वायनाड भूस्खलन: कैसे एक रात ने तबाह कर दी कई लोगों की ज़िंदगी और परिवार

- Author, मुरलीधरण काशीविश्वनाथन
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, वायनाड, केरल
एक महिला अपने फोन में मौजूद फ़ोटो को दिखाकर आस-पास खड़े लोगों से अपनी भतीजी के शव को पहचानने के लिए कह रही है.
केरल के वायनाड के मुंडक्कई, चूरलमाला और मल्लापुरम में हर कोई सदमे में है और अपने लापता रिश्तेदारों की तलाश कर रहा है.
नौ साल की बच्ची अनीता इन्हीं लापता लोगों में से एक हैं.
बरसात की एक रात और भूस्खलन ने यहाँ पूरे शहर को तबाह कर दिया है. किसी ने यह सोचा भी नहीं होगा कि 30 जुलाई की वह रात उनके लिए इतनी दर्दनाक होगी.
यह महिला कांपती हुई आवाज़ में हर किसी को अपना मोबाइल फ़ोन दिखा रही है, जिसमें अनीता की फ़ोटो है. इनमें से एक तस्वीर उस समय की है जब अनीता ज़िंदा थी, जबकि दूसरी उस समय की है जब भूस्खलन के बाद अनीता की जान जा चुकी थी.
यह महिला अनीता की चाची हैं, जो उसके शव को पहचान नहीं पा रही हैं. शव ख़राब हाल में है.

शव पहचानने में बेबस
अनीता की चाची की बेबस आवाज़ शायद किसी को भी झकझोर देगी.
वह फ़ोन में अपनी भतीजी की तस्वीर लेकर मेपड्डी के अस्पताल में भटक रही हैं, जहाँ शवों को पोस्टमॉर्टम के बाद पहचान के लिए रखा गया है.
30 जुलाई की सुबह केरल राज्य के वायनाड ज़िले के मुंडक्कई और चूरलमाला इलाक़ों में हुए भूस्खलन में मरने वालों की संख्या अब 200 के क़रीब है. यहाँ अब भी 100 से ज़्यादा लापता लोगों की तलाश की जा रही है.
यहाँ की पहाड़ियों से निकलने वाली धारा चूरलमाला के साथ-साथ नीचे जाती है और इरुवंजी नदी तक पहुँचती है. यह कुछ अन्य सहायक नदियों के साथ शालियार नदी के नाम से ज़िले से होकर बहती है.
30 जुलाई और उससे पहले कुछ दिनों तक हुई भारी बारिश के कारण यहाँ नदी उफ़ान पर थी. भूस्खलन का सामना करने वाला पहला गांव ‘मुंडक्कई’ 30 जुलाई को लगभग पूरी तरह से नष्ट हो गया था.
चूरलमाला इलाक़े में नदी के किनारे मौजूद रिहायशी इलाक़े बाढ़ में पूरी तरह बह चुके हैं.
इस इलाक़े में रहने वाले कई लोग लापता हो गए हैं और उनकी तलाश अभी भी जारी है.
मुंडक्कई और चूरलमाला में रहने वाले पांच हज़ार से ज़्यादा लोगों को ज़िले भर में बनाए गए क़रीब 90 राहत शिविरों में रखा गया है.

बेटी के घर जाकर बची जान
स्थानीय अस्पताल के बाहर इंतज़ार कर रहे लोगों को अपने क़रीबियों के शव को पहचानना है और अनीता की चाची भी इन्हीं में से एक हैं.
अनीता की माँ का निधन कुछ साल पहले हो गया था और अब उसके दादा थंगराज उसे पाल रहे थे.
अनीता की नानी सरस्वती ने उसके दादाजी से आग्रह किया था कि वो अनीता को चूरलमाला भेज दें.
अनीता चूरलमाला में पढ़ाई कर रही थी, जहाँ वह भूस्खलन में बह गई. उसके परिवार के अन्य पाँच लोग भी इस हादसे में मारे गए हैं. इनमें उसके मामा और कुछ अन्य बच्चे भी शामिल हैं.
अनीता और उसके परिवार के अन्य दो सदस्यों का शव अभी भी नहीं मिल पाया है. अभी तक इस परिवार के छह में से तीन लोगों का शव मिला है. इस हालात में थंगराज और उनकी बेटी अनीता के शव की तलाश कर रही है.
इस तबाही में मुश्किल से बच पाई अमरावती ने भूस्खलन में अपने देवर और भतीजे को खो दिया है.
अमरावती का ताल्लुक तमिलनाडु के सलेम ज़िले से है पर अब उनका रहना चूरलमाला में होता है.
अमरावती ने बीबीसी को उस रात की घटना के बारे में बताया, "दो दिन पहले से लगातार बारिश हो रही थी. मंगलवार रात क़रीब एक बजे जब पहला भूस्खलन हुआ तो मैं और मेरे पति पानी और कीचड़ देखकर घबरा गए. फिर हमने तय किया कि हम अब यहाँ नहीं रुकेंगे और हम हमारी बेटी के घर गए, जो थोड़ी दूर था. "

नींद में खो दी ज़िंदगी
अमरावती के मुताबिक़, "बेटी के घर जाने के कुछ देर बाद बहुत तेज़ आवाज़ सुनाई दी. मुझे पता था कि कीचड़ बह रहा है इसलिए तुरंत घर से निकल नहीं सकते थे. तभी मेरी बहू ने सीढ़ी पर चढ़कर हमें ऊपर उठा लिया और सुबह तक एक जंगल में रुके रहे, फिर बचाव दल ने हमें बचाया."
लेकिन अमरावती के देवर और भतीजा इतने भाग्यशाली नहीं रहे. उनका घर इस भूस्खलन की चपेट में आ गया और अब उनकी तलाश जारी है.
इसी तरह चूरलमाला के रहने वाले पोन्नैयन भी मुश्किल से अपनी जान बचा पाए. वो लॉटरी और सिलाई की एक छोटी सी दुकान चलाते हैं. उनका घर चूरलमाला में नदी के पास ही था.
पोन्नैयन याद करते हैं, "उस दिन सुबह से ही भारी बारिश हो रही थी. बारिश तेज़ होने पर मैंने घर पर नहीं रुकने का फैसला किया और दुकान पर चला गया. रात क़रीब 9 बजे बिजली का एक खंभा दुकान के शटर पर गिर गया. उसके बाद छेद से पानी दुकान के अंदर आने लगा तो यह देखने के लिए कि बाहर क्या हो रहा है, मैंने छेद से देखा कि तबाही सब कुछ बहा ले जा रही थी.''

पोन्नैयन का कहना है कि उस वक़्त उन्हें लगा कि अब उनके बचने की कोई उम्मीद नहीं है.
वो बताते हैं, "लेकिन बारिश दस मिनट में ही रुक गई. उसके बाद मैंने तहसीलदार को फ़ोन किया और उन्हें सब कुछ बताया. तहसीलदार ने कहा कि क्या तुरंत बाहर निकल सकते हो. उसके बाद मैं और मेरा परिवार वहाँ से निकल गए. वहां घुटनों तक गहरा कीचड़ था. हम क़रीब आधा किलोमीटर ही चल पाए थे कि ज़मीन दूसरी बार ढह गई."
पोन्नैयन कहते हैं, ''फिर हम पास की पहाड़ी पर चढ़ गए. अगले कुछ मिनटों में दमकल की गाड़ियाँ और बचाव दल आने लगे. उसके बाद मैं गाँव में गया जहाँ पानी ने सबकुछ बहा दिया था.''
पोन्नैयन भारी बारिश की वजह से घर से निकल गए थे. लेकिन इस भूस्खलन में उनके सभी पड़ोसी, रिश्तेदार और दोस्तों की मौत हो गई.
वो सब घर पर आराम से सो रहे थे और उन्हें पता भी नहीं चला कि क्या होने वाला है.
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