You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
शरद पवार पीएम मोदी के साथ करेंगे मंच साझा, विपक्ष को क्यों लग रहा है डर - प्रेस रिव्यू
26 दलों के विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ में एनसीपी चीफ शरद पवार की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से होने वाली मुलाकात पर सवाल उठाए जा रहे हैं.
पवार 1 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मंंच साझा करेंगे.
‘द हिंदू’ ने इस पर विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की .
अख़बार ने लिखा है कि विपक्षी दलों के गठबंधन ‘इंडिया’ में इस मामले को लेकर चिंता है.
शुक्रवार को संसद में इस गठबंधन की बैठक में मोदी और पवार की होने वाली मुलाकात पर कई नेताओं ने आपस में चर्चा की.
उनका कहना था कि इस मुलाकात से विपक्षी गठबंधन को लेकर गलत संदेश जाएगा. खासकर ऐसे समय में जब विपक्ष मणिपुर हिंसा पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संसद में बयान देने की मांग को लेकर सरकार पर हमलावर है.
पीएम मोदी पुणे में लोकमान्य तिलक स्मारक मंदिर ट्रस्ट की ओर से आयोजित लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार समारोह में हिस्सा लेंगे. 1 अगस्त को होने वाले इस समारोह में पवार मुख्य अतिथि होंगे.
केजरीवाल करेंगे अपील
‘द हिंदू’ ने विश्वस्त सूत्रों के हवाले से लिखा है कि शुक्रवार को संसद में ‘इंडिया’ के नेताओं की बैठक में एक क्षेत्रीय पार्टी के नेता ने मोदी और पवार की संभावित मुलाकात का मुद्दा छेड़ा था. विपक्षी गठबंधन के नेताओं ने इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान इस मुलाकात को लेकर निराशा ज़ाहिर की.
कुछ नेताओं का विचार था कि कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे पवार को समझाएं कि वो इस समारोह में न जाएं.
विपक्षी गठबंधन के नेताओं की इस बैठक में एनसीपी के राज्यसभा सांसद वंदना चह्वाण मौजूद थीं. लेकिन उन्होंने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की.
बताया जाता है कि इस मीटिंग में एक बड़े नेता ने कहा, "हम सोते हुए को जगा सकते हैं लेकिन क्या हम उसे जगा सकते हैं जो सोने का बहाना कर रहा हो?’’
आम आदमी पार्टी के नेताओं ने कहा कि सोमवार को लोकसभा में दिल्ली सर्विसेज बिल पेश किया जा सकता है और उसके बाद मंगलवार यानी 1 अगस्त को इसे राज्यसभा में रखा जा सकता है. विपक्ष को इस बिल को गिरवाना है इसलिए इसके सभी सांसदों का होना जरूरी है.
उन्होंने कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल शरद पवार से अनुरोध करेंगे कि वो 1 अगस्त को पुणे के पुरस्कार समारोह में हिस्सा न लेकर संसद में मौजूद रहें.
मॉब लिंचिंग पर केंद्र और राज्यों के रवैये से सुप्रीम कोर्ट खफ़ा, जारी किया नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने देश में बार-बार होने वाली मॉब लिंचिंग और भीड़ के हमलों पर कम से कम छह राज्यों से जवाब तलब किया है.
‘द हिंदू’ ने इस मामले पर विस्तृत रिपोर्ट छापी है. अख़बार ने लिखा है कि सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय गृह मंत्रालय और महाराष्ट्र, ओडिशा, हरियाणा, राजस्थान, बिहार और मध्य प्रदेश के पुलिस प्रमुखों से इस मामले में दायर याचिका का जवाब देने को कहा गया है.
इस संबंध में दायर एक याचिका में कहा गया है कि पांच साल पहले इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद मॉब लिंचिंग की घटनाएं रुकी नहीं हैं.
इस फैसले में कहा गया था कि अल्पसंख्यक समेत किसी भी समुदाय की रक्षा की जिम्मेदारी सरकारी मशीनरी पर है.
जाने-माने वकील कपिल सिब्बल ने जस्टिस बीआर गवई की बेंच के सामने अपनी दलील शुरू करने से पहले सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया कि उन्हें ये नहीं कहा जाए कि ऐसे मामलों में हाई कोर्ट जाएं.
उन्होंने कहा मॉब लिंचिंग और भीड़ की हिंसा के ये मामले तमाम राज्यों में हो रहे हैं. इसलिए इसके शिकार लोगों को राज्यों की अदालतों में जाने को न कहा जाए.
सिब्बल ने कहा, "अगर वो वहां जाते भी हैं तो उन्हें सिर्फ दो लाख के मुआवज़े के अलावा कुछ नहीं मिलने वाला."
नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन विमेन की ओर से दलील पेश करते हुए सिब्बल ने 2018 के तहसीन पूनावाला केस का जिक्र करते हुए कहा कि किस तरह मॉब लिंचिंग और भीड़ की ओर की जाने वाली हिंसा के खतरे बढ़ते जा रहे हैं. लिहाजा इन्हें शुरू में ही कुचल दिया जाना चाहिए.
कोर्ट ने मॉब लिंचिंग पर चेतावनी देते हुए कहा था कि फेक न्यूज़, झूठी अफवाहों और नैतिकता के ठेकेदारों से प्रेरित होकर की जाने वाली हिंसा देश को किसी तूफानी दैत्य की तरह निगल जाएगा.
10 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने एक अलग केस में कहा था कि लिंचिंग के मामले में केंद्र और राज्य सरकारों ने सजा देने के लिए अब तक क्या कदम उठाए हैं, उनकी पड़ताल की जाए.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि 2018 में मॉब लिंचिंग पर उसके फैसले पर कितना अमल हुआ है, उसका भी ब्योरा दिया जाए.
ब्रह्मोस मिसाइल की सीक्रेट जानकारी देने की फ़िराक में था जासूसी में गिरफ़्तार वैज्ञानिक
डीआरडीओ जासूसी कांड में नई जानकारियां सामने आई हैं.
‘इंडियन एक्सप्रेस’ की एक ख़बर के मुताबिक़ एटीएस की जांच से पता चला है कि डीआरडीओ जासूसी कांड में गिरफ़्तार वैज्ञानिक प्रदीप कुरुलकर ने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी से जुड़ी महिला को ब्रह्मोस मिसाइल से जुड़े गुप्त दस्तावेज दिखाने का वादा किया था.
कुरुलकर से मुलाकात के दौरान इस महिला ने अपना नाम ज़ारा दासगुप्ता बताया था.
डीआरडीओ के आरएंडडी इस्टेब्लिशमेंट (इंजीनियर्स) के प्रमुख कुरुलकर को जासूसी और पाकिस्तान इंटेलिजेंस ऑपरेटिव से बात करने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था.
उन पर जासूसी का शक है. समझा जाता है कि कुरुलकर हनी ट्रैप में फंसे थे.
एटीएस के मुताबिक़ पाकिस्तानी जासूस ने उनसे व्हॉट्सऐप पर संपर्क करने के बाद उन्हें कई अश्लील मैसेज भेजे थे.
उसने उनसे वॉयस और वीडियो कॉल के जरिये 10 जून 2022 से लेकर 24 फरवरी 2023 तक कई बार बात की थी.
एटीएस का कहना है कि ज़ारा कुरुलकर से डीआरडीओ की कुछ परियोजनाओं से जुड़ी गुप्त जानकारी हासिल करने की कोशिश कर रही थी.
एटीएस ने जो चार्जशीट दाखिल की है उसके मुताबिक़ दोनों के बीच 19 अक्टूबर 2022 से लेकर 28 अक्टूबर 2022 तक ब्रह्मोस मिसाइल के बारे में बात हुई थी.
कुरुलकर ने कहा था कि उन्होंने ब्रह्मोस मिसाइल के सभी वर्जन के बारे में 186 पन्नों की रिपोर्ट तैयार की है.
उन्होंने कहा था कि वो वॉट्सऐप या मेल पर इनकी कॉपी नहीं भेज सकते क्योंकि ये काफी गोपनीय दस्तावेज हैं. कुरुलकर ने कहा था जब ज़ारा भारत आएगी तो वो उन्हें ये दिखा सकते हैं.
माइक्रोन देश का पहला सेमीकंडक्टर प्लांट लगाने को तैयार
भारत वैश्विक मूल्य शृंखला में भरोसेमंद व अग्रणी भागीदार बनने के लिए सेमीकंडक्टर के विनिर्माण से लेकर डिजाइन पर भारी जोर दे रहा है.
'अमर उजाला' ने लिखा है कि इस वजह से फॉक्सकॉन के अलावा अन्य बड़ी विदेशी कंपनियां भी भारत के सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र में दिलचस्पी दिखा रही हैं.
इस कड़ी में आगे बढ़ते हुए एक ओर जहां सेमीकंडक्टर बनाने वाली अमेरिकी कंपनी माइक्रोन टेक्नोलॉजी 2.75 अरब डॉलर की लागत वाला गुजरात में देश का पहला चिप विनिर्माण प्लांट लगाने वाली है.
वहीं अमेरिका की ही एक और बहुराष्ट्रीय सेमीकंडक्टर निर्माता कंपनी एडवांस्ड माइक्रो डिवाइसेज (एएमडी) ने भी भारत में अगले 5 साल में 40 करोड़ डॉलर (करीब 3,300 करोड़ रुपये) के निवेश करने की घोषणा की है.
पीएम नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में गांधीनगर में हो रही सेमीकॉन इंडिया कॉन्फ्रेंस-2023 में शुक्रवार को माइक्रोन टेक्नोलॉजी के सीईओ संजय मेहरोत्रा ने कहा कि कंपनी गुजरात में भारत की पहली सेमीकंडक्टर विनिर्माण प्लांट लगाने के लिए तैयार है.
इससे आने वाले वर्षों में कुल 20,000 रोजगार पैदा होंगे.
इनमें 5,000 प्रत्यक्ष और 15,000 अप्रत्यक्ष नौकरियां शामिल हैं.
ये भी पढ़ें : -
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)