राजकुमार कोहली: हिट फ़िल्मों का फ़ॉर्मूला और बॉक्स ऑफ़िस पर नज़र थी जिनकी ख़ासियत

राजकुमार कोहली

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    • Author, राजपाल राजे
    • पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए

कभी बॉलीवुड के हिट फ़िल्मों को बनाने वाले फ़िल्मकार राजकुमार कोहली का शुक्रवार को मुंबई में 94 साल की उम्र में निधन हो गया.

तड़क भड़क वाली फ़िल्मी दुनिया में एक तरह से वे इन दिनों गुमनामी के दौर में ही थे लेकिन एक ऐसा भी दौर था जब मल्टीस्टारर फ़िल्मों के वे राजा कहलाते थे.

वे 'घनघोर' व्यावसायिक फ़िल्मकार थे यानी केवल और केवल बॉक्स ऑफ़िस पर कमाई को ध्यान में रखते हुए फ़िल्में बनाते थे. हालांकि कवायद तो सारे फ़िल्मकारों की यही होती है लेकिन राजकुमार कोहली इसमें थोड़े ज़्यादा किस्मत वाले थे.

राजकुमार कोहली लाहौर में पैदा हुए और 1963 में मुंबइया फ़िल्मों में आए. उन्होंने अपनी शुरुआत पंजाबी फ़िल्म से की.

प्रेमनाथ और निशी को लेकर पहली फ़िल्म बनायी. फिर दारा सिंह और निशी को लेकर लुटेरा बनाई. इन्हीं निशी से उन्होंने बाद में शादी की. प्रेम चोपड़ा को भी पहली बार हीरो के रूप में पर्दे पर उतारा. अभिनेत्री निशी से बाद में उन्होंने शादी की.

वैसे दिलचस्प ये है कि उनकी फिल्मों की कहानियां अंतरराष्ट्रीय उपन्यासों से ली जाती रहीं लेकिन इंटरनेट से पहले वाले जमाने में ये काम दूसरे फ़िल्मकार भी बखूबी करते रहे थे. लेकिन राजकुमार कोहली की सबसे बड़ी खूबी थी कि वे बड़े कैनवास और सेटअप वाली कथाओं को पर्दे पर भव्य ढंग से उतारने में सक्षम साबित हुए.

राजकुमार कोहली (दाएं) अपनी पत्नी और बेटे अरमान कोहली (बीच में) के साथ

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उन्होंने कई सारी मल्टीस्टारर फिल्मों को बिना लेटलतीफ़ी के अपने निर्धारित सही समय में बनाकर दिखाया, ये ऐसा प्रबंधन था कि जिसे देखकर मुंबई के दूसरे बड़े फिल्मकार भी हिल गये थे.

राजकुमार कोहली को आज जिन फ़िल्मों से जाना जाता है वे तीन बड़े सेटअप वाली फ़िल्में हैं- 'नागिन', 'जानी दुश्मन' और 'गोरा और काला'. इनमें 'गोरा और काला' सबसे पहले रिलीज़ हुई थी, जिसके वे प्रॉड्यूसर थे.

राजेंद्र कुमार के डबल रोल, हेमामालिनी और रेखा की ये फ़िल्म बेहद कामयाब रही. यह वही साल था जब हेमामालिनी के डबल रोल वाली 'सीता और गीता' ने बॉक्स ऑफ़ पर सबसे ज़्यादा कामयाबी हासिल की थी.

'गोरा और कोला' के समय में राजेंद्र कुमार टॉप स्टार थे और राजकुमार कोहली दस साल तक पंजाबी और कम बजट की फ़िल्में प्रोड्यूस करने के बाद अपनी पहली बड़ी फ़िल्म से कामयाबी का स्वाद चखा था.

इस फ़िल्म की कहानी वैसे तो 1971 में आई तमिल फ़िल्म 'नेरूप्पम' से ली गई थी लेकिन तमिल फ़िल्म भी मूल रूप से फ्रांसीसी उपन्यासकार एलेक्जेंडर डुमास की फिक्सन 'द क्रासिकन ब्रदर्स' पर आधारित थी.

इसकी कामयाबी से राजकुमार कोहली का हौसला ऐसा बढ़ा कि उन्होंने अगले ही साल फ़िल्म निर्देशन का ज़िम्मा भी संभाल लिया. विनोद मेहरा और माला सिन्हा की ये फ़िल्म नाकाम हो गई और इस सदमे से उबरने में राजकुमार कोहली को तीन साल लगे. लेकिन विदेशी उपन्यास और फ़िल्मों के आइडियाज़ पर उनका ध्यान लगा रहा.

गोरा और काला

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अमेरिकी उपन्यासकार कार्नेल वूलरिच के उपन्यास 'द ब्राइड वोर ब्लैक' पर उन्होंने 'नागिन' फ़िल्म का प्लॉट तैयार किया.

इस फ़िल्म के लिए उन्होंने सुनील दत्त, फ़िरोज़ ख़ान, जीतेंद्र, संजय ख़ान, रेखा, मुमताज, कबीर बेदी और रीना रॉय को चुना.

रीना रॉय इस फ़िल्म में नागिन की भूमिका में थी, उनके पूरे करियर में इससे ज़्यादा मशहूरी किसी दूसरे किरदार से नहीं मिली.

इस फ़िल्म की कामायबी के बाद उनकी हैसियत सुपरस्टार जैसी हो गई थी.

इसी स्टार कास्ट में थोड़ा बदलाव करते हुए और शत्रुध्न सिन्हा, नीतू सिंह और विनोद मेहरा को शामिल करते हुए राजकुमार कोहली ने 'जानी दुश्मन' बनाई.

अमिताभ बच्चन के स्टारडम के सामने भी ये फ़िल्म ना केवल सुपरहिट साबित हुई बल्कि हॉरर मूवी के तौर पर लोगों के जेहन में आज भी ठहरी हुई है. इसी फ़िल्म का गाना 'चलो रे, डोली उठाओ कहार पिया मिलन की रुत आई...' आज भी शादियों में खूब बजता है.

फ़िल्म जानी दुश्मन का पोस्टर

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'नागिन' और 'जानी दुश्मन' से जो कामयाबी राजकुमार कोहली को मिली, वो उसे आगे नहीं दोहरा सके.

हालांकि 'नौकर बीवी का' ज़रिए उन्होंने 1983 में एक बार फिर ब्लॉक बस्टर सिनेमा ज़रूर बनाया लेकिन वे फिर से वैसा जादू नहीं दोहरा सके.

लेकिन राजकुमार कोहली की सबसे बड़ी खूबी थी कि उनकी फ़िल्मी दुनिया में गहरी पैठ थी. ख़ासकर पंजाबी समुदाय के कलाकारों से हर बड़े अभिनेता को उन्होंने अपनी फिल्मों में लिया. दर्जनों बड़े अभिनेता एक साथ उन्हें डेट्स देते रहे.

सुनील दत्त और धर्मेंद्र जैसे अभिनेताओं से उनका घरेलू रिश्ता बन गया था. इसका कारण था उनका व्यवहार.

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अस्सी के दशक में फ़िल्म पत्रकारों के बीच ये किस्सा बड़ा मशहूर था कि राजकुमार कोहली खुद बैग लेकर कलाकारों के घर जाते थे और अपने हाथ से उन्हें तय पैसा देते थे. इससे उन्हें एकदम खरा कारोबारी का खिताब मिला हुआ था.

नाकामी ने उन्हें लाइम लाइट से दूर ज़रूर कर दिया था लेकिन जीवन भर उनका यह अंदाज़ चला. ही मैन के नाम से मशहूर धर्मेन्द्र जब एक्शन हीरो की भूमिका निभा रहे थे उस दौर में राजकुमार कोहली ने उन्हें 'नौकर बीवी का' जैसी हास्य फ़िल्म में काम लिया जिसमें अनीता राज जैसी नयी अभिनेत्री को अपने से 40 साल बड़े धर्मेंद्र के साथ उतारा और फ़िल्म बाक्स आफ़िस पर भी खासी हिट हुई.

बाद के दौर में वे अपने पुत्र के लिए इन्हीं फार्मूलों को आजमाने लगे तो वे लगातार फेल हुए और अरमान कोहली भी अभिनेता नहीं बन पाए. जिन दर्शकों ने कोहली की फिल्मों को देखा है तो वह एक बात से सहमत होंगे कि उनकी फ़िल्में जनमानस को बहुत गहरे तक जोड़े रखती हैं. उनके नकली गांव या नकली घटनाएं भी दर्शकों को कभी खले नहीं.

उनकी फिल्मों का संपादन ऐसा होता था कि दर्शक को सोचने का मौका ही हाथ न लगे. स्पीड बहुत तेज़. मधुर संगीत. बस इसी दम पर खेल जाते थे राजकुमार कोहली.वे कोई यादगार फिल्मकार भले ही नहीं रहे हों लेकिन लोकप्रिय सिनेमा की जब भी बात होगी, उनका भी जिक्र होगा.

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