पीएम मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री के बीच हरदीप सिंह निज्जर और अन्य मुद्दों पर क्या हुई बात?

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 साल बाद कनाडा पहुंचे. अंतिम बार वे साल 2015 में कनाडा आए थे.
इस बार पीएम मोदी अल्बर्टा प्रांत के कैनेनास्किस में आयोजित जी‑7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने गए थे.
यह यात्रा ऐसे समय में हुई, जब पिछले कुछ महीनों में भारत–कनाडा के संबंधों में खटास देखी गई है.
मंगलवार को जी‑7 सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी की कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी से मुलाक़ात हुई.
यह दोनों नेताओं की पहली आधिकारिक बातचीत थी. कार्नी ने हाल ही में कनाडा में हुए आम चुनाव के बाद पीएम का पद संभाला है. इस मुलाक़ात की जानकारी पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म 'एक्स' पर साझा की.
पीएम मोदी ने कहा, "मैं और पीएम कार्नी भारत-कनाडा संबंधों को गति देने के लिए काम कर रहे हैं."
जून 2023 में ख़ालिस्तान समर्थक नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद दोनों देशों के संबंध तनावपूर्ण हो उठे थे. उस दौरान रिश्ता इतना बिगड़ा था कि दोनों देशों ने एक दूसरे के राजनयिकों को निकाल दिया था.

उच्चायुक्तों को बहाल करने पर सहमति: मार्क कार्नी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाक़ात के बाद कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने एक आधिकारिक बयान जारी किया है.
इसमें कहा गया है कि दोनों नेताओं ने उच्चायुक्तों की नियुक्ति बहाल करने पर सहमति जताई है.
बयान में कहा गया, "प्रधानमंत्री कार्नी और प्रधानमंत्री मोदी ने आपसी सम्मान, क़ानून के शासन, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सिद्धांतों पर आधारित कनाडा–भारत संबंधों के महत्व की पुष्टि की. नेताओं ने नागरिकों और व्यवसायों को नियमित सेवाएं बहाल करने के उद्देश्य से नए उच्चायुक्तों को नामित करने पर सहमति व्यक्त की."
पिछले वर्ष तनाव बढ़ने के बाद भारत ने कनाडा में तैनात अपने उच्चायुक्त संजय कुमार वर्मा और अन्य राजनयिकों को वापस बुलाया था. साथ ही भारतीय विदेश मंत्रालय ने कनाडा के छह राजनयिकों को निष्कासित करने का निर्णय लिया था.
विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा, "प्रधानमंत्रियों ने इस महत्वपूर्ण रिश्ते में स्थिरता बहाल करने के लिए सोच-समझकर क़दम उठाने पर सहमति जताई. पहला क़दम दोनों राजधानियों में उच्चायुक्तों की शीघ्र नियुक्ति रहेगा. अन्य कूटनीतिक क़दम भी समय पर उठाए जाएंगे."
भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर जारी बयान में कहा गया है, "नेताओं ने विश्वास को बहाल करने और संबंधों में गति लाने के लिए वरिष्ठ मंत्री स्तर से लेकर कार्य-स्तरीय संवाद को फिर शुरू करने की आवश्यकता पर बल दिया. दोनों पक्ष स्थिरता बहाल करने के लिए संतुलित और रचनात्मक क़दम उठाने के लिए सहमत हैं, जिसकी शुरुआत उच्चायुक्तों की जल्द वापसी से होगी."
पिछले महीने ही, भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद के बीच फ़ोन पर बातचीत हुई थी. इस बातचीत में दोनों ने द्विपक्षीय आर्थिक साझेदारी को गहरा करने और साझा प्राथमिकताओं पर कार्रवाई बढ़ाने पर चर्चा की थी.
निज्जर पर क्या बोले कार्नी?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाक़ात के बाद कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी से पत्रकारों ने हरदीप सिंह निज्जर की हत्या पर सवाल किया. हालांकि, उन्होंने इस पर कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं की.
पत्रकार ने पूछा, "प्रधानमंत्री मोदी से मुलाक़ात के दौरान आपने कनाडाई सिख एक्टिविस्ट हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर क्या बात की?"
इस पर प्रधानमंत्री कार्नी ने जवाब दिया, "हमने क़ानून के स्तर पर न सिर्फ संवाद किया, बल्कि सहयोग के महत्व पर भी चर्चा की. इस मामले में एक न्यायिक प्रक्रिया चल रही है और मुझे आगे कोई टिप्पणी करते समय सावधानी बरतनी होगी."
गौरतलब है कि कनाडा के पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने अपने कार्यकाल के दौरान भारत पर गंभीर आरोप लगाते हुए कनाडा की संसद में कहा था कि हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के पीछे भारत सरकार का हाथ हो सकता है.
सितंबर 2023 में ट्रूडो ने कहा था, "पिछले कुछ हफ़्तों से कनाडा की सुरक्षा एजेंसियां इस बात की जांच कर रही थीं कि क्या भारत सरकार के एजेंटों का हरदीप सिंह निज्जर की हत्या से कोई संबंध है."
उन्होंने यह भी कहा था कि कनाडा के पास इस अपराध में भारतीय अधिकारियों के शामिल होने से जुड़े "ठोस सबूत" हैं.
भारत ने इन आरोपों को सिरे से ख़ारिज करते हुए कनाडा से सार्वजनिक रूप से सबूत पेश करने की मांग की थी.
भारत-कनाडा के बीच विवाद क्यों?

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पिछले कुछ समय से भारत और कनाडा के संबंध अपने सबसे ख़राब दौर से गुज़र रहे हैं. सोवियत संघ के विघटन के बाद किसी भी पश्चिमी देश के साथ भारत के रिश्ते इतने तनावपूर्ण नहीं रहे.
भारत का आरोप है कि कुछ कनाडा के सिख ख़ालिस्तानी आंदोलन को समर्थन दे रहे हैं और यही दोनों देशों के बीच टकराव का मुख्य बिंदु है.
भारत, कनाडा से ऐसे कुछ व्यक्तियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग करता रहा है, जिन पर वह ख़ालिस्तानी समर्थक होने का आरोप लगाता है. लेकिन कनाडा अक्सर भारत की इन मांगों को नज़रअंदाज़ करता रहा है.
हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के मामले में कनाडा का कहना है कि वह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत आज़ादी का पक्षधर है, और किसी को अपनी राय रखने से रोका नहीं जा सकता.
अक्तूबर 2024 में कनाडा की पुलिस, रॉयल कनेडियन माउंटेड पुलिस (आरसीएमपी) ने भारत सरकार पर कनाडा की धरती पर हिंसा फैलाने के आरोप लगाए थे.
आरसीएमपी के प्रमुख माइक डुहेम ने कहा था कि भारत सरकार कनाडा में "बड़े पैमाने पर हिंसा" में शामिल रही है, जिसमें हत्या जैसी घटनाएं भी शामिल हैं, और यह सार्वजनिक सुरक्षा के लिए गंभीर ख़तरा पैदा करता है.
इसके बाद जस्टिन ट्रूडो ने कहा था कि भारत ने इस मामले में सहयोग करने से इनकार कर दिया था जबकि यह एक आपराधिक जांच है, जिसमें भारत सरकार के एजेंटों के कथित रूप से शामिल होने के आरोप हैं.
भारत ने इन सभी आरोपों को सिरे से ख़ारिज किया था.
निज्जर की हत्या से जुड़े मामले में कनाडा ने भारत के उच्चायुक्त संजय कुमार वर्मा समेत कुछ अन्य अधिकारियों को 'पर्सन्स ऑफ इंटरेस्ट' बताया था, जिस पर भारत ने कड़ा विरोध जताया था.
हरदीप सिंह निज्जर कौन थे?

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साल 2023 के जून में 45 वर्षीय खालिस्तान समर्थक हरदीप सिंह निज्जर की कनाडा में हत्या कर दी गई. यह घटना ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत के सरे शहर में स्थित गुरु नानक सिख गुरुद्वारा साहिब की पार्किंग में हुई थी.
हरदीप सिंह निज्जर, सरे स्थित उसी गुरुद्वारे के प्रमुख थे और भारत सरकार की 'वांटेड' सूची में शामिल थे. साल 2020 में भारत सरकार ने उन्हें 'आतंकवादी' घोषित किया था.
निज्जर का ताल्लुक पंजाब के जालंधर ज़िले के भार सिंह पुरा गांव से था.
भारत सरकार के अनुसार, "हरदीप सिंह निज्जर खालिस्तान टाइगर फ़ोर्स के सदस्य थे. वे संगठन के संचालन, नेटवर्किंग, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता के मामलों में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे."
हरदीप सिंह निज्जर वर्ष 1997 में कनाडा गए थे. हत्या से पहले तक वे वहां प्लंबर के रूप में काम कर रहे थे.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित













