी तरह तबाह हो गया है. इसराइल ने ग़ज़ा के लिए बिजली और खाद्य सामान के अलावा पानी की आपूर्ति भी रोक दी है. ग़ज़ा के कई अस्पतालों में भी बिजली नहीं है. बमबारी से बचने के लिए हज़ारों लोगों ने अस्पतालों में शरण ली है. कई अस्पतालों पर भी बम गिरने की रिपोर्टें हैं.
इसी बीच इसराइल ने फ़लस्तीनियों की एक बड़ी आबादी से ग़ज़ा को छोड़कर मिस्र की तरफ़ जाने के लिए कहा है.
प्रोफ़ेसर पाशा कहते हैं, “ईरान ये संदेश देना चाहता है कि ऐसे समय में जब अरब जगत के देश खुलकर फ़लस्तीनियों के साथ आने से हिचक रहे हैं, वह अकेला ऐसा राष्ट्र है जो इसराइल को हिज़बुल्लाह या हमास को फिर से ताक़तवर करके काबू में कर सकता है.”
ईरान ने हाल के दिनों में संकेत दिए हैं कि अगर ग़ज़ा पर ज़मीनी हमला होता है तो वो दख़ल देगा. ईरान ने ये भी कहा है कि अमेरिका भी सीधे तौर पर ग़ज़ा संघर्ष में इसराइल की तरफ़ से शामिल हो सकता है.
अमेरिका के दो विमानवाहक पोतों के साथ बड़ा युद्धक बेड़ा इस समय मध्य पूर्व में है और अमेरिकी अधिकारियों ने बयानों में कहा है कि अमेरिका इसराइल की मदद करने के लिए पूरी तरह तैयार है.
अमेरिका ने इसी बीच इसराइल के लिए हथियार भी भेजे हैं. हिब्रू मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक़ रविवार को भी अमेरिका से हथियार इसराइल पहुंचे हैं.
क्या सीधे संघर्ष में शामिल होगा ईरान?
ऐसे में ये सवाल उठता है कि क्या ईरान सीधे तौर पर इस संघर्ष में शामिल हो सकता है?
विश्लेषक मानते हैं कि जब तक ईरान के ठिकानों को सीधे तर पर निशाना नहीं बनाया जाएगा तब तक ईरान की सेना संघर्ष में तो सीधे शामिल नहीं होगी लेकिन हिज़बुल्लाह और सीरिया में सक्रिय समूहों के ज़रिये दख़ल देती रहेगी.
प्रोफ़ेसर पाशा कहते हैं, “ईरान ये समझकर चल रहा है कि इसराइल हमास को आसानी से नहीं कुचल पाएगा. अभी भी हमास के पास काफ़ी रॉकेट हैं. हिजबुल्लाह के पास भी हज़ारों रॉकेट हैं. यही नहीं सीरिया में भी सक्रिय समूह हैं. ईरान ये समझकर चल रहा है कि उसका पलड़ा भारी होगा क्योंकि अमेरिका सऊदी अरब, मिस्र या तुर्की जैसे अन्य देशों के साथ मिलकर भी कुछ नहीं कर पाएगा.”
हालांकि प्रोफ़ेसर पाशा मानते हैं कि ईरान तब तक इस संघर्ष में सीधे तौर पर शामिल नहीं होगा जब तक उसके ठिकानों को निशाना नहीं बनाया जाएगा.
प्रोफ़ेसर पाशा कहते हैं, “ईरान अपने प्रभाव वाले समूहों के ज़रिए ही इसराइल के बॉर्डर पर काफ़ी हलचल करने की क्षमता रखता है, ऐसे में जब तक ईरान पर सीधा हमला नहीं होगा, ये संभावना कम ही है कि ईरान सीधे तौर पर संघर्ष में शामिल हो.”
मध्य पूर्व में इस समय परिस्थितियां तेज़ी से बदल रही हैं, सऊदी अरब ने कहा है कि उसने ग़ज़ा में शांति लाने के लिए प्रयास तेज़ कर दिए हैं. सऊदी ने इस्लामिक देशों के संगठन की बुधवार को ग़ज़ा मुद्दे पर चर्चा के लिए बैठक भी बुलाई है.
इन बढ़ती हलचलों के बीच, ईरान सधे हुए क़दम रख रहा है और सीधे और स्पष्ट संकेत भी दे रहा है.
फिलहाल लेबनान-इसराइल बॉर्डर पर गतिविधियां तेज़ हुई हैं. रविवार को ही हिज़बुल्लाह ने इसराइल की तरफ़ तीन मिसाइल हमले किए हैं. अब आगे जो भी होगा उसमें ईरान की भूमिका और अधिक अहम हो जाएगी.
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