चीन ने भारत पर लगाए अमेरिकी टैरिफ़ का विरोध करते हुए कहा, 'अमेरिका की ये धमकाने वाली हरकत'

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग

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इमेज कैप्शन, 2019 के जी-20 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ (फ़ाइल फ़ोटो)
    • Author, चेरिलान मोल्लान
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़, मुंबई

भारत के लिए चीन के राजदूत शू फ़ेहॉन्ग ने कहा है कि भारत पर लगाए अमेरिका के टैरिफ का चीन "दृढ़ता से विरोध" करता है. उन्होंने कहा, कि चीन और भारत के बीच अधिक साझेदारी होनी चाहिए.

शू फ़ेहॉन्ग ने अमेरिका की तुलना एक "बुली" (दबंग) से की और कहा कि फ़्री ट्रेड से अमेरिका को हमेशा लाभ मिलता रहा है लेकिन अब वो "सौदेबाज़ी के हथियार" के रूप में टैरिफ़ का इस्तेमाल दूसरे मुल्कों से "अधिक क़ीमत वसूलने" के लिए कर रहा है.

गुरुवार को उन्होंने कहा, "अमेरिका ने भारत पर 50 फ़ीसदी तक का टैरिफ़ लगाया है और इसे और बढ़ाने की धमकी भी दी है. चीन इसका कड़ा विरोध करता है. चुप रहने से दबंग को और हौसला मिलता है."

इससे पहले इसी महीने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 25 फ़ीसदी का टैरिफ़ लगाया था. बाद में उन्होंने ये कहकर भारत पर और 25 फ़ीसदी टैरिफ़ लगा दिया कि भारत रूस से तेल और हथियार खरीदकर यूक्रेन के ख़िलाफ जंग में उसकी मदद कर रहा है . ये नई दर 27 अगस्त से लागू होगी.

रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से भारत ने रूस से सस्ते कच्चे तेल का आयात बढ़ा दिया था. इससे अमेरिका के साथ भारत के रिश्तों में तनाव बढ़ गया और दोनों के बीच हो रही व्यापार वार्ता भी प्रभावित हुई.

भारत रूस से तेल खरीदने के अपने फ़ैसले का बचाव ये कहकर करता है कि एक बड़े ऊर्जा आयातक के रूप में उसे जहां से सबसे सस्ता तेल मिलेगा, वो वहां से खरीदेगा. भारत का कहना है कि करोड़ों ग़रीब भारतीयों को बढ़ती लागत से बचाने के लिए ये ज़रूरी है.

भारत यह भी कहता है कि ट्रंप से पहले, बाइडन प्रशासन ने ही भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए कहा था, ताकि वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में स्थिरता रह सके.

चीन के साथ बढ़ती नज़दीकियां

शू फ़ेहॉन्ग

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अमेरिका के साथ भारत के कमज़ोर होते व्यापारिक रिश्तों के बीच भारत और चीन के संबंधों में तेज़ी से सुधार होता दिख रहा है.

साल 2020 में लद्दाख की गलवान घाटी में सैन्य झड़पों के बाद दोनों के बीच तनाव बढ़ गया था. सीमा पर पैदा हुआ ये तनाव अभी पूरी तरह ख़त्म नहीं हुआ है, लेकिन चीन और भारत धीरे-धीरे रिश्ते सामान्य बनाने की दिशा में काम करते दिख रहे हैं.

इस हफ़्ते की शुरुआत में चीन के विदेश मंत्री वांग यी दो दिन के दौरे पर दिल्ली पहुंचे थे. इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत और चीन को एक-दूसरे को "साझेदार" के रूप में देखना चाहिए, न कि "प्रतिद्वंद्वी या ख़तरे" के रूप में.

इसके बाद गुरुवार को चीन के वरिष्ठ राजनयिक शू फ़िहॉन्ग ने भी इसी तरह का बयान दिया है. उन्होंने भारत और चीन को एशिया की आर्थिक तरक्की के लिए "डबल इंजन" बताया और कहा कि दोनों देशों की एकता से पूरी दुनिया को फ़ायदा मिलेगा.

शू फ़ेहॉन्ग ने क्या कहा?

शू फ़ेहॉन्ग
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शू फ़ेहॉन्ग ने चीन में अधिक निवेश के लिए भारतीय कंपनियों को आमंत्रित किया और उम्मीद जताई कि चीन की कंपनियों को भारत में "न्यायपूर्ण, निष्पक्ष और गै़र-भेदभावपूर्ण माहौल में काम करने के मौक़े" मिलेंगे. उन्होंने कहा कि इससे दोनों देशों के लोगों को लाभ होगा.

उन्होंने भारत और अन्य मुल्कों पर लगाए अमेरिका के टैरिफ़ की तरफ इशारा करते हुए कहा, "मौजूदा वक्त में टैरिफ़ वॉर और ट्रेड वॉर वैश्विक आर्थिक और व्यापारिक व्यवस्था को प्रभावित कर रहे हैं, ताकत की राजनीति और जंगल के क़ानून हावी हैं और इस कारण अंतरराष्ट्रीय नियमों और विश्व व्यवस्था को गंभीर झटका लगा है."

उन्होंने कहा, "विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) को केंद्र में रखकर मल्टीलेटरल ट्रेड सिस्टम (बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था) को बनाए रखने की दिशा में भारत के साथ चीन मज़बूती से खड़ा रहेगा."

शू फ़ेहॉन्ग ने यह भी कहा कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आगामी चीन यात्रा "भारत और चीन के संबंधों में नई ऊर्जा भरेगी."

पीएम मोदी चीन के तियानजिन में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले हैं. ये बैठक 31 अगस्त से एक सितंबर तक होनी है और इसमें कम से कम 20 मुल्कों के प्रतिनिधि शामिल होंगे.

बीते सात सालों में ये मोदी का पहला चीन दौरा होगा. इस दौरान उनकी मुलाक़ात चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी होनी है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित