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छत्तीसगढ़: हेड कॉन्स्टेबल की पत्नी और बेटी की हत्या के बाद भीड़ ने अभियुक्त का घर फूंका, क्या है पूरा मामला?
- Author, आलोक पुतुल
- पदनाम, रायपुर से बीबीसी हिंदी के लिए
छत्तीसगढ़ के सूरजपुर में हेड कॉन्स्टेबल की पत्नी और उनकी बेटी की हत्या मामले में पुलिस ने अभियुक्त कुलदीप साहू के अलावा चार अन्य लोगों को भी गिरफ़्तार किया है.
बुधवार को एनएसयूआई के जिला अध्यक्ष सीके चौधरी भी गिरफ़्तार कर लिया गया. इसके अलावा आर्यन विश्वकर्मा उर्फ गोल्डी, फूल सिंह उर्फ रिंकू सिंह और सूरज साहू को भी गिरफ़्तार किया गया है.
एनएसयूआई के जिला अध्यक्ष सीके चौधरी की गिरफ़्तारी पर छत्तीसगढ़ कांग्रेस के प्रवक्ता का कहना है पहले दिन से ही इस मामले को राजनीतिक रंग देने की कोशिश चल रही है.
गिरफ़्तारी से एक दिन पहले ही सीके चौधरी ने एक वीडियो जारी कर कहा था कि भाजपा सरकार इस मामले में अनावश्यक रूप से कांग्रेस को बदनाम करने की कोशिश कर रही है
इस दोहरे हत्याकांड से नाराज़ लोगों ने हत्या के अभियुक्त कुलदीप साहू के घर और गोदाम में आग लगा दी थी.
आक्रोशित भीड़ ने कई गाड़ियों को भी आग के हवाले कर दिया था. नाराज़ लोगों ने कुछ प्रशासनिक अधिकारियों के साथ भी मारपीट की थी.
सोमवार को पुलिसकर्मी की पत्नी और बेटी की हत्या की इस ख़बर के बाद से ही इलाके में तनाव का माहौल है. इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किये गए हैं.
राज्य के उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा, "राज्य सरकार क़ानून व्यवस्था को लेकर पूरी तरह गंभीर है और जहां कहीं भी कोई घटना हो रही है, ठोस और मज़बूत कार्रवाई हो रही है. सरकार क़ानून व्यवस्था के मामले में किसी भी तरह का कोई समझौता नहीं करेगी."
पूरा मामला क्या है?
पुलिस के अनुसार, रविवार की रात सूरजपुर में कुलदीप साहू नामक एक व्यक्ति के साथ पुलिसकर्मियों का विवाद हुआ, जिसके बाद कुलदीप ने एक दुकान में खौलते हुए तेल की कढ़ाई एक सिपाही घनश्याम सोनवानी पर उड़ेल दी.
पुलिस का कहना है कि पुलिसकर्मियों ने जब कुलदीप को पकड़ने की कोशिश की तो वो भाग खड़ा हुआ.
सूरजपुर के पुलिस अधीक्षक एमआर अहिरे ने कहा, "रात में कुलदीप की तलाश में जब हेड कॉन्स्टेबल तालिब शेख़ निकले तो तलवार लेकर घूम रहे कुलदीप साहू ने तालिब शेख़ को अपनी कार से कुचलने की कोशिश की. तालिब शेख़ ने पहले भी कुलदीप के ख़िलाफ़ कार्रवाई की थी, वह इससे नाराज़ था."
पुलिस के मुताबिक हेड कॉन्स्टेबल तालिब शेख़ अपनी ड्यूटी पूरी कर घर लौटे तो उन्होंने देखा कि उनके घर का दरवाज़ा टूटा हुआ है. घर में ख़ून बिखरा हुआ था और उनकी पत्नी मेहू फ़ैज़ और 16 वर्षीय बेटी घर में नहीं थीं. तालिब शेख़ ने तुरंत पुलिस को सूचना दी. इसके बाद पत्नी और बेटी की तलाश शुरू हुई.
ज़िले के पुलिस अधीक्षक एमआर अहिरे ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि शहर के अलग-अलग इलाकों में तलाशी के दौरान एक कार से भाग रहे कुलदीप सिंह की कार के टायर पर गोलियां चलाई. लेकिन कुलदीप सिंह भागने में सफल रहा. एमआर अहिरे के अनुसार-"हमें कार में ख़ून के धब्बे मिले थे."
पुलिस के अनुसार, सोमवार की सुबह तालिब शेख़ की पत्नी और बेटी का शव घर से लगभग 5 किलोमीटर दूर जूर-पीढ़ा मार्ग पर एक नहर में मिला.
पुलिस ने अभियुक्त को बताया ''आदतन अपराधी''
पुलिस का कहना है कि तालिब शेख़ की पत्नी और बेटी की हत्या की ख़बर के बाद इलाके में तनाव फैल गया.
इसके बाद सैकड़ों की संख्या में एकत्र भीड़ ने पहले सूरजपुर शहर बंद कराया और फिर कुलदीप साहू के घर और गोदाम को आग के हवाले कर दिया. भीड़ ने कई गाड़ियों में भी तोड़फोड़ की और उनमें आग लगा दी.
भीड़ को रोकने के लिए पहुंचे एसडीएम समेत दूसरे अधिकारियों को भी भीड़ के आक्रोश का सामना करना पड़ा. कुछ अधिकारियों के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की भी ख़बर है.
ज़िले के पुलिस अधीक्षक एमआर अहिरे ने हत्या के अभियुक्त कुलदीप साहू के बारे में कहा, “जहां कहीं भी होगा, उसे ढूंढ निकालेंगे. यह पुलिस परिवार के ऊपर हमला है और आतंकी गतिविधि है. पुलिस किसी भी तरह से इसे बर्दाश्त नहीं करेगी.”
कबाड़ी का काम करने वाले कुलदीप साहू को ''आदतन अपराधी'' बताते हुए पुलिस ने कहा कि कुलदीप के ख़िलाफ़ अलग-अलग थानों में लगभग दो दर्जन मामले दर्ज हैं.
पुलिस ने बताया कि आपराधिक गतिविधियों के कारण कुलदीप साहू को छत्तीसगढ़ के सूरजपुर, सरगुजा, कोरबा, कोरिया, बलरामपुर-रामानुजगंज, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर ज़िले के अलावा मध्य प्रदेश के सिंगरौली ज़िले से सालभर के लिए ज़िलाबदर किया गया था.
इस दौरान इन ज़िलों में कुलदीप साहू का प्रवेश प्रतिबंधित था. लेकिन ज़िला बदर की समयसीमा पूरी होने से पहले सूरजपुर लौटने पर कुलदीप साहू को गिरफ़्तार किया गया था.
इसके बाद से कुलदीप ज़मानत पर था.
ताज़ा घटना को लेकर कुलदीप साहू के परिजनों ने बताया कि पिछले सप्ताह एक आयोजन में कुलदीप साहू के भाई संदीप साहू के साथ कुछ लोगों का विवाद हुआ था. जिसके बाद पुलिस ने संदीप साहू के साथ थाने में कथित रूप से जमकर मारपीट की थी. इससे कुलदीप पुलिसवालों से नाराज़ था.
'क़ानून नाम की चीज़ समाप्त हो चुकी'
सूरजपुर की घटना को लेकर राज्य में कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष दीपक बैज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "सूरजपुर कोतवाली के प्रधान आरक्षक की पत्नी और बिटिया की हत्या छत्तीसगढ़ में लचर कानून व्यवस्था की वजह से बिगड़े हालात को दर्शाती है. जहाँ पुलिसकर्मियों के परिवार सुरक्षित नहीं हैं, वहां आम जनता के लिए जीवन कितना कठिन है, आप स्वयं अंदाज़ा लगा सकते हैं. शर्म आनी चाहिए ऐसे मुख्यमंत्री को, जिनके दरबारी सुशासन का भोंपू दिन-रात बजाते रहते हैं और उनके राज में जनता समान्य सुरक्षा से वंचित है."
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने लिखा, ''ये क्या हो रहा है हमारे छत्तीसगढ़ में? लगने लगा है कि शांति का टापू कहे जाने वाले हमारे प्रदेश से क़ानून नाम की चीज़ समाप्त हो चुकी है. सूरजपुर में प्रधान आरक्षक की पत्नी और बेटी की हत्या कर दी गई. उसी हत्यारे ने इस घटना से पहले एक आरक्षक पर गर्म तेल उड़ेला था."
"जनता के मन में कानून व्यवस्था और सरकार से पूरी तरह विश्वास इस कदर उठ चुका है कि जनता अब स्वयं न्याय करने निकल पड़ी है. घरों में आगज़नी की घटनाएँ सुनकर व्यथित हूँ."
भूपेश बघेल ने लिखा, "कवर्धा के लोहारीडीह में भी यही हुआ था. इससे पहले लोगों ने कलेक्ट्रेट में आग लगा दी थी. मैं सभी से शांति की अपील करता हूँ और विनम्र प्रार्थना करना चाहता हूं कि वे क़ानून व्यवस्था अपने हाथों में न लें. शासन प्रशासन से स्थिति नियंत्रित करने की अपेक्षा है."
बीजेपी छत्तीसगढ़ के हैंडल से किए गए एक ट्वीट में कहा गया है कि राज्य की आंतरिक सुरक्षा और क़ानून व्यवस्था पर सबसे बड़ी चुनौती कांग्रेस ही है.
इसमें कहा गया है, "ऐसी कोई वारदात नहीं हुई है प्रदेश में जिसके तार कांग्रेस से जुड़े हुए नहीं हों. राज्य की आंतरिक सुरक्षा और क़ानून व्यवस्था पर सबसे बड़ी चुनौती कांग्रेस ही है. प्रदेश में अशांति फैलाने का काम कांग्रेस ही कर रही है. प्रदेश सरकार हर एक अपराधी की पहचान कर सख़्त से सख्त सजा दिलवाने के लिए संकल्पित है."
इस पर कांग्रेस के प्रवक्ता सुशील आनंद शुक्ला ने कहा है, "पहले दिन से ही इस मामले को राजनीतिक रंग देने की कोशिश चल रही है. कुलदीप साहू को पहले कांग्रेस से जुड़ा बताने की कोशिश की गई. लेकिन जब इसमें भाजपा सरकार को सफलता नहीं मिली तो कुलदीप की गिरफ़्तारी के बाद, एनएसयूआई के ज़िलाध्यक्ष को गिरफ़्तार कर लिया गया."
उन्होंने कहा, "जबकि एनएसयूआई के ज़िलाध्यक्ष लगातार सूरजपुर में ही थे. हमारा कहना है कि अपराधी एक के बाद एक वारदात करता रहा और पुलिस उसे अवसर देती रही. अब अपनी ज़िम्मेदारी से ध्यान भटकाने के लिए कांग्रेस पार्टी को निशाना बनाने की कोशिश हो रही है."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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