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छत्तीसगढ़: मुठभेड़ में 32 कथित माओवादियों की मौत, पुलिस ने क्या बताया?
- Author, आलोक पुतुल
- पदनाम, रायपुर से, बीबीसी हिंदी के लिए
छत्तीसगढ़ के माओवाद प्रभावित नारायणपुर ज़िले में पुलिस ने एक मुठभेड़ में 32 कथित माओवादियों को मारने का दावा किया है.
पुलिस का कहना है कि मारे जाने वाले माओवादियों की संख्या और बढ़ सकती है. रात होने के कारण सर्चिंग ऑपरेशन में पुलिस को परेशानी आ रही है.
छत्तीसगढ़ में पिछले साल दिसंबर में विष्णुदेव साय की भाजपा सरकार के आने के बाद से ही राज्य में माओवादियों के ख़िलाफ़ सघन अभियान चलाया जा रहा है.
एक तरफ़ राज्य के गृहमंत्री विजय शर्मा ने माओवादियों से शांति वार्ता का प्रस्ताव दिया, वहीं दूसरी ओर उनके ख़िलाफ़ सफ़ाया अभियान को भी तेज़ कर दिया.
इस साल जनवरी से अब तक छत्तीसगढ़ में 171कथित माओवादी मारे जा चुके हैं.
वर्ष 2000 में अलग छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद से अब तक किसी एक साल में इतनी बड़ी संख्या में माओवादियों के मारे जाने का मामला सामने नहीं आया है.
इसी साल 16 अप्रैल को कांकेर ज़िले के कलपर में सुरक्षाबलों ने 29 संदिग्ध माओवादियों को मुठभेड़ में मारने का दावा किया गया था. लेकिन शुक्रवार को हुई मुठभेड़ की घटना ने इस आंकड़े को पीछे छोड़ दिया है.
बस्तर रेंज के पुलिस आईजी ने क्या बताया
बस्तर रेंज के पुलिस आईजी सुंदरराज ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि मुठभेड़ दोपहर एक बजे हुई. मुठभेड़ अबुझमाड़ में थुलथुली और नेंदुर गांव के बीच हुई. ये जगह नारायणपुर-दंतेवाड़ा सीमा पर है.
उन्होंने कहा कि माओवादियों से पुलिस टीम का सामना उस समय हुआ जब वो वहां नक्सल विरोधी ऑपरेशन पर थे. इस मुठभेड़ में पुलिस की डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड और एसटीएफ़ के जवान शामिल थे.
पुलिस ने बताया कि मुठभेड़ के बाद माओवादियोंं के शवों के बीच हथियारों की एक खेप भी बरामद की गई. इनमें एक एके-47 राइफल और एक एसएलआर शामिल है.
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने क्या कहा
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस ऑपरेशन के लिए सुरक्षा बलों की तारीफ की है. उन्होंने कहा डबल इंजन की सरकार राज्य में इस ख़तरे के खात्मे के लिए प्रतिबद्ध है.
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "नक्सलवाद को खत्म करने की हमारी लड़ाई अंजाम तक पहुंचकर ही खत्म होगी. हमारी डबल इंजन सरकार इसके लिए प्रतिबद्ध है. राज्य से नक्सलवाद को खत्म करना हमारा लक्ष्य है."
माओवाद के खात्मे के लिए मार्च 2026 की डेडलाइन
गृह मंत्रालय का दावा है कि देश में माओवादी हिंसा में लगातार कमी आई है.
गृह मंत्रालय के अनुसार 2004 से 2014 तक माओवादी हिंसा की 16463 घटनाएं हुई थीं और 2014 से 2024 तक 7,744 घटनाएं हुईं.
यानी इसमें 53 प्रतिशत की कमी आई. नागरिकों और सुरक्षाबलों की मृत्यु में पहले दस साल में 6617 मृत्यु हुई थी, अब उसमें 70 फीसदी कमी हो कर यह आंकड़ा 2004 तक पहुंचा है. इसी तरह सुरक्षाबलों की मौत के मामले में 73 प्रतिशत की कमी और नागरिकों की मौत से जुड़े मामलों में 69 प्रतिशत की कमी आई है.
गृह मंत्रालय का दावा है कि 2010 में देश में 107 ज़िले माओवाद प्रभावित थे. उससे कम हो कर अब 42 तक सिमट गए हैं. थानों की संख्या 456 थी, 100 नए थाने बनाए गए हैं.
लेकिन अब माओवाद प्रभावित थानों की संख्या 171 तक सीमित हो गई है. इसी तरह 2010 के अधिकतम मृत्यु स्तर 1005 से घट कर 2023 में 138 तक सीमित हुई है.
इसी साल अगस्त के महीने में रायपुर में माओवाद प्रभावित राज्यों की बैठक में गृहमंत्री अमित शाह ने माओवाद को पूरी तरह से ख़त्म करने के लिए मार्च 2026 की तारीख़ तय की थी.
इस बैठक में अमित शाह ने कहा था,"अब समय आ गया है कि वामपंथी उग्रवाद की समस्या पर एक मज़बूत रणनीति के साथ, रुथलेस रणनीति के साथ अंतिम प्रहार किया जाए. हम सबका मानना है कि ये वामपंथी उग्रवाद हमारे देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए सबसे बड़ी चुनौती है."
अमित शाह ने दावा किया था, "2022 में एक साल ऐसा आया कि जिसमें चार दशक में पहली बार, मृत्यु संख्या 100 से नीचे गई. 2014 से 2024 तक सबसे कम वामपंथी उग्रवादियों द्वारा की गई घटनाएं, दर्ज की गईं. टॉप 14 नक्सली लीडर को मारा गया. इसके अलावा हमने वामपंथी उग्रवाद की जगह, उसकी विचारधारा की जगह, विकास का विश्वास लोगों में जेनरेट करने में भी हमने सफलता प्राप्त की है."
उन्होंने कहा था, "मुझे विश्वास है कि हमारी लड़ाई अंतिम चरण में पहुंची है. हमें देश को 2026 मार्च तक पूर्णतया नक्सल समस्या से मुक्त करना है."
सुरक्षाबलों और माओवादियों के बीच 2024 की बड़ी मुठभेड़
- 2 सितंबर को दंतेवाड़ा जिले में मुठभेड़ के दौरान नौ कथित माओवादी, जिनमें छह महिलाएं शामिल थीं, मारे गए.
- 2 जुलाई को बस्तर के नारायणपुर जिले में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में पांच कथित माओवादी मारे गए.
- 7 जून को नारायणपुर जिले में मुठभेड़ में सात कथित माओवादी मारे गए और तीन जवान घायल हुए.
- 15 जून को नारायणपुर जिले में मुठभेड़ में आठ कथित माओवादी और स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) के एक जवान की मौत हो गई.
- 5 जून को नारायणपुर जिले में मुठभेड़ में छह कथित माओवादी मारे गए.
- 23 मई को नारायणपुर-बीजापुर सीमा पर सुरक्षा बलों द्वारा सात कथित माओवादी मार गिराने का दावा किया गया.
- 10 मई को बीजापुर में मुठभेड़ के दौरान कम से कम 12 कथित माओवादी मारे जाने के बात पुलिस ने कही.
- 30 अप्रैल को नारायणपुर और कांकेर जिलों की सीमा पर कम से कम 10 कथित माओवादी मारे गए जिनमे तीन महिलाएं भी शामिल थीं.
- 16 अप्रैल को कांकेर जिले में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में 29 कथित माओवादी मारे गए.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित