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'वो गोद से बच्चे को खींच ले गया', बहराइच के गांवों में भेड़ियों का ख़ौफ़- ग्राउंड रिपोर्ट
- Author, सैय्यद मोज़िज इमाम
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, बहराइच से
"हम मसाला पीस रहे थे. बच्चा अपनी बहन की गोद में बैठा खा रहा था. तभी दो जानवर आए और बच्चे को खींच ले गए. हम एक तरफ से पकड़े थे लेकिन जब दूसरा जानवर हम पर झपटा तो बच्चा हाथ से छूट गया."
कांपती आवाज़ में यह वाक़या सुनाती हैं अनीता, जिनके तीन साल के बेटे को 20 सितंबर की सुबह अचानक भेड़िया घर के आंगन से खींच ले गया था.
तब से बच्चे का पता नहीं चला है. अनीता का पूरा परिवार सदमे में है.
लखनऊ से तक़रीबन 150 किलोमीटर दूर बहराइच ज़िले की कैसरगंज तहसील के कुछ गांवों में इन दिनों डर का माहौल है. वजह है भेड़िया, जो दिन और रात दोनों वक्त हमला कर रहा है.
बहराइच के डीएफ़ओ राम सिंह यादव ने बीबीसी से कहा, "ये हमला भेड़िया ही कर रहा है. इसको हमारे ड्रोन कैमरे में देखा गया है. गांव वालों ने वीडियो भी बनाया है."
अनीता के घर पर जब बीबीसी की टीम 23 सितंबर को पहुंची, तभी पास के बाबा बंग्ला गांव (सिर्फ़ 300 मीटर की दूरी पर) से अचानक शोर उठने लगा. वहां लोग चीख रहे थे, महिलाएं रो रही थीं. दरअसल, भेड़िए ने दोपहर करीब एक बजे यहां भी तीन साल के बच्चे को मां की गोद से छीन लिया था.
गांव वालों ने हिम्मत दिखाते हुए भेड़िए का पीछा किया. लोगों की भीड़ के सामने भेड़िया बच्चे को छोड़कर भाग गया. इसके बाद बच्चे को अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी हालत गंभीर है और इलाज चल रहा है.
इसके बाद 24 सितंबर को पास के बाबा बटाव गांव में भी एक बच्ची पर हमला हुआ. यहां भी ग्रामीणों ने भेड़िए को दौड़ाकर बच्ची को बचा लिया, लेकिन वह गंभीर रूप से घायल हो गई. बाद में उसकी मौत हो गई.
बीते दो हफ़्तों के दौरान भेड़िए के हमलों की शुरुआत 9 सितंबर को पराग पुरवा गांव से हुई थी. वहां दादा के सामने खाना खा रही तीन साल की बच्ची को भेड़िया रात करीब आठ बजे उठा ले गया. बच्ची का शव अगले दिन सुबह पास के गन्ने के खेत में मिला था, जिसके शरीर का आधा हिस्सा ग़ायब था.
बहराइच के ज़िलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी ने कहा, "तीन बच्चों की मृत्यु हो चुकी है." हालांकि प्रशासन अभी अनीता के बच्चे को मृत नहीं मान रहा है क्योंकि उसका शव नहीं मिला है.
पिछले साल 2024 में भी बहराइच में लगभग इसी मौसम में बच्चों को उठाने की घटनाएं हुई थीं. उस समय वन विभाग ने 10 मौत की पुष्टि की थी. लेकिन इस बार हमलों का तरीक़ा एकदम बदला हुआ है.
पिछले साल ज़्यादातर हमले रात में होते थे. लेकिन इस बार हमले दिन और रात दोनों समय हो रहे हैं. दिन में हमले होने के साथ-साथ एक और पैटर्न बदला है. जिन ग्रामीणों ने इन हमलों को देखा है, उनका कहना है कि दो भेड़िए एक साथ आते हैं.
भेड़िए का पीछा करने वाले सालिक राम ने कहा, "देखने में वे बहुत तंदरुस्त दिखते हैं."
पिछले साल भेड़िए के हमलों का केंद्र महसी तहसील थी, लेकिन इस बार केंद्र में कैसरगंज तहसील का मंझरा तौकली इलाका है.
इस गांव के ग्राम प्रधान दीप नारायण ने बताया कि गांव की आबादी लगभग 45 हजार है और इस साल हमलों का केंद्र यही पूरा इलाका बना हुआ है. पूरा क्षेत्र घाघरा नदी के पास बसा है.
बरसात के समय पानी बांध तक आ जाता है. गांव में पक्के मकान कम हैं, कच्चे और फूस के मकान ज़्यादा हैं. इलाके में चारों तरफ गन्ने की खेती है. बीच-बीच में धान भी बोया गया है. मवेशी भी हैं.
बहराइच के डीएफ़ओ राम सिंह यादव ने कहा, "अब तक तीन बच्चों की मौत हो गई है और एक लापता है. वहीं 7 लोग घायल हैं."
उन्होंने बताया कि उन्हें मिलाकर तीन और डीएफ़ओ के निर्देशन में 32 टीमें लगाई गई हैं. उनका कहना है, ''चार ड्रोन कैमरे हैं, जिन्हें दो ऑपरेटर चला रहे हैं. इनमें भेड़िया दिखाई भी दिया है. आज भी जिस जगह घटना हुई, उसके पास हमारे कर्मचारियों को भेड़िया दिखाई दिया."
उन्होंने कहा, "भेड़िए की लोकेशन के लिए प्रभावित इलाकों में 20 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं. इसके बाद भी दुखद बात यह है कि छोटे-छोटे बच्चे गांव में घूम रहे हैं. उन्हें लगातार कहा जा रहा है कि अकेले कहीं न जाएं."
गांव में दहशत: छतों, मचानों और पेड़ों पर बीत रही रातें
लगभग 45 हजार लोगों की आबादी वाले इस इलाके में अब कोई सुरक्षित महसूस नहीं कर रहा. गांव के लोग बताते हैं कि पहले तो रात में बारी-बारी से पहरा देते थे, लेकिन अब दिन में भी बच्चों को अकेला छोड़ना नामुमकिन हो गया है.
इन वजहों से ग्रामीण इतने सहम गए हैं कि जिनके घर पक्के नहीं हैं, उनमें से कई लोग मचान पर सो रहे हैं. किसी ने पेड़ पर मचान बनाया है, किसी ने ट्रॉली पर और किसी ने बांस की बल्लियों की मदद से घर के अंदर मचान बना लिया है.
मचान पर ज़िंदगी बिता रहे जमील ने बीबीसी से कहा, "जब से भेड़िए का डर बढ़ा है तो हमने मचान बना लिया है. लेकिन दिन में मचान पर भी नहीं बैठा जा सकता, इसलिए रात में इस पर सोते हैं. पहले यह जानवर रात में हमले करता था तो दिन में हम लोग आसानी से खेती-किसानी का काम कर लेते थे, लेकिन अब दिन में खेत जाने से डर लगता है."
उन्होंने कहा, "मचान अपनी संतुष्टि के लिए बनाया गया है. भेड़िया मचान पर कूद गया तो आफ़त आ जाएगी. वहीं अगर घर के गेट पर लेट जाए तो और आफ़त है. इसलिए मचान पर लेटने से सुरक्षा है. ऊपर जब पहुंचेगा तब, लेकिन नीचे तो फौरन झपट लेगा."
बुज़ुर्ग भी बने निशाना
गांव में सिर्फ़ बच्चे ही नहीं, बुज़ुर्ग भी हमलों का शिकार हुए हैं. हाल ही में एक रात में पांच लोगों पर भेड़ियों ने हमला किया. हालांकि उनकी जान बच गई, लेकिन गंभीर चोटें आईं.
करीब 60 साल की सिताबी अपने घर के दालान में छप्पर के नीचे सो रही थीं. रात के वक्त भेड़िए ने हमला किया. उनका कहना है, "जब पैर में काटा तो पता चला कि कोई जानवर है. उसने मुझे घसीटा, लेकिन मच्छरदानी की वजह से मैं सिर्फ ज़मीन पर गिर गई. तेज़ चिल्लाने पर पड़ोसी और घर वाले आए तो वो भाग गया."
उसी रात शांति देवी पर भी हमला हुआ. 80 साल की शांति देवी घर के बरामदे में लेटी थीं. रात करीब एक बजे भेड़िए ने हमला किया. उनका कहना है, "मेरा सिर दबोच लिया था. मैं चिल्लाई और घर वालों ने लोहे का तसला बजाना शुरू कर दिया. लेकिन वो भागे नहीं. बाद में और लोग आए तो भागे. वो दो थे. उसकी आंख शीशे की तरह चमक रही थी."
ग्रामीणों का कहना है कि जब से दिन में हमले होने लगे हैं, तब से उनकी चिंता और बढ़ गई है. बच्चे और बुजुर्ग सबसे असुरक्षित हैं.
इस इलाके के रहने वाले पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष विजय सिंह कहते हैं, "लोगों की जान पर बन आई है. इतनी बड़ी घटना के बाद भी वन विभाग सिर्फ ड्रोन और पिंजरे की बात कर रहा है."
हमले के पैटर्न में बदलाव
हालांकि रात में ख़तरा है, लेकिन इस बार दिन में हो रहे हमलों की वजह से लोगों में डर और ज्यादा है. बच्चों पर विशेष निगरानी के बावजूद हमले हो रहे हैं.
दिन में भेड़ियों के हमले पर वाइल्ड लाइफ़ इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया, देहरादून के वैज्ञानिक डॉक्टर शहीर खान ने कहा, "वैज्ञानिक तौर पर अभी तक कोई ऐसी रिपोर्ट नहीं है जो बताती हो कि भेड़िया दिन में हमला करता है. अगर बहराइच में ऐसा हो रहा है तो यह नया और यूनिक है. यह जांच का विषय है."
विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार भेड़ियों के हमले अलग तरह से हो रहे हैं. पिछले साल घटनाएं रात में ही होती थीं और आमतौर पर एक ही भेड़िया दिखता था. लेकिन इस बार दो भेड़िए एक साथ हमला कर रहे हैं और दिन में भी सक्रिय हैं.
वन्यजीव विशेषज्ञ अभिषेक बताते हैं, "भेड़िए एक घंटे में छह किलोमीटर तक दौड़ सकते हैं. बरसात के बाद उनकी मांद में पानी भर गया होगा. इसी वजह से वे नई जगह और भोजन की तलाश में निकले होंगे."
डीएफ़ओ राम सिंह यादव भी मानते हैं कि भेड़ियों का पैटर्न बदल गया है. उनका कहना है, "वे समय के साथ अपना तरीक़ा बदलते हैं. यही वजह है कि इनको पकड़ना मुश्किल हो रहा है."
वन विभाग की चुनौती और रणनीति
बहराइच के डिवीजनल फ़ॉरेस्ट ऑफ़िसर (डीएफ़ओ) राम सिंह यादव मानते हैं कि इलाके में भेड़ियों का ख़तरा देखते हुए प्रशासन निगरानी कर रहा है. उन्होंने बताया, "हम थर्मल ड्रोन कैमरों से निगरानी कर रहे हैं, पिंजरे और जाल लगाए गए हैं, लेकिन यह इलाका बहुत बड़ा है."
पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष विजय सिंह कहते हैं, "लोगों की जान पर बन आई है. इतनी बड़ी घटना के बाद भी सरकार सिर्फ ड्रोन और पिंजरे की बात कर रही है. हमें तुरंत सुरक्षा चाहिए."
वन विभाग ने लोगों से कहा है कि बच्चे अकेले बाहर न जाएं और रात में समूह में रहें. आम लोगों में डर इतना गहरा है कि लोग अब दिन में भी घर से बाहर निकलने से कतराते हैं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित