टाइटैनिक दिखाने ले गई लापता पनडुब्बी में अब कुछ घंटों की ऑक्सीजन, जानिए क्यों नहीं मिल रही
कैथरीन आर्मस्ट्रांग, जॉर्ज राइट और एडम डर्बिन
बीबीसी न्यूज़

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दुनिया के सबसे चर्चित जहाज़ रहे टाइटैनिक के मलबे को दिखाने के लिए अटलांटिक महासागर में गई पनडुब्बी अब भी लापता है.
पनडुब्बी को ढूंढने में लगी सरकारी एजेंसियों का दावा है कि पनडुब्बी में अब 30 घंटे से भी कम समय की ऑक्सीजन बची है.
रविवार को कनाडा के न्यूफ़ाउंडलैंड तट के नज़दीक टाइटैनिक का मलबा दिखाने गई ये पनडुब्बी ग़ायब हो गई थी.
इस पनडुब्बी में पाकिस्तानी अरबपति शहज़ादा दाऊद उनके बेटे सुलेमान, ब्रितानी व्यवसायी हामिश हार्डिंग समेत पांच लोग सवार हैं.
इनमें इस पनडुब्बी का संचालन करने वाली कंपनी ओशनगेट के सीईओ स्टॉकटन रश भी शामिल हैं. इनके अलावा फ़्रेंच एक्सप्लोरर पॉल आनरी नार्जेलेट भी इस पनडुब्बी में हैं.
पनडुब्बी को ढूंढने में अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां भी शामिल हो गई हैं. अमेरिकी कोस्ट गार्ड के प्रवक्ता ने कहा है कि ये बचाव अभियान ‘बेहद जटिल’ है और अगर पनडुब्बी की लोकेशन पता चल जाती है तो ‘बचाव के लिए हमारे बस में जो होगा वो हम करेंगे.’
अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी डिपार्टमेंट के मेमो को लेकर रिपोर्ट की गई है कि पनडुब्बी जहां ग़ायब हुई है वहां से एक ज़ोरदार आवाज़ सुनी गई है जो कई घंटों तक आई.
अमेरिकी मीडिया समूह सीएनएन ने मंगलवार की रात के एक मेमो को रिपोर्ट किया है जिसमें कई बार आवाज़ को सुना गया.

सवाल उठाने वाले की नौकरी छीनी थी
वहीं न्यूयॉर्क टाइम्स ने रिपोर्ट किया है कि साल 2018 में इस इंडस्ट्री के एक्सपर्ट्स ने ओशनगेट कंपनी की पनडुब्बी टाइटन को लेकर चिंताएं ज़ाहिर की थीं और कंपनी के सीईओ को ख़त लिखा था.
इसके अलावा अमेरिकी कोर्ट के दस्तावेज़ के मुताबिक़, ओशनगेट ने साल 2018 में उस पनडुब्बी विशेषज्ञ को नौकरी से निकाल दिया था, जिसने पनडुब्बी की सुरक्षा संबंधी दिक़्क़तों की ओर ध्यान दिलाया था.
स्कॉटलैंड के पनडुब्बी विशेषज्ञ डेविड लोख़रिज ने साल 2017 में इस कंपनी में नौकरी शुरू की थी.
उन्होंने पनडुब्बी में ख़ामियों को लेकर चेतावनी ज़ाहिर की थी जिसे नज़रअंदाज़ किया गया था.
इसके बाद उन्होंने एक रिपोर्ट लिखी तो उन्हें गोपनीय जानकारी सार्वजनिक करने के नाम पर नौकरी से निकाल दिया गया. इसके बाद लोख़रिज ने कोर्ट केस किया और फिर इस मुक़दमे को सुलझा लिया गया.

बचाव अभियान कहां पर पहुंचा?
पनडुब्बी को ढूंढने के लिए बचाव दल के हाथ से समय निकला जा रहा है क्योंकि पनडुब्बी में अब 30 घंटे की ही ऑक्सीजन बची है.
मध्य अटलांटिक के गहरे पानी में बचाव अभियान जारी है लेकिन अभी तक कुछ भी हाथ नहीं लग सका है.
अमेरिकी कोस्ट गार्ड के कैप्टन जेमी फ़्रेडरिक ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस करके बताया है कि पनडुब्बी को ढूंढने के लिए तेज़ी से काम जारी है लेकिन अभी तक कोई भी परिणाम नहीं निकला है.
उन्होंने इस खोजी अभियान को बेहद जटिल बताते हुए इसकी वजह लंबी दूरी को बताया है.
इस खोजी और बचाव अभियान में अमेरिकी और कनाडाई एजेंसियों के अलावा नौसेना, गहरे समुद्र में उतरने वाली व्यावसायिक कंपनियां भी लगी हैं जो सैन्य विमानों, पनडुब्बियों और सोनार बॉय मशीनों से पनडुब्बी को खोज रही हैं. इसमें कई निजी जहाज़ भी उनकी मदद कर रहे हैं.
एक रिमोट पनडुब्बी वाला व्यावसायिक जहाज़ डीप एनर्जी भी उस जगह पर पहुंच चुका है.
समुद्र विज्ञानी और जहाज़ के मलबे को खोजने वाले चर्चित हस्ती डेविड मर्न्स ने बीबीसी से कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि डीप एनर्जी की पनडुब्बी 3,800 मीटर की गहराई में टाइटैनिक के मलबे के पास ग़ायब पनडुब्बी को ढूंढ सकती है.
इस पनडुब्बी में सवार दो यात्रियों 58 साल के हार्डिंग और 77 साल के नार्जेलेट को मर्न्स व्यक्तिगत रूप से जानते हैं.
हार्डिंग एक जाने-माने एक्सप्लोरर हैं जो अंतरिक्ष तक जा चुके हैं और उनके नाम तीन गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स हैं. बीते सप्ताह उन्होंने कहा था कि उन्हें आख़िरकार ये घोषणा करते हुए गर्व हो रहा है कि वो इस मिशन का हिस्सा हैं.

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10,000 वर्ग किलोमीटर का इलाक़ा खंगाला
टाइटैनिक का मलबा कनाडा के न्यूफ़ाउंडलैंड के सेंट जॉन्स के दक्षिण में 700 किलोमीटर दूर है. हालांकि ये बचाव और खोजी अभियान अमेरिकी शहर बोस्टन से चल रहा है.
अमेरिकी कोस्ट गार्ड ने कहा है कि पनडुब्बी की सहायता वाला जहाज़ पोलर प्रिंस और डीप एनर्जी गहरे समुद्र में खोजी अभियान जारी रखे हुए हैं.
कोस्ट गार्ड ने बताया है कि कनाडाई पी-3 ऑरोरा विमान ने इलाक़े में सोनार से खोजबीन की है और उसने मंगलवार की सुबह तक 10,000 स्क्वेयर किलोमीटर को खोजा है.
मंगलवार को ही फ़्रांस के समुद्र मामलों के मंत्रालय ने अपने अटलांटे जहाज़ को भी खोजी अभियान में लगाया है. इस जहाज़ के पास अपना एक रोबोट है जो समुद्र में मदद करेगा.
ग़ायब हुई ओशनगेट कंपनी की टाइटन पनडुब्बी में बीते साल सीबीएस के पत्रकार डेविड पोग ने सफ़र किया था और वो टाइटैनिक के मलबे तक गए थे.
उन्होंने बीबीसी से कहा कि सपोर्ट शिप पनडुब्बी के ऊपर होता है और दोनों आपस में टेक्स्ट मैसेज भेजने में सक्षम होते हैं. जीपीएस या रेडियो सिस्टम से बातचीत गहरे पानी में नहीं हो पाती है.
पोग ने ये भी कहा कि पनडुब्बी में बैठे लोग ख़ुद भी बाहर नहीं निकल सकते हैं क्योंकि पनडुब्बी को बाहर से मज़बूती से सील किया हुआ होता है.

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आम पनडुब्बी से कैसे अलग है?
ये सबमर्सिबल पनडुब्बी एक आम पनडुब्बी से अलग कैसे है?
नेशनल ओशनिक एंड एटमोसफ़ेरिक एडमिनिस्ट्रेशन के अनुसार, एक पनडुब्बी किसी तट से स्वतंत्र तरीक़े से ख़ुद आ और जा सकती है जबकि एक सबमर्सिबल पनडुब्बी के पास बहुत सीमित ताक़त होती है और उसे समुद्र के नीचे जाने और ऊपर आने के लिए एक जहाज़ की ज़रूरत होती है.
इसके साथ ही यह भी तथ्य है कि समुद्र के नीचे तलहटी में रोशनी बिलकुल ग़ायब रहती है.
ओशनगेट ने अपनी वेबसाइट पर बताया है कि उसके पास तीन पनडुब्बियां हैं जिनमें से केवल टाइटन ही टाइटैनिक के मलबे के पास पहुंचने में सक्षम है.
इस पनडुब्बी का वज़न 10 हज़ार 432 किलोग्राम है और वेबसाइट की मानें तो ये 13 हज़ार 100 फ़ुट की गहराई तक जा सकती है.
आठ दिन की इस यात्रा के लिए ढाई लाख डॉलर यानी 2 करोड़ रुपये से भी अधिक राशि की टिकट खरीदी जाती है. इस यात्रा के ज़रिए टाइटैनिक के मलबे को समुद्र में 3800 मीटर नीचे जाकर देखा जा सकता है.
बीते सप्ताह हार्डिंग ने सोशल मीडिया पर लिखा था कि ‘न्यूफाउंडलैंड में बीते 40 सालों में बेहद कड़ाके की सर्दियों के बाद ये साल 2023 में टाइटैनिक तक पहुंचने का पहला और इकलौता मानवीय मिशन है.’
उन्होंने लिखा, “मौसम खुल चुका है और हम कल डाइव की कोशिश करने जा रहे हैं.”

ओशनगेट ने कहा है कि वो एक्सप्लोर करने वाली अपनी एक सबमर्सिबल से संपर्क स्थापित नहीं कर पा रही है लेकिन उसका पूरा ध्यान सबमर्सिबल के क्रू और उनके परिवार पर है.
कंपनी ने आगे कहा, “सबमर्सिबल से वापस संपर्क स्थापित करने के लिए कई सरकारी एजेंसियों और डीप सी कंपनियों से मिल रही इस व्यापक मदद के लिए हम आभारी हैं.”
ये कार्बन-फ़ाइबर से बनी पनडुब्बी है जो न्यूफ़ाउंडलैंड के सेंट जॉन्स से यात्रा शुरू करती है और मलबे तक जाती है. समुद्र में उतरने से लेकर वापस ऊपर आने में इसमें तक़रीबन आठ घंटों का समय लगता है.
वेबसाइट के अनुसार, इस साल एक यात्रा जारी है जबकि जून 2024 में दो और यात्राएं होनी हैं.
साल 1912 में दुनिया के सबसे बड़े जहाज़ टाइटैनिक ने ब्रिटेन के साउथैम्पटन से न्यूयॉर्क की अपनी पहली यात्रा शुरू की थी लेकिन वो एक हिमखंड से टकरा गया. इस जहाज़ में सवार 2,200 में से 1,500 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी.
इस जहाज़ का मलबा पहली बार 1985 में खोजा गया था.
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