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डीआरडीओ वैज्ञानिक कथित जासूसी के मामले में गिरफ़्तार
- Author, संजय तिवारी
- पदनाम, नागपुर से, बीबीसी हिंदी के लिए
नागपुर में डिफ़ेंस रिसर्च डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (डीआरडीओ) के प्रोजेक्ट ब्रह्मोस मिसाइल यूनिट में कार्यरत एक युवा वैज्ञानिक निशांत अग्रवाल को सोमवार को जासूसी के आरोपों में हिरासत में लिया गया है.
उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के आतंकवाद निरोधी दस्तों ने इंटेलिजेंस यूनिट्स की देखरेख में यह कारवाई की है.
यूपी एटीएस के आईजी असीम अरुण ने मीडिया से बात करते हुए कहा है, "मंगलवार तक नागपुर में कानूनी कार्रवाई करने के बाद हम निशांत को लखनऊ लाएंगे."
असीम अरुण ने ये भी साफ़ किया है कि अभी तक निशांत पर गोपनीय चीज़ों को अपने पास रखने का आरोप है. उन्होंने कहा, "क्या निशांत ने ये जानकारी किसी को ट्रांसमिट किया है या नहीं किया है और क्या उसके लिए कोई पैसे मिले हैं, इसकी जांच की जा रही है."
'हनी ट्रैप' का मामला
जांच अधिकारी इस मामले में ये जांच कर रहे हैं कि क्या इस युवा वैज्ञानिक ने ब्रह्मोस मिसाइलों से जुड़ी तकनीकी और अन्य अहम गोपनीय जानकारियाँ पाकिस्तान की इंटर सर्विसेस इंटेलिजेंस (आईएसआई) को दी हैं.
असीम अरुण के मुताबिक ये हनी ट्रैप का मामला भी हो सकता है क्योंकि निशांत की दो महिलाओं के छद्म नामों से बनी फ़ेसबुक आईडी से चैट के सबूत मिले हैं और ये आईडी पाकिस्तान से संचालित की जा रही थी.
वैसे इस मामले में कानपुर और आगरा से भी एक एक व्यक्ति की तलाशी ली गई, पूछताछ हुई और परीक्षण के लिए उनके लैपटॉप ज़ब्त किए गए हैं.
आईआईटी से रिसर्च इंटर्न
निशांत अग्रवाल बीते चार वर्षों से ब्रह्मोस मिसाइल यूनिट के प्रोजेक्ट में काम कर रहे थे और साल 2017-2018 को उन्हें युवा वैज्ञानिक पुरस्कार से नवाज़ा गया था.
उनके फेसबुक अकाउंट पर इसकी तस्वीर भी है. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी कुरुक्षेत्र से इंजीनियरिंग कर चुके निशांत आईआईटी रूड़की में रिसर्च इंटर्न रह चुके हैं.
उत्तराखंड निवासी निशांत के फ़ेसबुक पेज की तस्वीरों में देखें तो वह बेहतरीन कपड़े और बाइक्स का शौक रखने वाले युवक नजर आते हैं.
निशांत अग्रवाल नागपुर वर्धा हाइवे से सटे उज्वल नगर इलाक़े में एक किराये के मकान में रहते हैं.
मकान मालिक मनोहर काले ने बीबीसी को बताया, ''निशांत पिछले चार वर्षों से वहाँ रह रहे हैं और इसी वर्ष मार्च महीने में उनकी शादी हुई है. कुछ अधिकारी आए थे लेकिन हमें उनके या कार्रवाई के बारे में कुछ भी पता नहीं.''
दो अन्य अधिकारी सवालों के घेरे में
इस मामले में कानपुर स्थित रक्षा प्रयोगशाला डीएमएसआरडीई अर्थात डिफेन्स मटेरियल्स एंड स्टोर्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट के दो अन्य वैज्ञानिक भी जांच के दायरे में हैं और उन्हें हिरासत में लिया जा चुका है.
सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी पीकेबी चक्रबर्ती महाराष्ट्र के डीजीपी रह चुके हैं. उन्होंने बीबीसी से बात करते हुए इसे बेहद गंभीर मामला बताया.
उन्होंने कहा, "जासूसी करने पर ऑफ़िशियल सिक्रेट्स एक्ट की धाराएँ लागू हो सकती हैं, किन्तु यदि ये काम देश के ख़िलाफ़ किया जाता हो तो देशद्रोह का मामला बनता है. सब कुछ सबूतों पर निर्भर होता है. ये पहला मामला नहीं है, इसके पहले भी हमारे कुछ अधिकारी ऐसी ग़लतियाँ कर चुके हैं."
रक्षा मामलों के जानकार सेवानिवृत्त कर्नल अभय पटवर्धन भी इसे गंभीर मामला मानते हैं. उनका कहना है, ''इस पूरे मामले में कहीं न कहीं कोई इंसानी कूरियर शामिल होगा जिसे गोपनीय जानकारी के फिजिकल प्रिंटआउट दिए जाते होंगे, क्योंकि सरकारी एजेंसियाँ इंटरनेट और सोशल मीडिया पर नजरें रखती हैं.''
भारत और रूस के संयुक्त प्रयासों से विकसित ब्रह्मोस कम दूरी की सुपरसॉनिक क्रूज़ मिसाइल है. रडार की नजरें बचाकर मात्र दस मीटर ऊँचाई से भी इसे दागा जा सकता है.
अमरीकी टॉम हॉक से बेहतर शक्ति से वार करने में समर्थ ब्रह्मोस को थल, युद्धपोत, आकाश, पनडुब्बी कहीं से भी लॉन्च किया जा सकता है.
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